Tiger Cat Missile: टाइगर कैट मिसाइल को ब्रिटेन में बनाया गया था. यह सतह से हवा में मार करने वाली शॉर्ट रेंज की मिसाइल है. आर्मी वर्जन को टाइगर कैट और नौसैनिक वर्जन को सीकैट कहते हैं. 68 किलो वजनी यह मिसाइल 1.48 मीटर लंबी होती है. यह अपने साथ 18 किलोग्राम का हथियार ले जा सकती है. इसकी रेंज आधा किलोमीटर से 5 किलोमीटर तक है. इसकी गति 1000 किलोमीटर प्रतिघंटा है. फिलहाल दुनिया भर के करीब डेढ़ दर्जन देश इसके सात से ज्यादा वैरिएंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. (फोटोः गेटी)
Akash Missile: आकाश मिसाइल जमीन से हवा में मार करने वाली भारत की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक है. आकाश प्राइम में स्वदेशी एक्टिव RF सीकर लगा है, जो दुश्मन के टारगेट को पहचानने की सटीकता को बढ़ाता है. आकाश-एनजी यानी आकाश न्यू जेनरेशन मिसाइल का सफल परीक्षण भी हो चुका है. आकाश-एनजी जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसे भारतीय वायुसेना के लिए बनाया गया है. इसकी रेंज 40 से 80 किलोमीटर है. साथ ही इसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे मल्टी फंक्शन राडार (MFR) लगा है जो एकसाथ कई दुश्मन मिसाइलों या विमानों को स्कैन कर सकता है. फिलहाल भारत में आकाश के तीन वैरिएंट मौजूद हैं- पहला आकाश एमके- इसकी रेंज 30KM है. दूसरा आकाश एमके.2 - इसकी रेंज 40KM है. इनकी गति 2.5 मैक यानी 3087 किलोमीटर प्रतिघंटा है. (फोटोः DRDO)
Helina (NAG) ATGM: इस मिसाइल को इसमें लगी इंफ्रारेड इमेजिंग सीकर (IIR) तकनीक गाइड करती है. जो मिसाइल के लॉन्च होने के साथ ही सक्रिय हो जाता है. यह दुनिया के बेहतरीन और अत्याधुनिक एंटी-टैंक हथियारों में से एक है. दागो और भूल जाओ के मंत्र पर चलने वाली इस मिसाइल से दुश्मन के टैंक बच नहीं सकते. वैसे तो इसका नाम हेलिना है, लेकिन इसे ध्रुवास्त्र (Dhruvastra) भी कहते हैं. इससे पहले इसका नाम नाग मिसाइल (Nag Missile) था. भारत में बनी हेलिना 230 मीटर प्रति सेकेंड की स्पीड से चलती है. यानी 828 किलोमीटर प्रति घंटा. इस गति से आती किसी भी मिसाइल से बचने के लिए दुश्मन के टैंक को मौका नहीं मिलेगा. यह स्पीड इतनी है कि पलक झपकते ही दुश्मन के भारी से भारी टैंक को बर्बाद कर सकती है. रेंज 500 मीटर से लेकर 20 किलोमीटर तक है. यह हर मौसम में हमला करने में सक्षम है. साथ ही इसे दिन या रात में भी दाग सकते हैं. सेना इस ध्रुवास्त्र मिसाइल को ध्रुव हेलिकॉप्टर, एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर समेत अन्य लड़ाकू हेलिकॉप्टरों में लगा सकती है. (फोटोः रक्षा मंत्रालय)
BrahMos Missile: ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही रास्ता बदलने में सक्षम है. चलते-फिरते टारगेट को भी बर्बाद कर देता है. यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम हैं, यानी दुश्मन के राडार इसे देख ही नहीं पाएगा. इसको मार गिराना लगभग अंसभव है. ब्रह्मोस मिसाइल अमेरिका के टोमाहॉक मिसाइल से दोगुना तेज उड़ती है. ब्रह्मोस मिसाइल के चार नौसैनिक वैरिएंट्स हैं. युद्धपोत से लॉन्च की जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल 200KG वॉरहेड ले जा सकती है. यह मिसाइल 4321 KM प्रतिघंटा की रफ्तार. इसमें दो स्टेज का प्रोप्लशन सिस्टम लगा है. पहला सॉलिड और दूसरा लिक्विड. दूसरा स्टेज रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) है. जो इसे सुपरसोनिक गति प्रदान करता है. साथ ही ईंधन की खपत कम करता है.
