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अलविदा रोहित सरदाना: बेखौफ अंदाज और आवाज, जो हमेशा रहेगी याद!

रोहित सरदाना सिर्फ स्टूडियो में बैठकर एंकरिंग करने वाले पत्रकार नहीं थे. जब भी देश में कोई बड़ी खबर हुई, रोहित हमेशा ग्राउंड जीरो पर पहुंचे. वहीं से रिपोर्टिंग की, वहीं से शो की एंकरिंग भी की. रोहित सरदाना के सवालों पर देश के बड़े-बड़े दिग्गज नेता भी कई बार असहज हो जाते थे.

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रोहित सरदाना (फाइल फोटो)
रोहित सरदाना (फाइल फोटो)

कभी किसी ने सोचा नहीं था कि देश के सबसे होनहार और टेलिविज़न के सबसे बेखौफ़ एंकर रोहित सरदाना के लिए 'था' शब्द का इस्तेमाल करना होगा. सोशल मीडिया पर उनके तीखे कटाक्ष, टीवी स्क्रीन पर उनका प्रेज़ेंस, रोहित के पास हर बात का तर्क था. उनके पास कभी शब्द कम नहीं पड़ते थे. फिर सांसें क्यों कम पड़ गईं? ये जाने की उम्र नहीं थी रोहित… ये जाने का समय नहीं था.

रोहित आजतक पर रोज शाम 5 बजे 'दंगल' करते थे. 10 बजे 'दस्तक' देते थे. वो कई बार 'खबरदार' करने भी रात 9 बजे आते थे. टीवी न्यूज एंकर्स में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जिनके नाम से उनका शो जाना जाता है, पहचाना जाता है. रोहित उन्हीं चंद लोगों में थे. रोहित की खासियत थी कि वो स्टूडियो में हों, तो बस सटीक, निर्भीक और सीधी बात दर्शकों तक पहुंचती थी.

रोहित के पास अभी अपने करियर में और बुलंदियां हासिल करके के अनंत मौके थे. असीमित आकाश का विस्तार उनके सामने पड़ा था, जहां उनकी पत्रकारिता का पैनापन दिखना था. लेकिन काल को कुछ और मंजूर था.

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रोहित सरदाना का पहला दंगल कार्यक्रम

रोहित का शो अब खत्म हुआ है, लेकिन रोहित ने जो कुछ भी हासिल किया, उन्होंने पत्रकारिता को जो तेवर दिए, मुद्दों को बेबाकी से कहने का जो हौसला दिया, उससे उनकी विचार यात्रा कभी रुकेगी नहीं, थकेगी नहीं. देश के ज्वलंत मुद्दे के दंगल में जवाबदेहों से सवाल पूछने वाली आवाज अब सिर्फ यादों की थाती रह गई.

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दुनिया में जैसे वज्र गिर गया. देश के जाने माने और आजतक चैनल के दिग्गज एंकर रोहित सरदाना को काल ने हम सभी से छीन लिया. इस दर्द की कोई इंतेहा नहीं है. जिस साथी के साथ घंटों बातें होती रही हों, जिसका मुस्कुराता चेहरा आंखों के सामने नाचता रहा हो. हर किसी के सुख में दुख में हमेशा खड़ा रहने वाले किरदार का यूं जाना! 

सिर्फ 42 साल... ये कोई इस दुनिया से जाने की उम्र थी? अभी तो उड़ान का वक्त था. अभी तो तमाम सपने पूरे होने बाकी थे. अभी कई मंजिलें बाकी थीं. घर में पत्नी, दो छोटी-छोटी बेटियां. बेटियों के साथ रोहित की तस्वीरें, उनसे जुड़ी यादें, साथियों को बेचैन कर रही हैं. 

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आजतक की बुलंद आवाज थे रोहित सरदाना. रोहित के करोड़ों चाहने वाले थे. शाम पांच बजे उनके शो दंगल के लिए पूरा देश जैसे उनका इंतजार करता था. 

धाकड़ पत्रकार के तौर पर पूरा देश उनका लोहा मानता था. कभी झुके नहीं, कभी डिगे नहीं. सवाल पूछने में कभी हिचके नहीं. कम से कम शब्दों में कभी कटाक्ष के रूप में तो कभी सीधे-सीधे सवालों से वो सबको अपना मुरीद बना लेते थे. रोहित अच्छे-अच्छों की बोलती बंद कर देते थे.

