पुणे का पोर्श (Porsche) हादसा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. नाबालिग आरोपी को बचाने में जुटे उसके दादा और पिता को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. वहीं इस मामले में नाबालिगों को शराब परोसने के आरोप में बार के संचालकों को भी गिरफ्तार किया गया है. केस में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं. इस सबके बीच अब घटना के समय मौके पर मौजूद चश्मदीद भी सामने आने लगे हैं. अब तक इस मामले में दो चश्मदीदों ने पूरे घटनाक्रम के बारे में सिलसिलेवार बताया है.
इन्हीं में से एक अमीन शेख ने आजतक से बातचीत की. उन्होंने बताया कि घटना उस समय घटी जब वह घटनास्थल से करीब 10 फीट दूर सड़क पार कर रहे थे. शेख के मुताबिक नाबालिग लड़का चिल्ला रहा था, जितना पैसा चाहिए ले लो मारो मत, जितना पैसा चाहिए मैं मंगाकर देता हूं अभी.
चश्मदीद अमीन शेख दुर्घटनास्थल के सीसीटीवी में भी दिखाई दे रहे हैं. फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि वह सड़क पार करके चलते हैं और उनके पीछे से एक सेकंड में ही पोर्श कार गुजरी और फिर अनीश की बाइक को टक्कर मार दी. इसकी चपेट में आने से बाइक सवार युवक और युवती की मौत हो जाती है. इसके बाद मौके पर मौजूद भीड़ गाड़ी में मौजूद लड़के की पिटाई कर देती है. और फिर उसे पुलिस को सौंप देती है.
नाबालिग ही चला रहा था पोर्श: दूसरा चश्मदीद
वहीं इससे पहले दूसरे चश्मदीद संकेत ने बताया था कार नाबालिग आरोपी ही चला रहा था. उन्होंने बताया कि घटना के दिन पोर्श कार की स्पीड बहुत ज्यादा थी. कार ने मोटरसाइकिल को इतनी जोर से टक्कर मारी कि हम कुछ समझ ही नहीं पाए. लड़की की मौके पर ही मौत हो गई थी. वह मेरे सामने ही आसमान में 15 फीट ऊपर तक उछलकर गिरी थी. लड़के का शरीर क्षत-विक्षत हो गया था.
संकेत ने बताया कि आरोपी को घटनास्थल से भागने का मौका ही नहीं मिला क्योंकि कार के सभी एयरबैग्स खुल गए थे. कार में नाबालिग आरोपी के अलावा दो से तीन शख्स और थे. एयरबैग खुलने की वजह से ये सभी लोग कार से बाहर निकल आए थे, जिसके बाद भीड़ ने आरोपी को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया. मैंने आरोपी को पकड़कर रखा था और जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची. उसे पुलिस को सौंप दिया.
रियल एस्टेट डेवलपर का बेटा है आरोपी
हिट एंड रन की ये घटना 19 मई की है. पुणे के कल्याणी नगर इलाके में रियल एस्टेट डेवलपर विशाल अग्रवाल के 17 साल आठ महीने के बेटे ने अपनी स्पोर्ट्स कार पोर्श से बाइक सवार दो इंजीनियरों को रौंद दिया था, जिससे दोनों की मौत हो गई थी. इस घटना के 14 घंटे बाद नाबालिग आरोपी को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी. कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था. हालांकि, सोशल मीडिया और मीडिया में सवाल उठने के बाद पुलिस एक्शन मोड में आई. इस बीच आऱोपी के बार में बैठकर शराब पीने का वीडियो भी वायरल हो गया. इसके बाद जांच में सामने आया कि आरोपी शराब के नशे में था और बेहद तेज गति से कार को चला रहा था. नाबालिग इस समय सुधार गृह में है.
डॉक्टर ने गायब कर दिए थे ब्लड सैंपल
शुरुआत मेडिकल रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि आरोपी नशे की हालत में नहीं था. जबकि पब और कार के सीसीटीवी फुटेज कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे थे. इन फुटेज में आरोपी को अपने दोस्तों के साथ शराब पार्टी करते देखा जा रहा था. खुद आरोपी नाबालिग के सामने शराब से भरा गिलास रखा था. लेकिन मेडिकल रिपोर्ट ने चौंकाया तो डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ भी जांच के दायरे में आ गया. नाबालिग को सबसे पहले मेडिकल टेस्ट के लिए ससून हॉस्पिटल ले जाया गया था. इस दौरान उसके ब्लड सैंपल को ऐसे शख्स के सैंपल से बदल दिया गया, जिसने शराब का सेवन नहीं किया था. ऐसे में जांच रिपोर्ट में शराब की पुष्टि नहीं हो सकी. इससे संदेह पैदा हो गया. दोबारा ब्लड रिपोर्ट आने पर शराब की पुष्टि हुई. बाद में पता चला कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने नाबालिग को बचाने के लिए ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ की थी. पुलिस ने इस मामले में फॉरेंसिंक डिपार्टमेंट के HOD समेत 2 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है.