राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझा का गोदाम पकड़ा है. ये पूरा गोदाम पतंग उड़ाने वाले धागों से भरा था. मौके से 'चाइनीज मांझा' के 11760 रोल वाले 205 कार्टन बरामद किए गए हैं. आरोपी शाम/रात के समय कोडवर्ड के जरिए ऑर्डर मिलने पर गोदाम से धागा भेजते थे. इस गैंग ने रामगढ़, महेंद्र पार्क में किराए का गोदाम ले रखा था. यहीं से दिल्ली और NCR इलाके में परिचित खुदरा विक्रेताओं को 'चाइनीज मांझा' रोल सप्लाई करते थे.
ये शातिर पुलिस से भी बचने का पूरा प्लान करके चलते थे. यही वजह है कि 'चाइनीज मांझा' के डिब्बों को पुलिस की नजरों से छिपाने के लिए सीलबंद सफेद प्लास्टिक बैग के अंदर रखा करते थे. आरोपी ने 1 महीने पहले नोएडा में एक सप्लायर के जरिए 'चाइनीज मांझा' के लगभग 400 कार्टन मोनो पतंग मांझा के ब्रांड नाम से खरीदे थे, जो ट्रकों में सूरत से दिल्ली तक सप्लाई कर रहा था. उसने इसे अपने किराए के गोदाम में रखा था और इसे दिल्ली/एनसीआर के खुदरा विक्रेताओं को बेच रहा था.
दिल्ली में पतंगबाजी का खासा क्रेज
दरअसल, दिल्ली में पतंगबाजी का खासा क्रेज है और यह हर साल अगस्त के महीने में स्वतंत्रता दिवस समारोह के कुछ सप्ताह पहले खासा जोर पकड़ता है. हालांकि, प्लास्टिक, नायलॉन या इसी तरह की सिंथेटिक सामग्री से बने धागे का उपयोग करके पतंग उड़ाने से चर्चित 'चाइनीज धागा / मांझा' कई बार सड़क चलते लोगों की जान का दुश्मन बन जाता है. इतना ही नहीं, इन धागों से पक्षियों की भी जान जाती है.
बिजली सप्लाई में बाधा बनता है ये धागा
पतंग उड़ाने वाले ऐसे धागे गैर-बायोडिग्रेडेबल होने के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं. ये कभी-कभी बिजली लाइनों और सब-स्टेशनों पर फ्लैश-ओवर का कारण बनते हैं, जिससे बिजली बाधित होती है और बिजली की संपत्ति को नुकसान होता है, जिससे दुर्घटनाएं, चोटें और जीवन की हानि होती है.
सिंथेटिक धागे पर रोक लगी है
दिल्ली सरकार के NCT ने 10 जनवरी 2017 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें आदेश दिया गया था कि नायलॉन, प्लास्टिक या किसी अन्य सिंथेटिक सामग्री से बने पतंग उड़ाने वाले धागे की बिक्री, उत्पादन, भंडारण, आपूर्ति, आयात और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध होगा. बताते चलें कि पतंगबाजी की अनुमति सिर्फ सूती धागा के लिए दी गई है.
बहुत सावधानी से कारोबार करता है गैंग
पुलिस का कहना था कि 'चाइनीज मांझा' की बिक्री में शामिल गैंग के बारे में सुराग ढूंढना बड़ा मुश्किल कार्य था. क्योंकि ये गैंग अत्यधिक सावधानी बरतती है. यह पाया गया कि इस गैंग ने हर ग्राहक को इसे सीधे बाजार में नहीं बेचने के लिए रणनीति अपनाई है, लेकिन कोडवर्ड का उपयोग करके ऑर्डर मिलने पर सावधानीपूर्वक बेच रहे थे. स्थानीय सूत्रों से पता चला कि 'चाइनीज मांझा' के थोक विक्रेताओं को ऑर्डर मिल रहे थे. ये लोग रात में सिर्फ परिचित खुदरा विक्रेताओं को कोडवर्ड जरिए टेलीफोन और बहुत कम समय के लिए अपने बंद गोदामों को खोलकर सप्लाई करते थे.
पहले कोडवर्ड पता किया, फिर दुकानदार बनकर पहुंचा कांस्टेबल
28 जुलाई को विशेष टीम को रामगढ़ में 'चाइनीज मांझा' के गोदाम के बारे में जानकारी मिली. पता चला कि महेंद्र पार्क में अमरजीत द्वारा गोदाम चलाया जा रहा है, जो कोडवर्ड के जरिए खुदरा विक्रेताओं को मांझा के कार्टन बेच रहा है. इंस्पेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया और गैंग की गतिविधि पर नजर रखना शुरू कर दिया. टीम ने थोक विक्रेता द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कोडवर्ड का पता किया.
उसके बाद कांस्टेबल उत्तम को फर्जी ग्राहक बनाया गया और रात 8 बजे दिल्ली में महेंद्र पार्क रामगढ़ स्थित बी-93 में गोदाम पहुंचे और चाइनीज मांझा' के डिब्बों की डिलीवरी के लिए कोडवर्ड बताया और विक्रेता अमरजीत के साथ सौदा किया गया. बाद में अमरजीत ने गोदाम खोला. इस बीच टीम पहुंच गई और छापा मार दिया.
गोदाम से ये माल मिला
गोदाम की तलाशी के दौरान यहां 'चाइनीज मांझा' के 205 कार्टन बरामद किए गए. डिब्बों की जांच करने पर 160 डिब्बों में 60-60 'चीनी मांझा' रोल पाए गए, जबकि 48-48 'चीनी मांझा' रोल प्रत्येक 45 डिब्बों में पाए गए और कुल 11760 'चीनी मांझा' रोल ब्रांड के साथ सभी डिब्बों में पाए गए.
ऐसे चलाता था कारोबार
इन प्रतिबंधित पतंगबाजी के धागे बेचने वाले की पहचान अमरजीत (43 साल) निवासी फ्लैट नंबर 500, एलआईजी कॉलोनी, संजय एन्क्लेव, जीटीके डिपो, जहांगीरपुरी, दिल्ली के रूप में हुई. पूछताछ के दौरान आरोपी अमरजीत ने खुलासा किया है कि उसने 1 महीने पहले नोएडा में एक सप्लायर से मोनो काइट मांझा के ब्रांड नाम के 'चीनी मांझा' के लगभग 400 कार्टन खरीदे थे, जो ट्रकों में सूरत से दिल्ली की सप्लाई कर रहा था. उसने किराए के गोदाम में जमा कर रखा था और इसे दिल्ली/एनसीआर के खुदरा विक्रेताओं को बेचैन कर रहा था.