प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की शुरुआत 2015 में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए की गई थी. इस योजना का मकसद था, हर किसी को छत मुहैया कराना. लेकिन राजधानी दिल्ली में कुछ दलाल और माफिया इस योजना को बदनाम कर रहे हैं. आजतक के रिपोर्टर नितिन जैन ने इस घोटाले को उजागर करने के लिए एक स्टिंग ऑपरेशन किया. आइए जानते हैं इस चौंकाने वाली कहानी का पूरा सच.
कालकाजी की बदलती तस्वीर
दिल्ली का कालकाजी इलाका एक वक्त झुग्गियों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां का नजारा बिल्कुल बदल चुका है. झुग्गियों की जगह अब पांच बड़े टावर खड़े हैं, जिनमें गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए 3,024 फ्लैट्स बनाए गए हैं. हर फ्लैट करीब 25 वर्ग मीटर में फैला हुआ है, जिसमें दो कमरे, एक किचन, बाथरूम, शौचालय और बालकनी है. साथ ही, हर टावर में लिफ्ट, बच्चों के खेलने के लिए पार्क और बागवानी के लिए वॉटर ट्रीटमेंट की सुविधा भी दी गई है.
नवंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इन फ्लैट्स की चाबियां उन लोगों को सौंपी, जिनकी झुग्गियां हटाकर ये घर दिए गए थे. ये घर सरकार की तरफ से गरीबों के लिए एक नयी शुरुआत का प्रतीक थे. लेकिन अब कुछ लोग इन फ्लैट्स को धंधा बनाने में जुट गए हैं.
दलालों का खेल
आजतक की टीम को जानकारी मिली कि कालकाजी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैट्स को खुले बाजार में बेचा जा रहा है. हमने एक ब्रोकर, संजय कुमार पंडित से मुलाकात की. संजय नोएडा के एक बिल्डर के लिए काम करता है और उसने हमें बताया कि ये फ्लैट्स अब बिक रहे हैं.
रिपोर्टर और संजय कुमार पंडित की बातचीत:
रिपोर्टर: यहां क्या डील चल रही है?
संजय कुमार पंडित: ये फ्लैट्स पहले डीडीए ने उन लोगों के लिए बनाए थे, जिनकी झुग्गियां हटाई गईं. चार टावर तो पूरी तरह से भर चुके हैं, लेकिन एक टावर में अभी कुछ फ्लैट्स बचे हैं. कुछ डीडीए के कर्मचारियों ने सोचा कि इन बचे हुए फ्लैट्स को बेचकर पैसे कमा लिए जाएं. ये हर जगह होता है साहब.
रिपोर्टर: फ्लैट पूरी तरह से तैयार है?
संजय कुमार पंडित: हां, पूरी तरह से तैयार है.
रिपोर्टर: और कितने का मिलेगा?
संजय कुमार पंडित: अभी 6.5 लाख में मिल जाएगा. ये तो मौक़े की बात है, असल में इसकी कीमत इससे कहीं ज्यादा है.
संजय ने हमें बताया कि हम अगर 3.25 लाख रुपये आज ही दे दें, तो बाकी पैसा बाद में देकर फ्लैट हमारे नाम हो जाएगा. लेकिन हम ना तो झुग्गी में रहते थे, और ना ही इस योजना के पात्र थे. फिर संजय हमें कैसे फ्लैट दिला सकता था?
रिपोर्टर: अगर हम इस योजना के पात्र नहीं हैं, तो फिर कैसे मिलेगा?
संजय कुमार पंडित: आप चिंता मत कीजिए. आप बस पैसे दीजिए और अपने आधार कार्ड, फोटो और परिवार की जानकारी हमें दे दीजिए. हम आपको झुग्गीवासी साबित कर देंगे.
रिपोर्टर: क्या कागजी कार्रवाई पूरी तरह से लीगल होगी?
संजय कुमार पंडित: बिलकुल. 3.25 लाख आज दीजिए, कल आपको सारे दस्तावेज मिल जाएंगे.
जब असली मास्टरमाइंड आया सामने
इस डील को और पक्का करने के लिए संजय हमें सुधीर शर्मा से मिलवाने ले गया, जो नोएडा का एक बड़ा बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर है. सुधीर ने हमें भरोसा दिलाया कि सारा काम पक्का है.
रिपोर्टर: पैसे आपके या आपकी पत्नी के खाते में जाएंगे?
सुधीर शर्मा: हां, जैसा संजय ने बताया, वही सही है. कोई दिक्कत नहीं होगी. बस आप सरकारी कर्मचारी नहीं होने चाहिए.
सुधीर ने हमें एक ‘पिंक डीडीए कार्ड’ दिखाया और बताया कि ये कार्ड ही फ्लैट हासिल करने का मुख्य जरिया है. उसने हमें विश्वास दिलाया कि जैसे ही ये कार्ड बन जाएगा, हमें फ्लैट मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी.
डीडीए के कर्मचारी भी इस खेल में शामिल
सुधीर के बाद हमें शेषमणि नाम के एक आदमी से मिलवाया गया, जो खुद को डीडीए का ठेका कर्मचारी बता रहा था. उसने बताया कि वो खुद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई फ्लैट्स ले चुका है.
