शीना बोरा की कथित हड्डियों एवं अवशेषों का पता नहीं चल पाने की सूचना देने के कुछ सप्ताह बाद बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को विशेष सीबीआई अदालत को बताया कि उन्हें वे हड्डियां मिल गई हैं. शीना बोरा की 2012 में उनकी मां इंद्राणी मुखर्जी और अन्य ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी. फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. ज़ेबा खान उस समय गवाह के कठघरे में थीं, जब पिछले महीने सरकारी वकील सीजे नंदोडे ने कहा था कि हड्डियां गायब हो गई हैं.
बुधवार को जब शीना बोरा हत्याकांड की सुनवाई शुरू हुई, खान अदालत में मौजूद थीं, लेकिन कठघरे में उनसे पूछताछ से पहले, विशेष सीबीआई न्यायाधीश एसपी नाइक निंबालकर ने बताया कि खान का भाई होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने एक ईमेल और एक हार्ड कॉपी भेजी थी.
ईमेल में लगाए थे गंभीर आरोप
ईमेल में आरोप लगाया गया था कि खान ने विदेश में संपत्तियां खरीदी हैं और आरोपियों के साथ मिलीभगत के कारण उनका बैंक बैलेंस भी बढ़ गया है. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सबूतों के अचानक गायब होने के पीछे खान और आरोपी का हाथ हो सकता है.
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इस शिकायत को देखते हुए, न्यायाधीश ने माना था कि आरोप गंभीर हैं और उनकी जांच की जानी चाहिए. आरोपी इंद्राणी मुखर्जी का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता रंजीत सांगले, पीटर मुखर्जी का प्रतिनिधित्व करने वाली अधिवक्ता मंजुला राव और संजीव खन्ना का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता श्रेयांश मिठारे ने तुरंत सहमति जताई और आगे की कार्रवाई से पहले आरोपों की जांच की मांग की.
सबूतों पर अब भरोसा नहीं
हालांकि, नंदोडे ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा और बाद में अदालत में वापस आकर कहा कि हड्डियां मालखाने में पड़ी हैं, लेकिन सीबीआई अब इन सबूतों पर भरोसा नहीं करना चाहती. नंदोडे ने जोर देकर कहा कि इस कारण से गवाह खान की जिरह नहीं रोकी जानी चाहिए.
आरोपी के वकीलों ने मांग की कि हड्डियों को अदालत में पेश किया जाए. हालांकि, जज ने कहा कि जब जांच एजेंसी इस पर भरोसा नहीं कर रही है, तो यह कवायद बेकार है. इसके बाद अदालत ने जिरह की और दिन खत्म होने से पहले प्रक्रिया पूरी कर ली. हालांकि, सांगले और राव ने फिर से मांग की कि अदालत को भेजी गई शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होनी चाहिए क्योंकि आरोप आरोपियों के खिलाफ भी लगाए गए हैं और यह उनके लिए महत्वपूर्ण है.
2012 में हुई थी शीना की हत्या
जज नाइक निंबालकर ने कहा कि इस मुद्दे पर गुरुवार को औपचारिक आदेश पारित किया जाएगा. सीबीआई का आरोप है कि शीना बोरा की 2012 में उसकी मां इंद्राणी मुखर्जी, उसके पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर राय ने गला घोंटकर हत्या कर दी थी. इसके बाद शव को कथित तौर पर पेन गांव ले जाया गया और जला दिया गया. पीटर मुखर्जी पर साजिश का हिस्सा होने का आरोप है.
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2012 में पेन पुलिस द्वारा बरामद कंकालों को जांच के लिए जेजे अस्पताल भेजा गया था. 2015 तक यह मामला अनसुलझा रहा जब राय की गिरफ़्तारी से कथित हत्या का खुलासा हुआ. बाद में राय इस मामले में सरकारी गवाह बन गया.