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उद्धव सेना के MP अनिल देसाई को HC से राहत, चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

महेंद्र भिंगारदिवे ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने अनिल देसाई के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे कथित तौर पर अधूरे थे. मेरी आपत्तियों के बावजूद, रिटर्निंग ऑफिसर ने अधूरे नामांकन पत्रों को स्वीकार कर लिया.

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बॉम्बे हाई कोर्ट. (PTI/File Photo)
बॉम्बे हाई कोर्ट. (PTI/File Photo)

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में मुंबई दक्षिण मध्य लोकसभा सीट से शिवसेना (यूबीटी) नेता अनिल देसाई की जीत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. देसाई ने मुंबई साउथ सेंट्रल सीट से एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना उम्मीदवार राहुल शेवाले को 53,384 वोटों से हराया था.

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वकील महेंद्र भिंगारदिवे द्वारा दायर याचिका में यह मांग की गई थी कि अनिल देसाई के साथ-साथ चुनाव लड़ने वाले अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को दोषपूर्ण और अपूर्ण होने के कारण अमान्य करार दिया जाए. याचिका में यह भी मांग की गई कि भिंगारदिवे को दक्षिण-मध्य मुंबई लोकसभा सीट से निर्वाचित उम्मीदवार घोषित किया जाए.

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क्यों दी गई थी अनिल देसाई के चुनाव को चुनौती

महेंद्र भिंगारदिवे ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने अनिल देसाई के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे कथित तौर पर अधूरे थे. मेरी आपत्तियों के बावजूद, रिटर्निंग ऑफिसर ने अधूरे नामांकन पत्रों को स्वीकार कर लिया. उन्होंने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया कि अनिल देसाई ने तीन नामांकन पत्र दाखिल किए थे, जबकि आरओ द्वारा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर केवल एक हलफनामा अपलोड किया गया था. ये आरोप 13 अन्य उम्मीदवारों पर भी लगे थे.

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वकील महेंद्र भिंगारदिवे द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए, अनिल देसाई ने उन पर क्यों कार्रवाई की जानी चाहिए याचिकाकर्ता द्वारा इसके कारण का खुलासा न करने और दस्तावेज में छेड़छाड़ होने का हवाला देते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की. अनिल देसाई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि यह मानते हुए भी कि हलफनामे में खामियां हैं, जब तक उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं पेश किया जाता है, तब तक चुनाव को अमान्य नहीं करार दिया जा सकता. 

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HC ने याचिका खारिज करने की क्या वजह बताई

न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की पीठ ने कहा, 'पूरी याचिका को पढ़ने के बाद, इस बात का पता नहीं लगता कि त्रुटिपूर्ण नामांकन पत्रों को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा स्वीकार किए जाने के बावजूद, इससे चुनाव किस तरह से प्रभावित हुआ.' पीठ ने कहा कि नियमों के तहत, नामांकन पत्रों की अनुचित स्वीकृति और संविधान या वैधानिक प्रावधानों या नियमों या आदेशों का अनुपालन नहीं करना और इसके परिणामस्वरूप चुनाव परिणाम का प्रभावित होना, किसी के निर्वाचन को रद्द करने का ठोस आधार माना जाता है.

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न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने कहा, 'यह ध्यान में रखते हुए कि एक चुनाव याचिका में, दलीलें विशिष्ट, सटीक और स्पष्ट होनी चाहिए... यदि याचिका इस कारण का खुलासा नहीं करती है कि जिस पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों होनी चाहिए, तो इसे तुरंत खारिज कर दिया जा सकता है.' न्यायमूर्ति देशमुख ने अपने फैसले में कहा कि महेंद्र भिंगारदिवे निर्धारित प्रारूप में याचिका दायर करने में विफल रहे हैं, लिहाजा इसे खारिज किया जाता है.

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