शेषमणि ने कहा, 'मैंने चार फ्लैट्स अलग-अलग नाम से लिए हैं— एक अपने बच्चे के नाम, एक पत्नी के नाम और एक अपने नाम पर. ये सस्ते फ्लैट्स दिल्ली में अब कहीं नहीं मिलेंगे.' शेषमणि ने हमें बताया कि कैसे वो अपने संपर्कों की मदद से लोगों को योजना के पात्र बना देता है और उन्हें फ्लैट दिला देता है.
अली जान का मामला
इस घोटाले का शिकार सिर्फ अमीर लोग नहीं, बल्कि गरीब और भोले-भाले लोग भी हैं. अली जान नाम का एक शख्स, जो अपनी बेटी के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट लेने की कोशिश कर रहा था, ने दलालों को 3 लाख रुपये एडवांस में दिए, लेकिन उसे अब तक कोई फ्लैट नहीं मिला.
अली जान बताते हैं, 'उन्होंने मुझसे कहा कि वे मेरी बेटी के लिए फ्लैट दिला सकते हैं. मैंने पहले 50,000 रुपये कैश दिए, फिर धीरे-धीरे 3 लाख रुपये दिए, लेकिन अब तक मुझे कुछ नहीं मिला.'
अली जान ने पैसे देते समय विडियो बना लिया था. जिसके आधार पर इस स्टिंग ऑपरेशन के दौरान हमने मुईनुद्दीन नाम के एक दलाल से मुलाकात की, जो इन फ्लैट्स को खुले बाजार में बेचने की कोशिश कर रहा था. मुईनुद्दीन का दावा था कि वह कई झुग्गीवासियों के नाम पर फ्लैट्स बेच चुका है, और इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए वह नकली दस्तावेज भी तैयार करवा सकता है.
रिपोर्टर: तो डील क्या है?
मुईनुद्दीन: गोविंदपुरी में 40 गज का एक फ्लैट है. ये 14 मंजिला इमारत में है. हम इसे ऐसे पेश करते हैं जैसे यह झुग्गीवासियों के लिए हो, ताकि किसी को शक न हो.
रिपोर्टर: मतलब मुझे झुग्गीवासी बनकर दिखाना पड़ेगा? ये कैसे होगा?
मुईनुद्दीन: वो सब मैं संभाल लूंगा, साहब. आपको आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड उस इलाके से मिल जाएगा. आपका नाम झुग्गीवासियों की लिस्ट में डाल दिया जाएगा.
रिपोर्टर: ये कैसे संभव है?
मुईनुद्दीन: हम हमेशा से यही करते आ रहे हैं. आपका नाम लिस्ट में आ जाएगा, बाकी तो अधिकारियों के हाथ में है.
रिपोर्टर: अब तक कितने फ्लैट्स बेचे हैं?
मुईनुद्दीन: अब तक 7-8 फ्लैट्स बेच चुका हूं.
मुईनुद्दीन ने आगे बताया कि वह अलग-अलग आईडी कार्ड का इस्तेमाल करके फ्लैट बेचता है और सरकारी नौकरी वाले लोगों से बचता है ताकि खतरा न हो.
रिपोर्टर: कीमत क्या है?
मुईनुद्दीन: मैंने पहले 8.5 लाख में बेचे थे, लेकिन अब रेट 2 लाख बढ़ गया है.
रिपोर्टर: और आप मुझसे कितना लेंगे?
मुईनुद्दीन: 50 फीसदी पहले दूंगा और बाकी तब जब चाबी हाथ में होगी, जो 3-4 महीने में मिल जाएगी. काम थोड़ा गड़बड़ है, लेकिन पेमेंट लीगल होनी चाहिए.
रिपोर्टर: पेमेंट कहां जाएगी?
मुईनुद्दीन: जूनियर इंजीनियर के खाते में. उसका नाम सुनील कुमार है, जो डीडीए में काम करता है.
मुईनुद्दीन ने अपनी बात को और पुख्ता करने के लिए हमें जमील से मिलवाया, जो एक साल पहले 7 लाख रुपये देकर एक झुग्गीवासियों के लिए बना फ्लैट खरीद चुका था, जबकि वह कभी झुग्गी में रहा ही नहीं है.
रिपोर्टर: तो आप कभी झुग्गी में नहीं रहे?
जमील: नहीं, कभी नहीं. मैं जाकिर नगर में रहता हूं. मैंने अपना पिछला फ्लैट शाहीन बाग में बेचा था.
रिपोर्टर: आपके शाहीन बाग वाले फ्लैट की कीमत कितनी थी?
जमील: मैंने उसे करीब 6-7 महीने पहले 1.05 करोड़ रुपये में बेचा.
ऐसे ही सैकड़ों लोग दिल्ली में हैं, जो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और कभी झुग्गी में नहीं रहे. फिर भी ये लोग सस्ते PMAY फ्लैट्स में निवेश कर रहे हैं ताकि बाद में उसे ऊंचे दाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा सकें. यह लालच और भ्रष्टाचार का ऐसा खेल है, जिसमें देश की राजधानी दिल्ली भी शामिल हो चुकी है. यह दिखाता है कि कैसे रियल एस्टेट माफिया और दलाल गरीबों के लिए बने फ्लैट्स को अवैध रूप से बेच रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है और कब तक ये धंधा यूं ही चलता रहेगा? आगे जो भी हो... लेकिन ये दिल्ली में लालच और भ्रष्टाचार का एक खतरनाक खेल तो जरूर मालूम पड़ता है.