साल 2020 में भारतीय सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब तक देश की 577 बेटियां सेना में बतौर अधिकारी स्थायी कमीशन प्राप्त कर चुकी हैं. इस बात की जानकारी रक्षा मंत्रालय ने संसद में दी है.
बता दें कि फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में महिलाओं को भी सेना में स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था.
रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुपालन में 25 नवंबर, 2021 तक 63 पात्र महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया है."
बता दें कि महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन महिलाओं के लिए सेना में बड़ी भूमिका निभाने का मार्ग प्रशस्त करेगा और कमांड पदों पर भी वो अब काम कर सकेंगी.
इससे पहले सरकार ने महिला अधिकारियों को मातृत्व और बच्चे की देखभाल के लिए चुनौती भरे क्षेत्रों में खराब स्वच्छता, अलगाव और ग्रामीण पृष्ठभूमि के सैनिकों को महिला अधिकारियों को कमांडर के रूप में स्वीकार नहीं करने जैसे विचित्र कारणों का हवाला देते हुए स्थायी कमीशन देने का विरोध किया था. हालांकि कोर्ट ने सरकार के इन तर्कों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
आर्मी एयर डिफेंस (एएडी), सिग्नल, इंजीनियरिंग, आर्मी एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई), आर्मी सर्विस कॉर्प्स (एएससी), आर्मी ऑर्डनेंस कॉर्प्स जैसे विभाग में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तौर पर काम कर रही महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की अनुमति है.
हालांकि महिला अधिकारियों को अभी भी पैदल सेना, तोपखाने और बख़्तरबंद वाहिनी में सेवा देने का अधिकार नहीं मिला है. वायुसेना में महिलाओं को फाइटर पायलट बनने और लड़ाकू विमान उड़ाने का अधिकार जरूर मिल गया है.
सेना ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुरुष और महिला अधिकारियों के लिए सेवा शर्तों में संतुलन लाने के लिए प्रशिक्षण, शारीरिक सहनशक्ति और पोस्टिंग और सेवा पाठ्यक्रम जैसे मुद्दों पर अपनी नीति में भी बदलाव किया है.
सेना में अब तक महिलाओं का प्रवेश केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से होता था और अधिकतम 14 साल ही सेवा दे पाती थीं हालांकि कुछ महिला अधिकारी ऐसी भी थीं जिन्हें सेवा विस्तार मिला लेकिन उन्हें भी स्थायी कमीशन नहीं दिया गया था.
ये भी पढ़ें: