श्रीनगर में इस समय जी-20 टूरिज्म समिट चल रहा है. 20 देशों के मेहमान आने वाले हैं. उनकी सिक्योरिटी का जिम्मा देश के बेहतरीन कमांडो टीम को दी गई है. नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और मार्कोस कमांडो (Marcos) के गाइडेंस में तीन लेयर की सुरक्षा तैयार की गई है. (फोटोः एपी)
मार्कोस कमांडो फोर्सः इन्हें भारत का नेवी सील्स (Navy Seals) कहा जाता है. इन्हें भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया जाता है लेकिन ये जमीन और आसमान में कहीं भी दुश्मन से लोहा लेने के लिए तैयार और ट्रेन्ड होते हैं. मार्कोस की ट्रेनिंग अमेरिकी नेवी सील्स की तरह ही होती है. मार्कोस फोर्स में फिलहाल 1200 कमांडो हैं. यह फोर्स 1987 में बनाई गई थी. इन्हें दुनिया के सभी आधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है.
मार्कोस कमांडो टीम के पास बेहतरीन स्नाइपर्स होते हैं, जो दूर से ही दुश्मन की माथे के बीचो-बीच गोली मार देते हैं. ये कई तरह के असॉल्ट राइफल्स चलाने में माहिर होते हैं. इन्हें मगरमच्छ और दाढ़ीवाला फौज भी कहा जाता है. मार्कोस कमांडो ने देश में कई बड़े मिशन किए हैं. जैसे ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन लीच, ऑपरेशन पवन, करगिल युद्ध, ऑपरेशन ब्लैक टॉरनैडो, ऑपरेशन साइक्लोन, कश्मीर में लगातार आतंकरोधी मिशन में तैनात. (फोटोः एपी)
इनकी ट्रेनिंग के लिए उन्हीं जवानों को चुना जाता है, जो अपनी शुरुआती 20 साल की उम्र में होते हैं. इनकी ट्रेनिंग, सिर्फ समुद्र में नहीं होती. इसके अलावा राजस्थान, तवांग, सोनमर्ग और मिजोरम में होती है. अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग कराई जाती है. इन्हें हर तरह के माहौल में छिपना आता है. ये दिखते ही नहीं. (फोटोः एपी)
जो जवान मार्कोस बनना चाहता है, पहले उसे तीन दिन की फिजिकल और एप्टीट्यूट टेस्ट देना होता है. 80 फीसदी जवान तो यहीं से बाहर निकल जाते हैं. इसके बाद शुरू होता नरक का हफ्ता (Hell's Week). जिसमें भयानक और खतरनाक ट्रेनिंग होती है. शुरुआत में कई दिनों तक जवानों को सोने नहीं दिया जाता. या कम सोने का समय मिलता है. अब बाकी के कमांडो फोर्सेस के बारे में भी जानते हैं. (फोटोः गेटी)
एनएसजी कमांडो फोर्सः जब भी देश में बड़े आतंकी हमले हुए हैं चाहे वह 26/11 हो या फिर अक्षरधाम मंदिर का हमला हो. एनएसजी ने ही आतंकियों को ढेर किया है. एनएसजी यानी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard) है. इस फोर्स को 1984 में बनाया गया था. फिलहाल इसमें 10 हजार सक्रिय कमांडो हैं. इसमें देश के किसी भी सैन्य, अर्द्धसैनिक बल या पुलिस से जवान शामिल हो सकते हैं. इनकी ट्रेनिंग 14 महीने की होती है. यह गृह मंत्रालय के तहत काम करते है. यह वीआईपी सिक्योरिटी, हाईजैकिंग रोकने, बम का पता लगाने जैसे अन्य कामों में भी तैनात किए जाते हैं.
पैरा एसएफः पैरा एसएफ के जवानों ने डोगरा रेजिमेंट की घातक टुकड़ी के साथ मिलकर पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की थी. इन्हें पैराशूट कमांडो भी कहते हैं. इस कमांडों फोर्स को 1965 में भारत-Pak युद्ध के समय बनाया गया था. ट्रेनिंग 9 महीने की होती है. जिसमें 65 किलो वजन के साथ कई किलोमीटर की दौड़ भी शामिल होती है. जो कैडेट पास होता है उसे मरून टोपी (Maroon Barrett) मिलती है. ये 30 से 35 हजार की ऊंचाई से छलांग लगाने की भी प्रैक्टिस करते हैं. देश में पैरा एसएफ की कुल 9 बटालियन है.