रात 10 बजे के शो दस्तक को रोहित सरदाना ने एक नया आयाम दिया. शो में आम लोगों की समस्याएं उठाकर, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को शामिल करके रोहित ने दस्तक को एक नई पहचान दी.

रोहित सरदाना सिर्फ स्टूडियो में बैठकर एंकरिंग करने वाले पत्रकार नहीं थे. जब भी देश में कोई बड़ी खबर हुई, रोहित हमेशा ग्राउंड जीरो पर पहुंचे. वहीं से रिपोर्टिंग की, वहीं से शो की एंकरिंग भी की. रोहित सरदाना के सवालों पर देश के बड़े-बड़े दिग्गज नेता भी कई बार असहज हो जाते थे.

रोहित सरदाना का आखिरी दंगल 

रोहित सरदाना आजतक की आवाज को बुलंद करते रहे. तमाम पुरस्कार और सम्मान से वो नवाजे जाते रहे. हाल ही में उन्हें इएनबीए के तीन अवार्ड मिले थे. करीब दो दशक से समय की रफ्तार के साथ कदमताल करते हुए रोहित सरदाना इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दमदार हस्ताक्षर बन चुके थे. पिछले दिनों उन्हें कोरोना संक्रमण हो गया था. सब कुछ ठीक था. अचानक गुरुवार की रात उनकी तबीयत बिगड़ी थी. उन्हें नोएडा के मेट्रो अस्पताल ले जाया गया था.

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गुरुवार दिन में उन्होंने कई कोरोना पीड़ितों को फोन के जरिए मदद भी मुहैया करवाई थी. शुक्रवार की दोपहर अचानक उन्हें हार्ट अटैक आया था. इसके बाद कुछ कहने और सुनने को नहीं रह गया. रोहित सरदाना इस दुनिया में नहीं रहे. इस खबर से आजतक के साथियों पर तो जैसे गमों का पहाड़ टूट पड़ा. एक बारगी तो यकीन करना मुश्किल था कि हमेशा हंसते मुस्कुराते जिस रोहित सरदाना को हमेशा फ्लोर पर देखा था, वो अब कभी दिखाई नहीं देंगे. 

आज रोहित सरदाना हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी धाकड़ पत्रकारिता के जरिए उन्होंने जो अलख जगाई थी, उनकी वो आवाज उनका वो अंदाज जमाना सदियों तक भुला नहीं पाएगा. करोड़ों दिलों में रोहित सदियों तक धड़कते रहेंगे.

रोहित ने सवाल पूछने में कभी कमजोरी नहीं दिखायी. उन्होंने व्यवस्था से जनता का सवाल उठाया. रोहित टीवी पत्रकार थे लेकिन उनकी डिजिटल मौजूदगी भी उतनी ही प्रखर थी. सोशल मीडिया पर रोहित सरदाना के लाखों चाहने वाले थे. रोहित में जितनी हिम्मत थी, जितनी ताकत थी, उतनी ही जिम्मेदारी और उतनी ही संजीदगी भी थी.

रोहित ने राजनेताओं से जो तीखे और बेबाक सवाल किए, उससे कई बार समाज में व्यापक असर के तौर पर महसूस किया गया. आज जब रोहित नहीं रहे तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया.

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आजतक परिवार ने अपना सदस्य खोया. मीडिया ने एक चमकता सितारा खोया. देश ने अपना हीरो खोया. हर कोई स्तब्ध है. हर कोई दुखी है, क्योंकि ये क्षति ऐसी है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती. रोहित पत्रकारिता के दंगल के महारथी थे. लेकिन अभी एक लंबी जंग लड़नी थी. सिस्टम की खामियों के खिलाफ, शोषित की आवाज बनकर, वो इस जंग में आजतक परिवार को अकेला छोड़कर चले गए. अपने चाहने वालों के लिए एक दर्द छोड़ गए.

आजतक परिवार की तरफ से रोहित को भावभीनी श्रद्धांजलि.

 

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