
पंजाब में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान मुख्यमंत्री बन गए हैं. विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटों पर जीत हासिल की. पंजाब में 1966 के बाद ये पहली बार है जब किसी एक पार्टी को इतनी ज्यादा सीटें मिली हैं. हालांकि, जीत जितनी बड़ी है, उतनी ही बड़ी भगवंत मान के पास चुनौती भी है.
भगवंत मान एक ऐसे राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं, जिसके ऊपर पौने तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है. पंजाब सरकार के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य 2.73 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है. 5 साल पहले 2017 में जब कांग्रेस ने सत्ता संभाली थी, तब पंजाब पर 1.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था. वहीं, 2012 में करीब 83 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था. 10 साल में पंजाब पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बढ़ गया.
चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने पंजाब पर कर्ज के मुद्दे को जमकर उठाया, लेकिन अब भगवंत मान के पास पंजाब को कर्ज मुक्त बनाने की सबसे बड़ी चुनौती है. ये चुनौती इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि CAG की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2024-25 तक पंजाब पर कर्ज बढ़कर 3.73 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा.
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फ्री बिजली, हर महीने हजार रुपये का वादा भी तो है...
आम आदमी पार्टी ने लोकलुभावन वादे भी किए थे. आम आदमी पार्टी के घोषणा पत्र में जो दो बड़े वादे थे, उनमें एक था हर परिवार को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली और दूसरा 18 साल से ऊपर की हर महिला को हर महीने एक हजार रुपये. अगर आम आदमी पार्टी की सरकार इन दोनों वादों को पूरा करती है तो हर साल करीब 20 से 22 हजार करोड़ रुपये का बोझ बढ़ जाएगा.
लेकिन ये खर्च बढ़ेगा कैसे...?
- 300 यूनिट मुफ्त बिजली : पंजाब में करीब 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं. इनमें से करीब 18 लाख दलितों और गरीब परिवारों को पंजाब सरकार पहले ही 200 यूनिट तक की बिजली फ्री दे रही थी. फ्री बिजली पर सब्सिडी के लिए सरकार ने 2021-22 में 10,600 करोड़ रुपये से ज्यादा रखे थे. अब अगर सरकार सभी परिवारों को 300 यूनिट तक की बिजली मुफ्त देती है, तो उस पर सालाना 9 हजार करोड़ रुपये का बोझ बढ़ने का अनुमान है.
- महिलाओं को 1000 रुपये : चुनाव आयोग के मुताबिक, पंजाब में 18 साल से ऊपर की 1.13 करोड़ महिलाएं हैं. आम आदमी पार्टी ने 18 से ऊपर की हर महिला को हर महीने एक हजार रुपये देने का वादा किया है. अब अगर इस वादे को पूरा किया जाता है, तो सरकार पर हर महीने 1100 करोड़ रुपये का बोझ आएगा. यानी, सालाना 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च बढ़ने की संभावना है.
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तो कैसे आएगा ये खर्च?
चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ये रकम जुटाने का तरीका बताया था. उन्होंने दावा किया था कि पंजाब का बजट 1.73 लाख करोड़ रुपये है, जिसका 20% यानी 34 हजार करोड़ रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है. ये रकम उनकी सरकार में कहीं नहीं जाएगी. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा था कि रेत चोरी को रोककर उनकी सरकार 20 हजार करोड़ रुपये की कमाई करेगी. इससे मुफ्त बिजली और महिलाओं को हर महीने हजार रुपये दिए जाएंगे.
दिल्ली में कैसे हो रहा है ये सब?
- अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि फ्री बिजली देने का फॉर्मूला सिर्फ आम आदमी पार्टी के पास है.
- दिल्ली में केजरीवाल सरकार 200 यूनिट तक की बिजली फ्री दे रही है. सरकार भले ही कई दावे करे, लेकिन इसका असर उसकी कमाई पर दिख रहा है.
- RBI के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने 2020-21 में 55,309 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान लगाया था, लेकिन जब इसका रिवाइज्ड एस्टिमेट आया तो सरकार को 42,444 करोड़ रुपये की कमाई हुई. 2021-22 में सरकार ने 53 हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई होने का अनुमान लगाया है.
- इसी तरह केजरीवाल सरकार का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है. 2019-20 में सरकार ने 39,637 करोड़ रुपये खर्च किए थे. 2020-21 में ये खर्च बढ़कर 46,215 करोड़ रुपये हो गया. अब 2021-22 में सरकार ने 51,800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है.