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दिल्ली शराब घोटाला: मनीष सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट से नहीं मिली जमानत, 8 मई को अगली सुनवाई

मनीष सिसोदिया ने जमानत देने से इनकार करने के निचली अदालत के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. सिसोदिया ने अर्जी दायर कर मांग की थी कि उनकी जमानत याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान, ट्रायल कोर्ट के आदेश को जारी रखा जाए, जिसमें उन्हें सप्ताह में एक बार अपनी बीमार पत्नी से मिलने की इजाजत मिली थी. 

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मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो)
मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो)

दिल्ली शराब घोटाला से जुड़े सीबीआई और ईडी दोनों मामलों में AAP लीडर मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई लेकिन एक बार फिर उन्हें राहत नहीं मिल सकी. मनीष सिसोदिया ने जमानत देने से इनकार करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी. मनीष सिसोदिया की सीबीआई और ईडी मामले में जमानत अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट 8 मई को सुनवाई करेगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को नोटिस जारी किया है.

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मनीष सिसोदिया के वकील ने कहा कि सिसोदिया को निचली अदालत ने अपनी बीमार पत्नी से मुलाकात के लिए हफ्ते में एक दिन की कस्टडी परोल दे रखी है. लेकिन सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद पत्नी से भी नहीं मिल पा रहे हैं. उनकी जमानत अर्जी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित रहने तक उन्हें हफ्ते में एक दिन की कस्टडी परोल जारी रहने की इजाजत होनी चाहिए.

सिसोदिया को मिल सकती है पत्नी से मिलने की इजाजत

सिसोदिया ने अर्जी दायर कर मांग की थी कि उनकी जमानत याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान, ट्रायल कोर्ट के आदेश को जारी रखा जाए, जिसमें उन्हें सप्ताह में एक बार अपनी बीमार पत्नी से मिलने की इजाजत मिली थी. दिल्ली हाईकोर्ट ने ED से सवाल किया कि जब पिछले तीन महीने से सिसोदिया को अपनी पत्नी से हफ्ते में एक दिन मिलने की इजाजत है, तो फिर अब इसे जारी रखने में क्या दिक्कत है?

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इस मामले पर ईडी की ओर से कहा गया कि अगर ट्रायल कोर्ट का आदेश जारी रहता है, तो जांच एजेंसी को कोई आपत्ति नहीं है.

यह भी पढ़ें: मनीष सिसोदिया चुनाव प्रचार के लिए जेल से बाहर आएंगे? कोर्ट ने CBI-ED से मांगा जवाब

क्यों गिरफ्तार हुए थे सिसोदिया?

मनीष सिसोदिया को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 के बनाने और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के लिए 26 फरवरी, 2023 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार किया था.

क्या है मामला?

22 मार्च 2021 को मनीष सिसोदिया ने नई शराब नीति का ऐलान किया था. 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू कर दी गई. नई शराब नीति आने के बाद सरकार शराब के कारोबार से बाहर आ गई और पूरी शराब की दुकानें निजी हाथों में चली गईं. नई नीति लाने के पीछे सरकार का तर्क था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी. हालांकि, नई नीति शुरू से ही विवादों में थी. जब विवाद ज्यादा बढ़ा तो 28 जुलाई 2022 को सरकार ने अपनी शराब नीति को रद्द कर फिर से पुरानी पॉलिसी को लागू कर दिया. 

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