पुणे पोर्श कार दुर्घटना के नाबालिग आरोपित के पिता विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब सतारा जिला प्रशासन ने महाबलेश्वर में विशाल के अनधिकृत रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाया है. जिला प्रशासन ने विशाल पर सरकार को चूना लगाने और नियमों का उल्लंघन करने का आरोप में संबंधित रिसॉर्ट के खिलाफ कार्रवाई की है.
नाबालिग आरोपी के पिता विशाल ने इस रिसॉर्ट सरकार की अनुमति के बाद पारसी जिमखाना की 10 एकड़ जमीन पर रिजॉर्ट बनाया था. इस जगह पर पारसी संस्कृति की विरासत वास्तुकला को सजाया गया है. ये रिसॉर्ट पारसी जिमखाना सतारा के प्रसिद्ध हिल स्टेशन महाबलेश्वर में 10 एकड़ में फैला हुआ है.
पारसी जिमखाने को पट्टे पर मिली थी जमीन
जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने पारसी ट्रस्ट के पक्ष में जिमखाना को 30 साल के लिए पट्टे पर जमीन दे दी थी. साल 2016 में 19 जून के बाद इस ट्रस्ट की कमेटी में एसके अग्रवाल का नाम सामने आया था. इसके बाद उषा अग्रवाल का नाम भी जुड़ दिया गया था, लेकिन 2020 से पहले ट्रस्ट से पारसी नाम खत्म कर दिए गए थे और बाद में दो मार्च 2020 को विशाल अग्रवाल, शिवानी अग्रवाल, श्रेय विशाल अग्रवाल और अभिषेक गुप्ता को पारसी ट्रस्ट के समिति सदस्य के रूप में नामित किया गया.
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रिसॉर्ट में बदल दिया जिमखाना
बता दें कि ये 10 एकड़ जमीन राज्य सरकार ने आवासीय इस्तेमाल के लिए पारसी ट्रस्ट को दी थी और पहले यहां पारसी समुदाय का जिमखाना था. बाद में विशाल ने जिमखाने को एक रिसॉर्ट में बदल दिया और व्यावसायिक रूप से इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया. साथ ही विशाल ने इस जिमखाने को पारसी विरासत से भी सजाया और जिमखाने में अतिरिक्त कॉटेज का भी निर्माण किया.
वहीं, इसके कुछ साल बाद उन्होंने एक होटल ब्रांड, रीजेंटा को रिसॉर्ट पट्टे (लीज) पर दे दिया था. इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने सरकार को धोखा देने और नियमों का उल्लंघन करने के लिए कार्रवाई करते हुए जिमखाने में अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर दिया. इस संपत्ति को महाबलेश्वर में एमपीजी यानी महाबलेश्वर पारसी जिमखाना के नाम से जाना जाता है.