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पुणे: शरजील उस्मानी के खिलाफ राजद्रोह की धारा लगाने की मांग, कमिश्नर से मिले BJP नेता

बीजेपी नेताओं ने मांग की कि शरजील उस्मानी और कार्यक्रम के आयोजक रिटायर्ड जस्टिस बी जी कोलसे पाटिल के खिलाफ आईपीसी की धारा 124A यानी की राजद्रोह की धारा जोड़ी जाए.

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पूर्व छात्र नेता शरजील उस्मानी
पूर्व छात्र नेता शरजील उस्मानी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पुलिस कमिश्नर से मिले बीजेपी नेता
  • शरजील उस्मानी की गिरफ्तारी की मांग
  • शरजील पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप

पुणे के बीजेपी नेताओं ने पूर्व छात्र नेता शरजील उस्मानी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है और उस्मानी के खिलाफ दर्ज मामले में आईपीसी की धारा 124-A यानी की राजद्रोह का आरोप जोड़ने की मांग की है.  

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इस बाबत आज पुणे बीजेपी के नेताओं ने पुणे के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की. बुधवार को पुणे शहर के मेयर मुरलीधर मोहोल, बीजेपी विधायक शिरोले पूर्व बीजेपी एमपी प्रदीप रावत, पूर्व एमएलए और नगर अध्यक्ष शामिल थे. 

बीजेपी नेताओं ने मांग की कि शरजील उस्मानी और कार्यक्रम के आयोजक रिटायर्ड जस्टिस बी जी कोलसे पाटिल  के खिलाफ आईपीसी की धारा 124A यानी राजद्रोह की धारा जोड़ी जाए. बीजेपी ने नेताओं ने कहा कि शरजील उस्मानी और जस्टिस बी जी कोलसे पाटिल को तुरंत गिरफ्तार किया जाए.

बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता शरजील उस्मानी के खिलाफ अभी IPC की धारा 153-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. अभी शरजील उस्मानी पर पुणे के स्वारगेट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. उन पर भारत और हिंदू समाज के खिलाफ उकसाने वाले और भड़काऊ भाषण देने को आरोप है. बता दें कि 30 जनवरी 2021 को पुणे में एल्गार परिषद की बैठक आयोजित की गई थी. 

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शरजील उस्मानी CAA आंदोलन के खिलाफ भी बड़ा चेहरा रहा है. वह सीएए के खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हुए आंदोलन में शामिल था. यूपीए एटीएस ने पिछले साल जुलाई में शरजील उस्मानी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. 

इसके बाद सितंबर महीने में शरजील को कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया था. चार नंवबर को यूपी सरकार ने शरजील इमाम के खिलाफ गुंडा एक्ट में कार्रवाई की और उसे जिला बदर कर दिया.

 

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