दरअसल, जब साल 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ, तो दोनों राज्यों के बीच में परिसंपत्तियों के बंटवारा किया गया. पर्यटन के क्षेत्र में आवासीय स्थल के रूप में पहचाने जाने वाले अलकनन्दा होटल पर उत्तराखण्ड ने अपने हक जताया. जिसका मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड के दावे को माना. बाद में दोनों सरकारों के बीच सहमति बन गई और...
इसी समझौते के तहत उत्तर प्रदेश को उत्तराखंड में जमीन उपलब्ध करवाई गई, जिस पर यूपी सरकार ने एक आलीशान 100 कमरों का पर्यटक आवास तैयार किया है और उसे नाम दिया- भागीरथी पर्यटन आवास.
खासियत यह है कि इस होटल भागीरथी आवास में 100 कमरे हैं. जिनमें 88 डीलक्स और 12 सुइट वीआईपी रूम हैं. इसी के साथ पर्यटक आवास में सेंट्रलाइज्ड एसी, 3 लिफ्ट, रेस्टोरेंट और दो बैंक्वेट हॉल की सुविधा है.
इस होटल के एक बैंक्वेट हॉल में 100 लोगों की गैदरिंग की कैपेसिटी जबकि दूसरे में 150 लोगों के जमा होने की क्षमता है. इसमें किसी खास मौके पर पर्यटक कोई कार्यक्रम भी आयोजित कर सकते हैं.
इसी के साथ-साथ होटल के निकट ही मां गंगा नदी का प्रवाह है. मतलब अगर आप इस होटल में ठहरते हैं तो मां गंगा के दर्शन आप अपने कमरे की बालकनी से भी कर सकते हैं.
होटल के साथ ही एक छोटा सा मंदिर भी बनाया गया है. इस पर्यटक आवास को बनाने के पीछे उद्देश्य यह था कि जो लोग चार धाम यात्रा के लिए आते हैं, उनको अच्छी आवास सुविधा उपलब्ध कराई जा सके. यूपी पर्यटन विभाग की तरफ से निर्मित यह आवास सभी यात्रियों के लिए उपलब्ध रहेगा.
उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अविनाश मिश्रा ने बताया, भागीरथ पर्यटक आवास में लगी पेंटिंग्स में हिंदू-धर्म की संस्कृति को दर्शाया गया है.
होटल की दीवारों पर लगाई गईं इन पेंटिंग को ललित कला अकादमी से खरीदा गया है. यह धार्मिक और सांस्कृति चित्रकलाएं भारत की संस्कृति को अभिव्यक्त करती हैं.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत भी इस होटल के उद्घाटन कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे. हरिद्वार के प्रमुख साधु-संतों का भी भागीरथ पर्यटक आवास के लोकार्पण में सानिध्य प्राप्त होने वाला है.