Apache Attack Helicopter: असल में हर जगह फाइटर जेट्स नहीं जा सकते. क्योंकि उनकी गति ज्यादा होती है. इसलिए कुछ जगहों पर हमला करने के लिए अटैक हेलिकॉप्टर्स की जरूरत पड़ती है. AH-64Es अपाचे हेलिकॉप्टर को पहले एएच-64डी ब्लॉक 3 बुलाया जाता था. AH-64Es हेलिकॉप्टर को उड़ाकर उसके साथ ड्रोन्स भी उड़ाए जा सकते हैं. इसे उड़ाने के लिए 2 पायलटों की जरूरत होती है. अधिकतम 293 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है. कॉम्बैट रेंज 476 किलोमीटर है. सामान्य तौर पर 1900 किलोमीटर उड़ सकता है. अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें एक 30 मिमी की एम230 चेन गन लगी है. जो एक मिनट में 1200 राउंड फायर करती है. इसके अलावा चार पाइलॉन हार्डप्वाइंट्स हैं. विंगटिप पर AIM-92 स्टिंगर ट्विन मिसाइल पैक लगाया जा सकता है. अपाचे हेलिकॉप्टर में 70 मिमी के Hydra-70, CRV, APKWS या हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा इसमें AGM-114 हेलफायर मिसाइल के वैरिएंट्स लगाए जा सकते हैं. साथ ही हवा से हवा में मार करने वाली स्टिंगर, एजीएम-65 मैवरिक और स्पाइक मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. (फोटोः IAF)
Advanced Light Helicopter: यह हेलिकॉप्टर कितने काम का है यह आपको इस बात से पता चल जाएगा कि इसकी मांग कितनी है. भारतीय नौसेना ने 11 और भारतीय सेना ने 73 ALH MK-III का ऑर्डर दे रखा है. अब तक 335 हेलिकॉप्टर बना चुका है. लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड (LCH Prachand), रुद्र (HAL Rudra) और लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH) इसी हेलिकॉप्टर के प्लेटफॉर्म पर बने हैं. IAF के पास 107, थल सेना के पास 191 और नौसेना के पास 14 हेलिकॉप्टर्स हैं. 52.1 फीट लंबे इस हेलिकॉप्टर को दो पायलट उड़ाते हैं. ऊंचाई 16.4 फीट है और इसमें एक बार में 12 जवान या लोग बैठ सकते हैं. ALH MK-III से बने रुद्र हेलिकॉप्टर में 20 मिमी की एक एम621 कैनन, 2 मिस्ट्रल रॉकेट्स, 4 FZ275 LGR मिसाइल, 4 ध्रुवास्त्र मिसाइल तैनात किए जा सकते हैं. ALH MK-III की अधिकतम गति 291 KM प्रतिघंटा है. यह एक बार में 630 किलोमीटर उड़ा सकता है. अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक जाता है.
LCH Prachand Attack Helicopter: भारत में बना LCH दुनिया का इकलौता अपनी कैटेगरी का सर्वश्रेष्ठ हेलिकॉप्टर है. ये यह अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकता है. वहां पर हमला कर सकता है. 550 किलोमीटर की कॉम्बैट रेंज में यह अधिकतम 268 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता हिमालय पर मौजूद चीन सीमाओं की निगरानी में होगी. अधिकतम 16,400 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें 20 mm की तोप है. हेलिकॉप्टर में चार हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी चार एक जैसे या अलग-अलग प्रकार के हथियार लगाए जा सकते हैं. जैसे - चार 12 FZ275 लेजर गाइडेड रॉकेट्स या हवा से हवा में मार करने वाली चार Mistral मिसाइलें. चार ध्रुवास्त्र एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें. या चार क्लस्टर बम, अनगाइडेड बम, ग्रेनेड लॉन्चर लगाया जा सकता है. या फिर इन सबका मिश्रण सेट कर सकते हैं.
Chinook Helicopter: भारत के पास 15 Ch-47F(I) चिनूक ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर्स हैं. जिनका इस्तेमाल आपदा, राहत एवं बचाव के साथ-साथ युद्धक्षेत्रों में हथियार, टैंक, रसद और सैनिक पहुंचाने के लिए होता है. चिनूक हेलिकॉप्टरों ने लद्दाख में चीन के साथ चल रहे विवाद के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ये हेलिकॉप्टर चंडीगढ़ एयरबेस पर तैनात हैं. चिनूक हेलिकॉप्टर M777 Ultra Light हॉवित्जर तोप को भी उठा कर कहीं भी आ-जा सकता है. इस हेलिकॉप्टर में 33 से 55 सैनिक, 24 स्ट्रेचर या करीब 11 हजार किलोग्राम वजन उठाया जा सकता है. रेंज 740 किमी है. अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है. इसमें 3 पिंटल-माउंटेड मीडियम मशीन गन या एम134 मिनिगन रोटरी मशीन गन तैनात कर सकते हैं. (फोटोः IAF)
LCA Tejas Fighter Jet: भारत में बने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस मार्क-2 की ईंधन क्षमता 3400 किलोग्राम होगी. गति 3457 किलोमीटर प्रतिघंटा. इसकी रेंज 2500 किलोमीटर होगी. यह 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है. इसमें 23 मिलीमीटर की GSH-23 गन होगी. साथ ही इसमें हवा से हवा में मार करने वाली सात मिसाइलें, हवा से जमीन पर मार करने वाली चार मिसाइलें, एक एंटी रेडिएशन मिसाइल, पांच बम लगाए जा सकते हैं. इसमें ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल भी लगाई जा सकती है. इसके अलावा निर्भय, स्टॉर्म शैडो, अस्त्र, मीटियोर, असराम और क्रिस्टल मेज जैसी मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. इस विमान की ताकत प्रीसिशन गाइडेड बम, लेजर गाइडेड बम, क्लस्टर बम, अनगाइडेड बम और स्वार्म बम लगाए जा सकते हैं.
Rafale Fighter Jet: भारतीय वायुसेना में 36 राफेल फाइटर जेट्स हैं. इसे एक या दो पायलट उड़ाते हैं. यह 50.1 फीट लंबी, विंगस्पैन 35.9 फीट और ऊंचाई 17.6 फीट है. इसकी अधिकतम गति 1912 KM/घंटा है. लेकिन कॉम्बैट रेंज 1850 किमी है. ऑपरेशनल रेंज 3700 KM है. यह अधिकतम 51,952 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. यह एक सेकेंड में 305 मीटर की सीधी उड़ान भरने में सक्षम है. इसमें 30 मिमी की ऑटोकैनन लगी है, जो 125 राउंड प्रति मिनट दागती है. इसके अलावा इसमें 14 हार्डप्वाइंट्स हैं. इसमें एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड, एयर-टू-सरफेस, न्यूक्लियर डेटरेंस मिसाइलें लगा सकते हैं. इसके अलावा कई अन्य तरह के बमों को भी तैनात किया जा सकता है. (फोटोः PTI)