S-400 Missile System सिस्टम खरीदने के बाद लगातार इस बात का डर था कि कहीं अमेरिका इस पर प्रतिबंध न लगा दे. लेकिन भारत को पूरा भरोसा था कि वह इस प्रतिबंध को पार कर जाएगा. यूएस हाउस ऑफ रेप्रेंजेटेटिव्स ने लेजिसलेटिव अमेंडमेंट करके भारत को इस प्रतिबंध से मुक्त कर दिया है. यह प्रतिबंध काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) के तहत लगाया जाना था. (फोटोः रॉयटर्स)
अमेरिका यह नियम साल 2017 में लेकर आया था. जिसमें उसने कहा था कि अगर रूस, उत्तरी कोरिया या ईरान के साथ कोई अन्य देश रक्षा या जासूसी संबंधी डील करता है तो उसे अमेरिकी प्रतिबंध का सामना करना होगा. इंडिया कॉकस के वाइस चेयर रो खन्ना ने कहा कि अमेरिका को भारत का साथ देना ही चाहिए क्योंकि चीन लगातार सिर उठा रहा है. वह अक्सर सीमाई इलाकों को लेकर भारत को परेशान करता रहता है. भारत को इस प्रतिबंध से मुक्त रखने का फैसला स्वागत योग्य है. कुछ दिन पहले ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन (Pentagon) ने कहा था कि भारत एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को पाकिस्तान और चीन के खिलाफ उपयोग करेगा. (फोटोः विकिपीडिया)
अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल स्कॉट बेरियर ने कहा था कि भारत को पिछले साल दिसंबर से रूस ने S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम देना शुरु किया है. स्कॉट सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने एक कॉन्ग्रेशनल हियरिंग में बोल रहे थे. उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2021 में भारत की मिलिट्री अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम लाना चाहता था, जिससे उनकी समुद्री और जमीनी सीमा सुरक्षित हो जाए. (फोटोः रॉयटर्स)
स्कॉट बेरियर ने कहा कि दिसंबर 2021 में भारत को रूस की तरफ से एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) पहली खेप मिली है. जिसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर जून 2022 से तैनात किए जाने की खबर थी. इसके अलावा भारत अपने हाइपरसोनिक, बैलिस्टिक, क्रूज अन्य एयर डिफेंस क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है. भारत के सैटेलाइट्स की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. वह अपने अंतरिक्ष का उपयोग भी मजबूती से कर रहा है. (फोटोः गेटी)
स्कॉट बेरियर ने कहा था कि नई दिल्ली बेहद तेजी और सक्रियता से भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण में लगी है. वह अपनी वायुसेना, आर्मी, नौसेना और स्ट्रैटेजिक फोर्सेस को मजबूत कर रही है. साथ ही घरेलू रक्षा उत्पादों को बढ़ावा दे रही है. इसके अलावा भारत लगातार अपने इंटीग्रेटेड थियेटर कमांड्स के लिए काम कर रहा है. तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य बनाने का प्रयास कर रहा है. और इसका असर देखने को भी मिल रहा है. (फोटोः रॉयटर्स)
भारत और चीन का सीमा विवाद दो साल से ज्यादा खतरनाक हो गया है. दोनों तरफ से कई बार उच्च स्तरीय बातचीत हुई है. दोनों तरफ से 50-50 हजार सैनिक तैनात हैं. इसके अलावा भारी मात्रा में आर्टिलरी, टैंक्स और मल्टिपल रॉकेट लॉन्चर्स तैनात किए गए हैं. पाकिस्तान के साथ भी बीच-बीच में भारतीय सेनाओं की झड़प होती रहती है. लेकिन उधर से आतंकी घुसपैठ की समस्या ज्यादा है. आइए अब जानते हैं कि जिस एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) को तैनात करने की बात हो रही है. उसकी खास बात क्या है? (फोटोः रॉयटर्स)
एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) हथियार नहीं महाबली है. इसके सामने बड़े से बड़ा दुश्मन कांपने लगता है. इसके सामने किसी की भी साजिश नहीं चलती. यह आसमान से घात लगाकर आते हमलावर को पलभर में राख में बदल देता है. इसके सामने दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला खतरनाक फाइटर जेट F-35 भी दुम दबाकर भाग जाता है. (फोटोःगेटी)
