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मिलावटी दूध बेचने के मामले में 32 साल बाद आया कोर्ट का फैसला, आरोपी को 6 माह की सजा

अभियोजन अधिकारी रामावतार सिंह ने शुक्रवार को न्यूज एजेंसी को बताया कि हरबीर सिंह मिलावटी दूध बेचते पाया गया. अभियोजन अधिकारी ने कहा कि उसके द्वारा बेचे गए दूध का एक नमूना एकत्र किया गया और उसे प्रयोगशाला भेजा गया जहां वह मिलावटी पाया गया. रामावतार सिंह ने कहा कि फूड इंस्पेक्टर सुरेश चंद ने 21 अप्रैल 1990 को दूध विक्रेता के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी. मामले में फैसला अब जाकर आया है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर एक अदालत ने मिलावटी दूध बेचने के मामले में शिकायत दर्ज होने के 32 साल बाद एक व्यक्ति को छह महीने की जेल की सजा सुनाई है. एडीश्नल चीफ जूडीशियल मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार ने गुरुवार को आरोपी दूध विक्रेता हरबीर सिंह को मामले में दोषी ठहराते हुए उस पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

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अभियोजन अधिकारी रामावतार सिंह ने शुक्रवार को न्यूज एजेंसी को बताया कि हरबीर सिंह मिलावटी दूध बेचते पाया गया. अभियोजन अधिकारी ने कहा कि उसके द्वारा बेचे गए दूध का एक नमूना एकत्र किया गया और उसे प्रयोगशाला भेजा गया जहां वह मिलावटी पाया गया. रामावतार सिंह ने कहा कि फूड इंस्पेक्टर सुरेश चंद ने 21 अप्रैल 1990 को दूध विक्रेता के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी. मामले में फैसला अब जाकर आया है.

गौरतलब है कि पिछले माह यूपी के ही महाराजगंज जिसे से ऐसा ही मामला सामने आया था. यहां जिले के सिविल कोर्ट में 33 साल तक चले मुकदमे में दोषियों के खिलाफ आए फैसले में 1 दिन की सजा सुनाई गई . इसके साथ ही अदालत ने 1500 रुपए का जुर्माना भी लगाया.

जिले में चलाए जा रहे पुलिस विभाग के 'ऑपरेशन शिकंजा' के तहत पुलिस ने प्रभावी पैरवी करके आरोपित के खिलाफ सजा मुकर्रर कराई. यह मामला जिले के पुरन्दरपुर इलाके का है. पुलिस कार्यालय की मीडिया सेल के मुताबिक, पुरन्दरपुर पुलिस ने साल 1989 में तहरीर के आधार पर तीन आरोपियों बुद्धिराम पुत्र फागू, शीश मुहम्मद पुत्र मुस्कीम और हमीमुद्दीन पुत्र यासीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 382 और 411 के तहत केस दर्ज किया था.

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यहां चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई. ट्रायल के दौरान सुनवाई शुरू हुई. अभियोजन की तरफ से अरोपियों के खिलाफ सजा की मांग की गई. कोर्ट ने पत्रावली में दर्ज साक्ष्य और सबूत के आधार पर आरोपितों के खिलाफ 1 दिन की न्यायिक अभिरक्षा और 1500 रुपये जुर्माने से दंडित किया. साथ ही जुर्माना अदा न करने पर 10 दिन के अतिरिक्त कारावास से दंडित करने का फैसला सुनाया.

 

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