महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने साल 2013 में एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ के आरोपी को बरी कर दिया. कोर्ट ने 52 साल के ऑटो-रिक्शा चालक को यह कहते हुए बरी कर दिया कि पीड़िता ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया.
कल्याण में विशेष POCSO अदालत के न्यायाधीश वीए पत्रावले ने 8 मई को दिए अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा है, जिसे संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए. आदेश की प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई.
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अभियोजक ने अदालत को सूचित किया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 13 साल थी. उसने अपनी मां से शिकायत की थी कि आरोपी ड्राइवर उसे अपने ऑटो से स्कूल ले जाता था. उसने उसे अनुचित तरीके से उसे छुआ और उसे अपने माता-पिता को इसके बारे में सूचित न करने की धमकी दी.
पुलिस शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धारा 354ए (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल) और भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था.
अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि पीड़िता ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया था, इसलिए प्रमुख प्रश्न पूछने की अनुमति दी गई थी. हालांकि, इन सवालों का जवाब देते समय भी उन्होंने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया.
आदेश में कहा गया है कि जिस अपराध के लिए आरोपी पर आरोप लगाया गया है, उसके लिए उसे दोषी ठहराने के लिए आरोपी के खिलाफ रत्ती भर भी सबूत नहीं है. लिहाजा आरोपी को बरी किया जाता है.