सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार देने का बाद अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है. उद्धव ठाकरे ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के पास आरक्षण दिलाने की ताकत है. उद्धव ने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से गुजारिश करता हूं कि वह अपनी ताकत का इस्तेमाल करें, जैसे केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 खत्म करने के लिए अपनी पावर का इस्तेमाल किया था.
ठाकरे ने महाराष्ट्र को 19 मिनट तक संबोधित किया है. इस दौरान उन्होंने ज्यादातर बातें कोरोना वायरस को लेकर कहीं. लेकिन अपना संबोधन खत्म करने से पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जाहिर की. उन्होंने कहा कि जब मराठा आरक्षण का प्रस्ताव रखा गया था तो सभी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था. जब इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो हम जीत गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट में हम दुर्भाग्यवश हार गए. हम इसके बारे में विचार कर रहे हैं. हमारे पास काबिल वकील हैं. हम कोर्ट में अच्छे से लड़े. यह निराशा भरा है कि हम हार गए.
ठाकरे ने कहा, "यह लड़ाई खत्म नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने खुद अपने आदेश में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण को खारिज करते हुए आगे का रास्ता दिखाया है. मैं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को एक औपचारिक पत्र लिखूंगा और अगर जरूरत पड़ी तो मिलने भी जाऊंगा. मैं न केवल वकीलों से सलाह ले रहा हूं बल्कि यह पता लगाने के लिए कि हम और क्या कर सकते हैं. इस पर भी विचार विमर्श कर रहे हैं.''
गौरतलब है कि मराठा आरक्षण को लेकर बुधवार (5 मई) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सर्वोच्च अदालत ने शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है. अदालत के फैसले के अनुसार, अब किसी भी नए व्यक्ति को मराठा आरक्षण के आधार पर कोई नौकरी या कॉलेज में सीट नहीं दी जा सकेगी.