गरुड़ कमांडो फोर्सः भारतीय वायु सेना की घातक कमांडो टुकड़ी. इस फोर्स को फरवरी 2004 में बनाया गया था. इनका मुख्य काम एयर असॉल्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, क्लोज प्रोटेक्शन, सर्च एंड रेसक्यू, आतंकरोधी अभियान, डायरेक्ट एक्शन, एयरफील्ड्स की सुरक्षा आदि. इनकी ट्रेनिंग 72 हफ़्तों की होती है जो सभी कमांडो से सबसे ज्यादा लंबी होती है. गरुड़ कमांडो रात में हवा और पानी में मार करने के लिए एक्सपर्ट होते हैं. फिलहाल इस फोर्स में 1780 गरुड़ कमांडो हैं.
घातक कमांडो फोर्सः ये कमांडो फोर्स अपने नाम की तरह ही बहुत घातक है. इसे 1965 के भारत-पाक युद्ध में बनाया था. घातक प्लाटून आमने-सामने की लड़ाई के लिए दक्ष होती है. इनकी ट्रेनिंग भी पैरा कमांडो की तरह होती है. जब कोई खास मिशन होता है तो कुछ बटालियन में से चुस्त ताकतवर और घातक सैनिकों को तैनात किया जाता है. पाकिस्तान में हुई सर्जिकल स्ट्राइक में पैरा-एसएफ के साथ इसी टुकड़ी ने हमला किया था. इसमें फिलहाल 7000 कमांडो हैं.
कोबरा कमांडोः ये कमांडो टीम 2008 में बनाई गई थी. कोबरा कमांडो फोर्स का पूरा नाम कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन (CoBRA) है. इनकी तीन महीने की ट्रेनिंग होती है. फिलहाल इस फोर्स में 10 हजार कमांडो हैं. आमतौर पर इन्हें गोरिल्ला ट्रेनिंग और नक्सल वॉरफेयर के लिए ट्रेन्ड किया जाता है. इन्हें दुनिया की बेस्ट पैरामिलिट्री फोर्स में गिना जाता है. राष्ट्रपति भवन और संसद समेत कई महत्वपूर्ण इमारतों की सुरक्षा का काम इनके पास है.
स्वाट कमांडोः पूरा नाम स्पेशल वेपंस एंड टैक्टिक्स (Special Weapons and Tactics) हैं. इनका गठन 1965 की भारत पाकिस्तान जंग के बीच हुआ था. कहा जाता है उनकी और एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग में कोई अंतर नहीं होता. इस कमांडो ग्रुप में सभी जवान 28 की उम्र से कम के होते है. इन्हें हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार किया जाता है. ये आमतौर पर अर्बन वॉरफेयर के लिए ट्रेन्ड होते हैं. यह घात लगाकर हमला करने में माहिर होते है.
एसपीजी कमांडो फोर्सः एसपीजी कमांडो बनाने की वजह थी की साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या. 1985 में एसपीजी फोर्स बनाई गई. इस फोर्स में कुल 3000 सक्रिय जवान हैं. जिनका मुख्य काम होता है प्रधानमंत्री की सुरक्षा. इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इकलौते हैं, जिनका प्रोटेक्शन एसपीजी के हाथ में है. ये अक्सर सूट-बूट में दिखते हैं. सूट के अंदर कई तरह के हथियार छिपे होते हैं. हाथ में क्लोज कॉम्बैट के लिए असॉल्ट राइफल होती है. अगर कोई भी दुश्मन प्रधानमंत्री के पास आया तो सेकेंड्स में उसकी मौत तय है. इनके पास करीब एक दर्जन हथियार होते हैं.
फोर्स वन कमांडोः मुंबई में जब 26/11 आतंकी हमले के बाद फोर्स-1 (Force One) कमांडो बल बनाया गया. इसे महाराष्ट्र की सरकार ने बनाया था ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो. यह किस भी समय आपदा या हमले का सामना करने के लिए तैयार रहते है. दुनिया की सबसे तेज कमांडो फोर्स में से एक है. असल में इसमें महाराष्ट्र पुलिस के ही जवानों को लेकर घातक ट्रेनिंग दी जाती है. फिलहाल इस फोर्स में 300 कमांडो हैं. इनकी ट्रेनिंग NSG कराती है.
सीआईएसएफ कमांडोः इसका गठन 10 मार्च 1969 में हुआ था. सीआईएसएफ का पूरा नाम सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (Central Industrial Security Force) है. ज्यादातर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा करते है, जैसे-दिल्ली, मुंबई के एयरपोर्ट और यह वीआईपी जगहों की भी देखभाल करते हैं. जैसे- भाभा एटॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, इसरो के केंद्र, एटॉमिक पावर प्लांट्स आदि. 26/11 मुम्बई हमले के बाद प्राइवेट सेक्टर की सिक्योरिटी में भी इनकी तैनाती होने लगी.