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आज का दिन: बंगाल में फिर से रार, किसान आंदोलन पर क्या है पक्ष-विपक्ष की कहानी

बंगाल में अगले साल चुनाव हैं और बीजेपी- टीएमसी के बीच कड़वाहट चरम पर है. टीएमसी के नेता पाला बदल- बदलकर बीजेपी के ख़ेमे में जा रहे हैं. एक-दूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं.

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सीएम ममता बनर्जी
सीएम ममता बनर्जी

बंगाल में अगले साल चुनाव हैं और बीजेपी- टीएमसी के बीच कड़वाहट चरम पर है. टीएमसी के नेता पाला बदल- बदलकर बीजेपी के ख़ेमे में जा रहे हैं. एक-दूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं. इस बीच मोदी सरकार और ममता सरकार तीन आईपीएस ऑफिसरों के मामले में एक-दूसरे से भिड़ गए हैं. केंद्र सरकार इन तीनों को सेंट्रल डेप्युटेशन पर बुला रही है. गृहमंत्रालय ने उन्हें रिलीव करने के लिए ममता सरकार को ख़त भी लिखा है लेकिन सीएम ममता बनर्जी मानने को राज़ी नहीं हैं. क्यों ये भिड़ंत हो रही है और इन ऑफ़िसर्स को क्या नई ज़िम्मेदारी दी जा रही है.. समझा रही हैं इंडिया टुडे टीवी की डिप्टी एडिटर कमलजीत कौर संधू.

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कृषि क़ानूनों पर सरकार पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है और विपक्ष विरोध छोड़ने को राज़ी नहीं है. इस बीच हमने सरकार को बार बार कहते सुना कि विपक्षी पार्टियाँ जब ख़ुद सत्ता में थीं तो कृषि क़ानून में सुधार की बात कहती थीं, अब हो गया तो विरोध कर रही हैं. कुछ स्क्रीनशॉट्स भी सोशल मीडिया पर चल रहे हैं ख़ास तौर से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जिसमें ये लोग APMC क़ानून को रद्द या संशोधन करने की हिमायत कर रहे हैं. तो क्या वाक़ई विपक्षियों ने इस मामले में यू टर्न लिया है? कहां से पक्ष विपक्ष की ये कहानी शुरू हुई समझा हमने इंडिया टुडे टीवी के नेशनल अफ़ेयर्स एडिटर राहुल श्रीवास्तव से.

अमेरिका ने भारत को 'करेंसी मैनुपुलेटर्स' यानी मुद्रा में हेरफेर करने वाले देशों की 'निगरानी सूची' में डाल दिया है. इस लिस्ट में पहले से चीन, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, इटली, सिंगापुर, थाइलैंड और मलेशिया शामिल हैं. ये दूसरी बार है जब भारत का नाम इस लिस्ट में है. क्या होता है करेंसी मैनिपुलेटर्स का मतलब.. और भारत को इस लिस्ट में क्यों डाला गया.. समझा हमने इंडिया टुडे हिंदी पत्रिका के एसोसिएट एडिटर शुभम शंखधर से.

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एप्पल अगले साल ऐसा फ़ीचर देनेवाला है जिससे फ़ेसबुक नाखुश है. ये फीचर प्राइवेसी पसंद लोगों के लिए तो अच्छा है लेकिन फेसबुक को ये ऐसा खटका कि अख़बारों में फ़ुल पेज विज्ञापन दे कर कंपनी बता रही है कि ऐपल के इस कदम से छोटे बिज़नेस को नुक़सान होगा. इंस्टाग्राम के हेड ने ट्वीट भी किया है. कहा है कि यूजर्स की प्राइवेसी अच्छी है लेकिन बिजनेस पहले आता है. तो एप्पल की इस नई प्राइवेसी पॉलिसी में ऐसा क्या है जिसकी फेसबुक और इन्स्टाग्राम आलोचना कर रहे है? बता रहे हैं शुभम वर्मा 


और ये भी सुनिए कि 18 दिसंबर की तारीख महत्वपूर्ण क्यों है, इतिहास इस पर क्या कहता है. साथ साथ अख़बारों का हाल भी लेंगे. इतना सब कुछ महज़ आधे घंटे में सुनिए मॉर्निग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में नितिन ठाकुर के साथ.

'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें

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