मेक इन इंडिया के तहत भारत में बन रहे हथियारों, विमानों, मिसाइलों की धाक अब पूरी दुनिया मान रही है. अब खबर आई है कि फिलिपींस, वियतनाम के बाद अब म्यांमार भी ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile) का एंटी-शिप वैरिएंट खरीद सकता है. यह जानकारी रूस की समाचार एजेंसी TASS के हवाले से डिफेंस डिकोड नाम के ट्विटर हैंडल ने शेयर की है. (फोटोः विकिपीडिया)
इससे पहले फिलिपींस ने भारत में बने एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) को खरीदने की बात कही थी. इससे पहले फिलिपींस ने कुछ महीनों पहले ही सबसे घातक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के लिए डील की थी. उसने तीन बैटरीज खरीदी थी. एशियाई देश ही नहीं बल्कि अब पूरी दुनिया में भारतीय हथियारों का महत्व बढ़ रहा है. म्यांमार या कोई भी देश भारत में बनी ब्रह्मोस मिसाइल क्यों खरीदना चाहेगा. इसकी वजह जानने के लिए आपको उसकी खासियतों को समझना होगा. (फोटोः Indian Navy)
According to Tass, Myanmar might purchase Russian-Indian BrahMos supersonic anti-ship cruise missiles, which are being manufactured by the two countries’ joint venture BrahMos Aerospace, by borrowing money from the Indian government. pic.twitter.com/NzTPmqXjhi
— Defence Decode® (@DefenceDecode) August 3, 2022
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Brahmos Supersonic Cruise Missile) है. भविष्य में ब्रह्मोस-2 मिसाइल लाने की योजना है. यह हाइपरसोनिक मिसाइल होगी. इसमें स्क्रैमजेट इंजन लगाया जाएगा. इसकी गति मैक-7 यानी 8,575 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. इसे जहाज, पनडुब्बी, विमान या जमीन पर लगाए गए लॉन्चपैड से दागा जा सकेगा. (फोटोः विकिपीडिया)
सुखोई-30 एमके-1 में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एयर वर्जन का सफल परीक्षण किया जा चुका है. मिसाइल ने तय मानकों को पूरा करते हुए दुश्मन के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया. इसमें रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) तकनीक का उपयोग किया गया है. ताकि इसकी गति और सटीकता और ज्यादा घातक हो जाए. (फोटोः पीटीआई)
समुद्र से दागने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल के चार वैरिएंट्स हैं. पहला- युद्धपोत से दागा जाने वाला एंटी-शिप वैरिएंट, दूसरा युद्धपोत से दागा जाने वाला लैंड-अटैक वैरिएंट. ये दोनों ही वैरिएंट भारतीय नौसेना में पहले से ऑपरेशनल हैं. तीसरा- पनडुब्बी से दागा जाने वाला एंटी-शिप वैरिएंट. सफल परीक्षण हो चुका है. चौथा- पनडुब्बी से दागा जाने वाला लैंड-अटैक वैरिएंट. (फोटोः पीटीआई)
भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने राजपूत क्लास डेस्ट्रॉयर INS Ranvir और INS Ranvijay में 8 ब्रह्मोस मिसाइलों वाला लॉन्चर लगा रखा है. इसके अलावा तलवार क्लास फ्रिगेट INS Teg, INS Tarkash और INS Trikand में 8 ब्रह्मोस मिसाइलों वाला लॉन्चर तैनात है. शिवालिक क्लास फ्रिगेट में भी ब्रह्मोस मिसाइल फिट है. कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर में भी यह तैनात है. INS Visakhapatnam में सफल परीक्षण हो चुका है. इसके बाद भारतीय नौसेना नीलगिरी क्लास फ्रिगेट में भी इस मिसाइल को तैनात करेगी. (फोटोः डीआरडीओ)
युद्धपोत से लॉन्च किए जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल 200 किलोग्राम वॉरहेड ले जा सकती है. यह मिसाइल मैक 3.5 तक की अधिकतम गति हासिल कर सकती है. यानी 4321 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार. इसमें दो स्टेज का प्रोप्लशन सिस्टम लगा है. पहला सॉलिड और दूसरा लिक्विड. दूसरा स्टेज रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) है. जो इसे सुपरसोनिक गति प्रदान करता है. साथ ही ईंधन की खपत कम करता है. (फोटोः विकिपीडिया)
ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही मार्ग बदलने में सक्षम है. चलते-फिरते टारगेट को भी ध्वस्त कर सकता है. यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम हैं, यानी दुश्मन के राडार को धोखा देना इसे बखूबी आता है. सिर्फ राडार ही नहीं यह किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है. इसको मार गिराना लगभग अंसभव है. ब्रह्मोस मिसाइल अमेरिका के टॉमहॉक मिसाइल की तुलना में दोगुनी अधिक तेजी से वार करती है. यह मिसाइल 1200 यूनिट की ऊर्जा पैदा करती है, जो किसी भी बड़े टारगेट को मिट्टी में मिला सकता है. (फोटोः गेटी)