इसके तैनात होने के बाद देश के दुश्मन आसमान से हमला करने से पहले सोचेंगे. वो घबराएंगे क्योंकि इस महाबली के सामने दुनिया का कोई भी बाहुबली हथियार काम नहीं करता. एस-400 मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) को दुनिया की सबसे सक्षम मिसाइल प्रणाली माना जाता है. पाकिस्तान और चीन भारत के लिए हमेशा से चुनौती रहे हैं. भारत का इन देशों से युद्ध भी हो चुका है. शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी मिसाइल प्रणाली की देश को जरूरत थी. (फोटोःगेटी)
भारत को एस-400 सिस्टम मिलने से भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा. बता दें कि भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ ऐसे पांच सिस्टम खरीदने का करार किया था जिसकी लागत 5 अरब डॉलर यानी 33,000 करोड़ रुपये है. चीन हो या पाकिस्तान S-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम के बल पर भारत न्यूक्लियर मिसाइलों को अपनी जमीन तक पहुंचने से पहले ही हवा में ही ध्वस्त कर देगा. (फोटोःगेटी)
S-400 से भारत चीन-पाकिस्तान की सीमा के अंदर भी उस पर नजर रख सकेगा. जंग के दौरान भारत S-400 सिस्टम से दुश्मन के लड़ाकू विमानों को उड़ने से पहले निशाना बना लेगा. चाहे चीन के जे-20 फाइटर प्लेन हो या फिर पाकिस्तान के अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमान. यह मिसाइल सिस्टम इन सभी विमानों को नष्ट करने की ताकत रखता है. रूस ने साल 2020-2024 तक भारत को एक-एक कर ये मिसाइल सिस्टम देने की बात कही थी. (फोटोःगेटी)
S-400 एक बार में एक साथ 72 मिसाइल छोड़ सकती है. इसके सबसे खास बात ये है कि इस एयर डिफेंस सिस्टम को कहीं मूव करना बहुत आसान है क्योंकि इसे 8X8 के ट्रक पर माउंट किया जा सकता है. S-400 को नाटो द्वारा SA-21 Growler लॉन्ग रेंज डिफेंस मिसाइल सिस्टम भी कहा जाता है. माइनस 50 डिग्री से लेकर माइनस 70 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम इस मिसाइल को नष्ट कर पाना दुश्मन के लिए बहुत मुश्किल है. क्योंकि इसकी कोई फिक्स पोजिशन नहीं होती. इसलिए इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर सकते. (फोटोःगेटी)
एस-400 मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) में चार तरह की मिसाइलें होती हैं जिनकी रेंज 40, 100, 200, और 400 किलोमीटर तक होती है. यह सिस्टम 100 से लेकर 40 हजार फीट तक उड़ने वाले हर टारगेट को पहचान कर नष्ट कर सकता है. एस-400 मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) का रडार बहुत अत्याधुनिक और ताकतवर है. (फोटोःगेटी)
इसका रडार 600 किलोमीटर तक की रेंज में करीब 160 टारगेट ट्रैक कर सकता है. 400 किलोमीटर तक 72 टारगेट को ट्रैक कर सकता है. यह सिस्टम मिसाइल, एयरक्राफ्ट या फिर ड्रोन से हुए किसी भी तरह के हवाई हमले से निपटने में सक्षम है. शीतयुद्ध के दौरान रूस और अमेरिका में हथियार बनाने की होड़ मची हुई थी. जब रूस अमेरिका जैसी मिसाइल नहीं बना सका तो उसने ऐसे सिस्टम पर काम करना शुरू किया जो इन मिसाइलों को टारगेट पर पहुंचने पर पहले ही खत्म कर दे. (फोटोःगेटी)
1967 में रूस ने एस-200 प्रणाली विकसित की. ये एस सीरीज की पहली मिसाइल थी. साल 1978 में एस-300 को विकसित किया गया. एस-400 साल 1990 में ही विकसित कर ली गई थी. साल 1999 में इसकी टेस्टिंग शुरू हुई. इसके बाद 28 अप्रैल 2007 को रूस ने पहली एस-400 मिसाइल सिस्टम को तैनात किया गया, जिसके बाद मार्च 2014 में रूस ने यह एडवांस सिस्टम चीन को दिया. 12 जुलाई 2019 को तुर्की को इस सिस्टम की पहली डिलीवरी कर दी. (फोटोःगेटी)