scorecardresearch
 

मुर्गियों का हत्याकांड! बर्ड फ्लू पर 'सामना' ने लिखा- पक्षियों व मुर्गियों का दर्द कौन समझेगा?

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में बर्ड फ्लू को लेकर चिंता जताई गई, साथ ही कहा गया कि यहां इंसानों का आक्रोश सुनने को कोई तैयार नहीं है, वहां पक्षियों और मुर्गियों की वेदना को कौन समझेगा? 

Advertisement
X
बर्ड फ्लू पर सामना का संपादकीय
बर्ड फ्लू पर सामना का संपादकीय
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बर्ड फ्लू पर सामना का संपादकीय
  • लिखा- पक्षियों व मुर्गियों का दर्द कौन समझेगा?
  • कृषि आंदोलन के बहाने केंद्र पर तंज 

कोरोना महामारी के बीच देश के कई हिस्सों में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है. महाराष्ट्र में भी बर्ड फ्लू से प्रशासन अलर्ट हो गया है. ऐसे में शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में इसको लेकर चिंता जताई गई, साथ ही कहा गया कि यहां इंसानों का आक्रोश सुनने को कोई तैयार नहीं है, वहां पक्षियों और मुर्गियों की वेदना को कौन समझेगा? 

Advertisement

सामना का संपादकीय

'सामना' के संपादकीय में लिखा गया कि कोरोना काल में इंसानों को जान गंवानी पड़ी, अब ‘बर्ड फ्लू’ का संकट आने से पक्षी और मुर्गियां मरने लगी हैं. इससे किसान तथा कुक्कुट पालन करनेवाले पोल्ट्री फार्म वालों का व्यवसाय खतरे में पड़ गया है. चिकन बिक्री में 40 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. इसकी आर्थिक मार समाज के एक बड़े वर्ग पर पड़ रही है. 

बर्ड फ्लू’ का संकट 

संपादकीय में आगे लिखा गया कि कोरोना वैक्सीन के उत्सव के दौरान ही यह नया संकट फड़फड़ाने लगा. इस बर्ड फ्लू संकट के कारण मुर्गियां और पक्षी मर रहे हैं, इससे इंसान खुश न हों. 'सामना' के मुताबिक, एक तो पहले से ही बरसात के कारण अंगूर, काजू और अन्य फलों का उत्पादन संकट में है, उसपर बर्ड फ्लू से मुर्गियों पर भी खतरा आन पड़ा है. इससे मुर्गियों तथा अंडों का व्यापार करने वाले छोटे-बड़े व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 

Advertisement

कृषि आंदोलन के बहाने तंज 

'सामना' ने लिखा कि नए कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन कर रहे हैं, इसी दौरान बर्ड फ्लू का नया संकट टूट पड़ा है. सरकारी लोगों का कहना है कि किसानों के आंदोलन के पीछे पाकिस्तानी, खालिस्तानी, चीनी, नक्सलवादी और माओवादियों का हाथ है. अब जो ये मुर्गियां और पक्षी मर रहे हैं, उनके इस रहस्यमय हत्याकांड में भी खालिस्तानी, पाकिस्तानी और नक्सलवादियों का हाथ है, ऐसा भाजपा प्रवक्ता ने घोषित नहीं किया, ये बड़ी बात है. 

देखें: आजतक LIVE TV

आखिर में 'सामना' के संपादकीय में लिखा गया कि 'बर्ड फ्लू के चलते लाखों मुर्गियों को जिंदा ही गाड़ देना पड़ेगा. यह सब निर्मम और भयानक है. संकट कतार में खड़े हैं. विरोधी भी मुर्गियों की रक्षा पर बोलें, खुद की सुरक्षा पर बाद में बोलें. मुर्गियों का ‘हत्याकांड’ धक्कादायक है.'

रिपोर्ट- शिवशंकर तिवारी

ये भी पढ़ें

Advertisement
Advertisement