चीन और भूटान की सीमा से कुछ तस्वीरें आई हैं. सैटेलाइट के थ्रू खींची गई हाई रिज़ोल्यूशन इमेज हैं. उसी इलाक़े की पिछले साल की तस्वीरों और अब की इन तस्वीरों में साफ़ फ़र्क़ है. बंजर ज़मीन पर एक भरा पूरा गाँव दिख रहा है. गाँव का नाम भी इसे चीन दे रहा है. असल में क्या है ये किसे ही पता है. जिस जगह ये बसावट है उसकी अहमियत ऐसे समझिए कि डोकलाम में जहां साल 2017 में भारत चीन के सैनिक भिड़े थे वो महज़ कुछ ही किलोमीटर दूर है. हमारे सहयोगी हैं अंकित कुमार. उन्होंने बताया कि चीन का ये खेल क्या है.
जम्मू कश्मीर का रौशनी ज़मीन घोटाला खूब चर्चा में है. 25 हज़ार करोड़ के इस घोटाले में हुआ ये है कि कई नेताओं और ऑफ़िसर्स ने सरकारी ज़मीन पर धड़ल्ले से क़ब्ज़ा किया है. फ़िलहाल सूबे में ज़िला विकास परिषद यानि डीडीसी का चुनाव है. ऐसे में ये भी मुद्दा बन गया है. तो ये घोटाला दरअसल क्या है.. कितना पुराना है और इसमें कौन कौन शामिल है.. श्रीनगर में आजतक रेडियो रिपोर्टर अशरफ़ वानी से सुनिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस पर चर्चा करनेवाले हैं. दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात हैं जहां मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं तो ख़ास तौर पर इन राज्यों पर नज़र रहनेवाली है. इस बीच एक ख़बर असम से आई. पूर्व सीएम तरुण गोगोई नहीं रहे. कल शाम उनका निधन हो गया. 84 साल 8 महीने के थे वो. उन्हें कोरोना भी हुआ था जिसके बाद गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. हालांकि 25 अक्टूबर को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था लेकिन उनकी तबीयत फिर से बिगड़ी और दो नवंबर को वो फिर भर्ती हुए. गोगोई 2001 से 2016 के बीच असम के तीन बार मुख्यमंत्री रहे थे. छह बार संसद के लिए चुने गए. दो बार केंद्र में मंत्री भी बने. कैसा रहा उनका सियासी सफ़र.. याद कर रहे हैं इंडिया टुडे डॉट कॉम के सीनियर असिस्टेंट एडिटर प्रभाष दत्ता.
एक फिल्म आ रही है दुर्मागती- the myth. पहले नाम था इसका दुर्गावती लेकिन लग रहा है लक्ष्मी बॉम्ब के नाम पर मचे हंगामे के बाद अब नाम चेंज कर दिया गया है. अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर ने इस हॉरर फिल्म का पहला लुक सोशल मीडिया पर शेयर किया है. हमने बात की हमारी सहयोगी ज्योति कन्याल से और जाना कि नाम बदलने के पीछे असली वजह क्या रहीं… और फिल्म के बारे में क्या पता चला है..
और ये भी सुनिए कि 24 नवंबर की तारीख महत्वपूर्ण क्यों है, इतिहास इस पर क्या कहता है. साथ साथ अख़बारों का हाल भी लेंगे. इतना सब कुछ महज़ आधे घंटे में सुनिए मॉर्निग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में नितिन ठाकुर के साथ.