भारतीय नौसेना (Indian Navy) को भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत (First Indigenous Aircraft Carrier) आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) 2 सितंबर 2022 को मिल जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) इसे सेना में कमीशन करेंगे. इस युद्धपोत की ताकतों के बारे में तो कई बार बात की है. लोगों को बताया भी गया है. हम आगे भी बताते रहेंगे. लेकिन आज देखिए इसके अंदर की खास तस्वीरें... (फोटोः Indian Navy)
आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) के अंदर नौसेनिकों के लिए 16 बेड का असप्ताल है. जहां पर दो ऑपरेशन थियेटर हैं. इसके अलावा पहली बार किसी युद्धपोत में सीटी स्कैन मशीन तैनात की गई है. ताकि सैनिकों को काम या युद्ध के दौरान अंदरूनी चोट लगने पर उसकी जांच की जा सके. यह मेडिकल इमरजेंसी में बेहतरीन सुविधाएं देने के लिए बनाया गया ऑनबोर्ड मिनी अस्पताल है. (फोटोः ट्विटर/ANI)
आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) पर तैनात मेडिकल ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर हर्षा एमआर ने बताया कि विक्रांत के पास प्राइमरी मेडिकल कॉम्प्लेक्स हैं. इसमें 40 कंपार्टमेंट्स हैं, जो पूरे जहाज पर फैले हुए हैं. 16 बेड का मिनी अस्पताल हैं. सीटी स्कैन, लेबोरेटरी, अल्ट्रासोनोग्राफी, एक्स-रे की सुविधा भी है. इसके अलावा दो डेंटल चेयर और ट्रीटमेंट फैसिलिटी भी है. हमारी टीम में 5 मेडिकल ऑफिसर और 16 पैरामेडिक्स शामिल हैं. (फोटोः ट्विटर/LCA Tejas Fans)
आईएसी विक्रांत पर एक ऑटोमैटिक गैली (Automated Galley) है. यानी अत्याधुनिक किचन जो दिन भर में 5000 खाना बना सकता है. यहां पर कई तरह के किचन संबंधी यंत्र पूरी तरह से ऑटोमैटिक हैं, जिनमें मटेरियल डाल दो तो वो खुद ही खाना तैयार कर देते हैं. यानी यहां पर सिर्फ निगरानी के लिए सैनिकों को तैनात करने की जरूरत पड़ेगी. (फोटोः ट्विटर/ANI)
लॉजिस्टिक ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर अंकित सारस्वत ने बताया कि इस युद्धपोत पर किसी भी समय 1500 से 1700 नौसैनिक तैनात रहेंगे. हमारे पास तीन गैली है, जो मिलकर दिनभर में 5000 मील्स बना सकते हैं. यानी इमरजेंसी या युद्ध की स्थिति में किसी भी सैनिक को किचन में लगने की जरुरत नहीं पडे़गी. हमारी टीम यहां पर 20 घंटे लगातार काम करती है. सबका शिफ्ट बंधा हुआ है. (फोटोः ट्विटर/ANI)
आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने बनाया है. 1971 के युद्ध में इसी नाम के युद्धपोत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उसके सम्मान में ही इस एयरक्राफ्ट करियर का नाम आईएसी विक्रांत रखा गया था. IAC Vikrant की लंबाई 860 फीट, बीम 203 फीट, गहराई 84 फीट और चौड़ाई 203 फीट है. इसका कुल क्षेत्रफल 2.5 एकड़ का है. यह 52 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से समुद्र में आगे बढ़ता है. (फोटोः ट्विटर/LCA Tejas Fans)
आईएसी विक्रांत एक बार में 15 हजार KM की यात्रा कर सकता है. इसमें एक बार में 196 नौसेना अधिकारी और 1149 सेलर्स और एयरक्रू रह सकते हैं. इसे बनाने में करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है. जहाज बनाने की शुरुआत फरवरी 2009 में हुई थी. इसमें 76 फीसदी स्वदेशी सामग्री लगी है. (फोटोः ट्विटर/LCA Tejas Fans)
आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) में 4 ओटोब्रेडा (Otobreda) 76 mm की ड्यूल पर्पज कैनन लगे हैं. इसके अलावा 4 AK 630 प्वाइंट डिफेंस सिस्टम गन लगी है. बराक मिसाइलों से लैस इस युद्धपोत के तैनात होते ही भारत के समुद्री तट अपने दुश्मनों से सुरक्षित हो जाएंगे. साथ ही भारतीय नौसेना की ताकत में कई गुना बढ़ोतरी हो जाएगी. भविष्य में इसमें दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile) को भी तैनात करने की योजना है. (फोटोः Indian Navy)
आईएसी विक्रांत 45 हजार टन का एयरक्राफ्ट करियर है. इसमें जनरल इलेक्ट्रिक के ताकतवर टरबाइन लगे हैं. जो इसे 1.10 लाख हॉर्सपावर की ताकत देते हैं. इस पर MiG-29K लड़ाकू विमान और 10 Kmaov Ka-31 हेलिकॉप्टर के दो स्क्वॉड्रन तैनात हो सकते हैं. भारत में अमेरिका से आया मल्टीरोल MH-60R हेलिकॉप्टर भी तैनात किया जा सकता है. MH-60R को रोमियो हेलिकॉप्टर भी बुलाते हैं. कुल मिलाकर इस पर 30 विमान तैनात हो सकते हैं. इस विमानवाहक पोत की स्ट्राइक फोर्स की रेंज 1500 किलोमीटर है. (फोटोः ट्विटर/LCA Tejas Fans)
आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) की फ्लाइट डेक 1.10 लाख वर्ग फीट की है, जिस पर से फाइटर जेट आराम से टेकऑफ या लैंडिंग कर सकते हैं. इस विमान पर ट्विन इंजन बेस्ड फाइटर तैनात किया जाएगा. जिसे HAL बनाएगा. तब तक के लिए मिग-29K फाइटर जेट इस पर तैनात रहेंगे. नेवी ने इस पोत पर लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को इंटीग्रेट करने का काम भी शुरु किया है.
अभी इस युद्धपोत पर तैनाती के लिए भारतीय नौसेना लड़ाकू विमान भी खोज रही है. इस युद्धपोत पर तैनाती के लिए दुनिया के चार सर्वश्रेष्ठ फाइटर जेट्स का ट्रायल लेने की तैयारी है. इसके लिए नौसेना की नजर में चार लड़ाकू विमान हैं- पहला राफेल (Rafale) का नेवी वर्जन, दूसरा अमेरिकी कंपनी बोइंग का F-18 सुपर हॉर्नेट (F-18 Super Hornet), तीसरा रूस और भारत का भरोसेमंद मिग-29के (Mig-29K) और चौथा स्वीडेन की कंपनी साब का ग्रिपेन (Gripen). (फोटोः ट्विटर/राहुल सिंह)
अभी नौसेना ने यह तय नहीं किया है कि इस पर इन चारों विमानों में से कौन सा फाइटर जेट इस युद्धपोत पर तैनात किया जाएगा. लेकिन असली लड़ाई राफेल के नेवी वर्जन और अमेरिकी सुपर हॉर्नेट के बीच मानी जा रही है. खबर मिली थी कि दोनों ने अपने-अपने नौसेनिक फाइटर जेट्स का प्रदर्शन भी किया है. अब देखना ये है कि इस युद्धपोत के लिए किस फाइटर जेट का चयन किया जाता है. (फोटोः ट्विटर/राहुल सिंह)