नक्सलियों से कनेक्शन मामले में सजायाफ्ता पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. SC ने बॉम्बे हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही HC को एक नोटिस जारी किया है. वहीं, जीएन साईबाबा के समर्थन में दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में छात्रों और शिक्षकों ने विरोध-प्रदर्शन किया. यहां पुलिस ने 40 लोगों को हिरासत में लिया है.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नक्सलियों से संबंध रखने के आरोपी डीयू के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा समेत छह आरोपियों की रिहाई पर रोक लगा दी है. इससे पहले 14 अक्टूबर को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने जीएन साईबाबा समेत छह लोगों की रिहाई का आदेश दिया था. इस पर महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटकाया था. शनिवार को SC ने मामले में सुनवाई की और हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी.
छात्रों और शिक्षकों के साथ पिटाई करने का भी आरोप
सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने पर जीएन साईबाबा के समर्थकों में निराशा छा गई. यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में छात्रों और शिक्षकों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और प्रदर्शन कर रहे करीब 40 लोगों को हिरासत में लिया. पुलिस का कहना था कि शनिवार को पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा की रिहाई के लिए दबाव बनाने की कोशिश में हंगामा किया जा रहा था. अनुमति के बिना प्रदर्शन होने पर कार्रवाई की गई. हालांकि, लेफ्ट समर्थित अखिल भारतीय छात्र संघ ने दावा किया कि हिरासत में लिए जाने वालों की संख्या ज्यादा है. ये भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों और शिक्षकों के साथ पुलिस ने पिटाई भी की है.
AISA ने कहा- 60 लोगों को हिरासत में लिया
AISA के राष्ट्रीय कार्यकारी महासचिव प्रसेनजीत ने कहा- 'हमारे प्रोफेसर जीएन साईबाबा को बरी करने और गलत तरीके से जेल में रखने पर शांतिपूर्ण विरोध किया जा रहा था. छात्रों और प्रोफेसरों को बेरहमी से पीटा गया और हिरासत में लिया गया.' उन्होंने कहा- 'करीब 60 लोगों को हिरासत में लिया गया. प्रदर्शनकारियों को दो पुलिस थानों में ले जाया गया. कुछ छात्रों को मौरिस नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया. अन्य को बुराड़ी पुलिस स्टेशन ले जाया गया.'
पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के साथ हुआ था दुर्व्यवहार
वहीं, पुलिस का कहना था कि छात्रों को बता दिया गया था कि उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कैंपस में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन उन्होंने विश्वविद्यालय की पुलिस और सुरक्षा कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया. पुलिस उपायुक्त (उत्तर) सागर सिंह कलसी ने बताया कि शनिवार दोपहर करीब 2.30 बजे AISA और अन्य लेफ्ट संगठनों से जुड़े कुछ छात्र कला संकाय (दिल्ली विश्वविद्यालय) के उत्तरी परिसर के बाहर इकट्ठा होने लगे. शुरुआत में कुछ पांच छात्र आए और नारेबाजी करने लगे.
विरोध करने वालों को हटाया तो साथियों को बुला लिया
कलसी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी, इस संबंध में बता दिया गया था. जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो तितर-बितर करने के लिए निर्देशित किया गया. इस बीच, उन्होंने अपने अन्य साथियों को विरोध के लिए बुलाना शुरू कर दिया और उनकी संख्या बढ़कर लगभग 40 हो गई. पुलिस ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने लिखित में कानूनी कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया, जिसके बाद एक्शन लिया गया. प्रदर्शनकारी छात्र शांति भंग कर रहे थे.
शाम 6 बजे सभी को रिहा कर दिया गया
पुलिस ने कहा- प्रदर्शनकारियों को जब हटाया जा रहा था, तो उन्होंने विरोध किया और विश्वविद्यालय की पुलिस-सुरक्षा कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया. अब स्थिति शांतिपूर्ण है. बाद में AISA ने बयान जारी किया और कहा कि प्रदर्शनकारियों को शाम 6 बजे आइसा दिल्ली के अध्यक्ष अभिज्ञान और आइसा डीयू के संयुक्त सचिव माणिक सहित कई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद रिहा कर दिया गया.
यह है मामला
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने शुक्रवार को साईंबाबा को बरी कर दिया था और उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने पांच अन्य दोषियों द्वारा दायर अपीलों को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया था. अभियोजन पक्ष ने बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. 52 वर्षीय साईंबाबा नागपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को यह कहते हुए सस्पेंड कर दिया कि उन्हें राहत देते समय मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं किया गया. इतना ही नहीं, शीर्ष अदालत ने साईबाबा के दिव्यांगता और स्वास्थ्य कारणों से जेल से रिहा करने और उन्हें घर में नजरबंद करने के अनुरोध को खारिज कर दिया. कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि आजकल 'शहरी नक्सलियों' की नजरबंदी की एक नई प्रवृत्ति है.