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आयुष्मान भारत योजना में होगा बदलाव? स्वास्थ्य मंत्री ने लोकसभा में दिया जवाब

लोकसभा में आयुष्मान भारत योजना का मुद्दा उठा. बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रुडी ने प्रश्नकाल के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार कराने में गरीबों के सामने आ रही समस्याओं का जिक्र किया और योजना में नीतिगत बदलाव को जरूरी बताया. स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सदन में इसका जवाब दिया.

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स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया

बिहार के सारण से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद राजीव प्रताप रुडी ने शुक्रवार को आयुष्मान भारत योजना को लेकर लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सवाल किया. रुडी ने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य जहां बड़ी संख्या में लोग योजनाओं का लाभ लेते हैं, उन्हें समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं. उन्होंने कहा कि गरीब जब उपचार कराने के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होता है तब इस्टीमेट बनाकर देने की बात कही जाती है. तीन लाख का इस्टीमेट बनाकर दिया जाता है वह पैसा उसके खाते में पहुंच जाता है और तब तक अगर उसका खर्च चार लाख, पांच लाख पहुंच जाता है. वह पैसा वो कहां से दे. 

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उन्होंने ये भी कहा कि जब गरीब दोबारा अस्पताल पहुंचता है तब उसे ये कहकर लौटा दिया जाता है कि पिछली बार का पैसा हॉस्पिटल को अब तक नहीं मिला है. रुडी ने कहा कि मेरे हिसाब से केवल एक गारंटी सर्टिफिकेट जारी किया जाना चाहिए कि आप खर्च कीजिए, पैसा मिल जाएगा. इसे लेकर नीतिगत निर्णय की जरूरत है.

स्वास्थ्य मंत्री ने इसका जवाब देते हुए कहा कि हमने योजना में बदलाव कर ये प्रावधान किया कि साढ़े पांच लाख खर्च हो जाए तो भी पांच लाख दे ही दिया जाए. बाकी पैसा राज्य सरकारें भी दे सकती है. उन्होंने इस्टीमेट को अप्रूव करने की प्रक्रिया ऑनलाइन करने और राज्य सरकारों को ही पावर दे दिए जाने की भी जानकारी दी और कहा कि योजना में कोई त्रुटि हो या बदलाव की जरूरत हो तो हम उसमें बदलाव भी करेंगे.

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हरसिमरत कौर ने बठिंडा एम्स के अमृत फार्मेसी की ओर से 20 परसेंट प्रॉफिट लिए जाने का मुद्दा उठाया और कहा कि वहां काउंटर वाले मरीजों को परेशान कर रहे हैं. इसका जवाब देते हुए मनसुख मंडाविया ने कहा कि अमृत फार्मेसी प्रॉफिट के लिए नहीं चलाई जा रही है. उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि वहां अधिक से अधिक दवाएं उपलब्ध हैं.

उन्होंने कहा कि कैंसर की जो दवाएं 9 से 10 हजार में मिलती थीं, 95 दवाओं की ट्रेडिंग प्राइस फिक्स कर दी गई है. 9 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र देश में चल रहे हैं जहां सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. ये योजना 2008 में कांग्रेस के समय बनी थी लेकिन आगे नहीं बढ़ पाई थी. आज हर रोज 10 लाख लोग जन औषधि केंद्र पर जाते हैं. हर लोकसभा क्षेत्र में एक जन औषधि केंद्र हो.

 अधीर रंजन चौधरी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हम राज्य सरकार को पैसा देते हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 60 फीसदी पैसा केंद्र देता है, 40 फीसदी राज्य सरकार देती है. बंगाल सरकार ने कितना खर्च हुआ, अपडेट नहीं दिया है जिसकी वजह से फिगर अपडेट नहीं हो सका है.

 

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