मुंबई में 12 फ्लैट वाली एक छोटी सोसायटी ने खुद अपना रीडेवलपमेंट कर लिया है. कोई बिल्डर इसमें शामिल नहीं है. बैंक से 8 करोड़ रुपये का लोन लेकर नई इमारत खड़ी हो गई है. सिर्फ तीन साल में लोग अपने नए फ्लैट में शिफ्ट भी हो जाएंगे.
मुंबई में पुरानी सोसायटियों का रीडेवलपमेंट एक जुए की तरह है, बिल्डर के हाथ में प्रोजेक्ट जाने पर कब फ्लैट मिलेगा, कहना मुश्किल है. ऐसे में गोरेगांव ईस्ट की अजीतकुमार कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के लोगों ने अपनी सोसायटी का रीडेवलपमेंट खुद करने का फैसला किया.
सोसायटी डेवलपमेंट करने के लिए इन्हें मुंबई बैंक से 8 करोड़ का लोन 12 फीसदी के ब्याज पर मिला, जिसे 7 साल में चुकाना है. बैंक की शर्त ये थी कि सोसायटी के सभी सदस्य रीडेवलपमेंट के लिए राजी हों. काम शुरू होने से पहले ग्राउंड प्लस 3 स्ट्र्क्चर की बिल्डिंग मेंकुल 12 परिवार रहते थे. बैंक से मिले लोन से सभी परिवारों के किराए की रकम चुकाई जा रही है. अजीतकुमार कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के डेवलपमेंट का काम अक्टूबर 2016 से शुरू हुआ, अब तक आठ मंजिला इमारत बन कर तैयार हो चुकी है, सिर्फ एक मंजिल का काम बचा है. सोसायटी नेबिना किसी बिल्डर के ये सारा काम खुद किया है.
अजीत कुमार कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के पास 550 वर्ग मीटर का प्लॉट है, जिस पर खड़ी हुई 9 मंजिल की बिल्डिंग में 27 फ्लैट बनेंगे. एक फ्लैट सोसायटी दफ्तर के लिए रखा जाएगा. सोसाइटी के 12 परिवारों को पहले से 25 फीसदी बड़ा घर मिलेगा, बचे हुए फ्लैट बेचकर बैंक का लोन चुका दिया जाएगा. 75 फीसदी फ्लैट बिक चुके हैं. पहले सोसायटी के पास पार्किंग नहीं थी. अब हर फ्लैट मालिक को एक-एक कार पार्किंग भी मिल रही है. बिल्डरों के सताए दूसरी सोसायटी के लोग अब इस सोसायटी में आकर सलाह ले रहे हैं.
मुंबईकरों के लिए हाउसिंग सोसायटी की रीडेवलपमेंट एक बहुत बड़ा सिरदर्द है. एक बार प्रोजेक्ट बिल्डर के हाथ में जाने पर घर कब मिलेगा कोई गारंटी नहीं है. ऐसे में रीडेवलपमेंट का काम अपने हाथ में लेना रीयल एस्टेट फील्ड में एक बड़ा गेमचेंजर हो सकता है.