राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एल्गार परिषद (Elgar Parishad) के आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग (Surendra Gadling) और सुधीर धवले (Sudhir Dhawale) द्वारा दायर याचिका का जवाब देते हुए कहा है कि उनका किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं है.
मानवाधिकार वकील सुरेंद्र गाडलिंग और लेखक-कार्यकर्ता सुधीर धवले ने जून 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें पुणे पुलिस से एनआईए को जांच स्थानांतरित करने को चुनौती दी गई थी. मामले को 24 जनवरी, 2020 को पुणे पुलिस से एनआईए को स्थानांतरित कर दिया गया था. दोनों आरोपियों को 2018 में पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था.
दोनों की याचिका में कहा गया था कि केस ट्रांसफर के कारण राजनीतिक थे. याचिका में कहा गया था, 'फडणवीस सरकार ने दिसंबर 2017-जनवरी 2018 में पुणे के कोरेगांव भीमा में हिंसा की घटना का इस्तेमाल किया, ताकि प्रभावशाली दलित विचारकों को टारगेट किया जा सके.'
एनआईए का जवाब
एनआईए ने कहा, 'याचिकाकर्ता के पास जांच को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता आरोपी है और इसलिए जांच को सौंपने के निर्णय से पीड़ित नहीं हो सकता है. शुरुआत से ही आरोपी की दलील द्वेष से भरी हुई है जो सरासर झूठ के अलावा और कुछ नहीं है.'
हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि आरोपी अपनी सुविधा के अनुसार कानून को मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे खुद को निर्दोष साबित कर सकें, जबकि एजेंसी केवल कानून के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है, आरोपी केवल एनआईए की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं.
एनआईए के हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि मामले के अन्य आरोपियों के साथ गाडलिंग और धवले ने सीधे या दूसरों के माध्यम से रिट, जनहित याचिका दायर करने की परंपरा बना ली है, खासकर जब जांच जारी है. एनआईए ने कोर्ट से दोनों की ओर से दायर याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है. अब इस याचिका पर 23 जुलाई को सुनवाई होगी.