Centurion Tank: यह टैंक ब्रिटिश काल से ही भारतीय सेना में है. इसने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानियों सैनिकों ही हालत खराब कर दी थी. 50 टन वजनी इस तोप से जब गोला निकलता है तो 52 से 100 किलोमीटर की दूरी तक जाता है. यह 34.6 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकता है. 65 के युद्ध में इन टैंक्स ने सियालकोट और चाविंडा के युद्ध में दुश्मन की हालत पस्त कर दी थी. 71 में बसंतर की लड़ाई में पाकिस्तानियों के छक्के छुड़ा दिए थे. यह 105 मिलिमीटर बैरल वाली तोप है. जिसे चार लोग मिलकर चलाते हैं. (फोटोः गेटी)
Arjun Main Battle Tank: भारतीय सेना के पास साल 2004 से अब तक यह सर्विस दे रहा है. यह देश की सेना का मुख्य युद्धक टैंक है. देश में इन 120 मिलीमीटर बैरल वाले टैंकों की संख्या 141 है. इसके दो वैरिएंट्स हैं- पहला एमके-1 और एमके-1ए. एमके-1 आकार में एमके-1ए से थोड़ा छोटा है. दोनों ही टैंकों में चार क्रू बैठते हैं. दोनों टैंक एक मिनट में 6 से 8 राउंड फायर कर सकते हैं. एक टैंक में 42 गोले स्टोर किए जा सकते हैं. अर्जुन टैंक की रेंज 450 किलोमीटर है. इस टैंक ने कई अंतरराष्ट्रीय वॉरगेम्स में भाग लिया है. ऐसी संभावना है कि बहरीन और कोलंबिया इसे खरीदें. (फोटोः रॉयटर्स)
Dhanush: 155 mm/45 कैलिबर टोड हॉवित्जर धनुष को साल 2019 में भारतीय सेना में शामिल किया गया है. यह बोफोर्स तोप का स्वदेशी वर्जन है. फिलहाल सेना के पास 12 धनुष है. 114 का ऑर्डर गया हुआ है. जिनकी संख्या अंत तक बढ़ाकर 414 की जा सकती है. अब तक 84 बनाए जा चुके हैं. इसे चलाने के लिए 6 से 8 क्रू की जरूरत होती है. इसके गोले की रेंज 38 किलोमीटर है. बर्स्ट मोड में यह 15 सेकेंड में तीन राउंड दागता है. इंटेंस मोड में 3 मिनट में 15 राउंड और संस्टेंड मोड में 60 मिनट में 60 राउंड. यानी जरूरत के हिसाब से दुश्मन के छक्के छुड़ा सकता है. (फोटोः गेटी)
PT-76 Tank: यह ऐसा टैंक है जो जमीन और पानी में एक समान हमला करने में सक्षम है. यह हल्का टैंक है. इसका वजन 14.6 टन है. इसे तीन लोग मिलकर चलाते हैं. इसकी नली 76.2 मिलिमीटर की होती है. साथ में दो मशीन गन होते हैं. इसकी ऑपरेशनल रेंज 370 से 500 किलोमीटर है. अधिकतम 44 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से जमीन पर चल सकता है. पानी में यह 10.2 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से तैर सकता है. यह भी 1965 और 1971 के युद्ध में मजबूत किरदार निभाया था. इसे सोवियत संघ ने बनाया था. (फोटोः गेटी)
APC Topas: यह भी जमीन और पानी दोनों में चल सकता है. इसे चेकोस्लोवाकिया ने बनाया था. इसका वजन 13 टन है. इसमें 2 ड्राइवर और 16 सैनिक बैठ सकते हैं. पानी में 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलता है, जबकि पानी में 10.8 किलोमीटर की गति से तैरता है. यह एक बख्तरबंद वाहन है, जिसकी प्लेट 17 मिलिमीटर मोटी है. इसका मुख्य काम भारतीय सेना में फॉरवर्ड रिपेयर टीम व्हीकल के तौर पर है.
BMP-1 और BMP-2: ये भी सोवियत काल की जमीन और पानी में चलने वाले बख्तरबंद वाहन हैं. भारत के पास एक समय यह 800 की संख्या में थे. अभी की सही संख्या का अंदाजा नहीं है. ये आमतौर पर 13.3 टन के होते हैं. इसे तीन लोग मिलकर चलाते हैं. इसमें 73 मिलिमीटर की तोप होती है. इसके अलावा एटीजीएम और कुछ ऑटोमैटिक तोपें लगी होती हैं. साथ ही 7.62 मिमी के मशीनगन जिसकी क्षमता 2000 राउंड होती है. इनकी रेंज 500 से 600 किलोमीटर होती है. पानी 65 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा और पानी 7-8 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलते हैं.
75/24 Howitzer: यह डीआरडीओ द्वारा बनाया गया पहली आर्टिलरी है. चीन के साथ युद्ध हारने के बाद पहाड़ों पर तैनात करने लायक इस तोप को बनाया गया. यह हल्की लेकिन खतरनाक मारक क्षमता वाली तोप है. इसका वजन सिर्फ 983 किलोग्राम है. यह 11 किलोमीटर तक फायर कर सकती है. आखिरी बार इसका इस्तेमाल करगिल युद्ध के समय हुआ था. (फोटोः गेटी)