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सलमान के घर फायरिंग मामला: आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत पर फैसला सुरक्षित

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सलमान खान के घर फायरिंग मामले में आरोपी अनुज थापन की मां की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. अधिवक्ता राणा की दलीलों के बाद न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डॉ नीला गोखले की पीठ ने कहा, 'आदेश के लिए मामला बंद कर दिया गया है.'

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बॉम्बे हाईकोर्ट. (फाइल फोटो)
बॉम्बे हाईकोर्ट. (फाइल फोटो)

सलमान खान के घर फायरिंग मामले में आरोपी अनुज थापन की पुलिस हिरासत में मौत मामले में सुनवाई पूरी कर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. पीठ ने कहा कि पीठ समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी. अनुज थापन की मां रीता देवी ने 3 मई को हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में साजिश का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके बेटे की हत्या की गई है.

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थापन की मां का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता निशांत राणा और संदीप कटके ने बुधवार को स्वीकार किया कि उन्हें मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट की एक प्रति और सीआईडी द्वारा सौंपी गई एक अंतरिम रिपोर्ट मिली है, जो मौत के लिए दर्ज दुर्घटना मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) की भी जांच कर रही है. अंतिम तर्क के दौरान प्रस्तुत किया गया कि यह एक हत्या थी, जिसे आत्महत्या करार दिया जा रहा है. याचिका में हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई द्वारा जांच की मांग की गई थी.

सही वक्त पर सुनाएगी पीठ फैसला

अधिवक्ता राणा की दलीलों के बाद न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और डॉ नीला गोखले की पीठ ने कहा, 'आदेश के लिए मामला बंद कर दिया गया है.' पीठ सही वक्त पर अपना फैसला सुनाएगी.

26 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था अनुज

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अनुज थापन को क्राइम ब्रांच ने 14 अप्रैल, 2024 को अभिनेता सलमान खान के घर पर हुई फायरिंग मामले में गिरफ्तार किया था. जबकि इस मामले में शूटर विक्की गुप्ता और सागर पाल को गुजरात से गिरफ्तार किया था. पुलिस ने थापन को 26 अप्रैल को पंजाब से इस मामले से जुड़े एक अन्य व्यक्ति के साथ गिरफ्तार किया गया था. 

पुलिस का दावा है कि थापन ने खुदकुशी की है, जबकि उसकी मां रीता देवी ने 3 मई को हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में साजिश का आरोप लगाया और दावा किया कि उसकी हत्या की गई है. हालांकि, पिछली सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट देखने के बाद पीठ ने पूछा था, "निष्कर्षों से पता चलता है कि वह अकेले बाथरूम में गया, उस बाल्टी पर खड़ा हुआ और फिर उसने खुद को फांसी लगा ली. हमें कोई उचित स्पष्टीकरण बताएं. जब 18 वर्षीय लड़का मामले में मुख्य आरोपी भी नहीं है, तो कोई उसे क्यों मारना चाहेगा?"

पीठ ने कथित आत्महत्या के समय के आसपास की अपराध शाखा की सीसीटीवी फुटेज देखी और कहा कि इससे यह संकेत नहीं मिलता कि शौचालय में थापन के साथ कोई था और फोटो से ऐसा कुछ भी नहीं पता चलता कि उसने संघर्ष किया या विरोध किया.

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