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'...कुछ तो ठीक किया होगा निंदनीय नेहरू ने', अभिषेक मनु सिंघवी ने संसद में गिनाई कांग्रेस की विरासत

संविधान को अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरे होने पर संसद में इस पर चर्चा हो रही है. राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कुछ तो ठीक किया होगा उस निंदनीय नेहरू ने. सिंघवी ने ऐसा क्यों कहा?

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अभिषेक मनु सिंघवी
अभिषेक मनु सिंघवी

राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने पंडित नेहरू की सरकार में हुए पहले संविधान संशोधन से लेकर इंदिरा गांधी की सरकार में लागू आपातकाल तक, कांग्रेस को जमकर घेरा. कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि नेहरू ने गलतियां कीं तो हम भी करेंगे, ये कौन सी बात है. उन्होंने कहा कि 1930 से 1960 के बीच 30 से 40 देश साम्राज्यवाद से आजाद हुए और उनमें अकेला भारत ही है जो आज भी लोकतंत्र का चमकता सितारा है. कुछ तो ठीक किया होगा उस निंदनीय नेहरू ने.

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कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भारत आज भी मजबूत लोकतंत्र है, इसके अनेक कारण हैं लेकिन जो जुगलबंदी थी नेहरू, गांधी और सरदार पटेल की, उसका भी रोल है. एक ने आजादी दिलाई और दूसरे ने उसे महफूज रखा. उन्होंने आरोप लगाया कि आज तीन एजेंसियां आपके अलायंस पार्टनर की तरह व्यवहार कर रही हैं. अब जो विकृतियां आई हैं, उनका क्या है. इंदिरा गांधी की सरकार में लागू आपातकाल को लेकर कांग्रेस सांसद ने कहा कि ये आपातकाल एक सीमा से बंधा हुआ था. इसकी अवधि 18 महीने थी. ये एक संवैधानिक विकृति है जिसका प्रावधान संविधान में ही है. लेकिन आज जो अघोषित आपातकाल है, इसकी क्या सीमा है.

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उन्होंने आरोप लगाया कि न्यू इंडिया में अविश्वास का वातावरण, भय का वातावरण है. अपने कंधे के पीछे झांककर बोलने को गणतंत्र का भय कहते हैं जो यहां से संविधान हॉल तक है. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ऐसा पिछले 75 साल में कभी नहीं हुआ. उन्होंने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट ने जो कहा उसे सब जानते हैं. जानना जरूरी है कि इसमें केंद्र का स्टैंड क्या था. केंद्र का रुख ये था कि आंतरिक या अंतिम कोई निर्णय नहीं दीजिए. सरकार ने इसका विरोध किया.

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अभिषेक मनु सिंघवी ने बुलडोजर एक्शन का मुद्दा भी संसद में उठाया. उन्होंने कहा कि बुलडोजर एक्शन के खिलाफ किसी केंद्रीय मंत्री की भी हिम्मत नहीं हुई कि इसके खिलाफ एक शब्द बोले. अभिषेक मनु सिंघवी ने सत्ता पक्ष पर इसे लेकर इंटर स्टेट और इंटर सीएम कॉम्पिटिशन शुरू कर दिया. एक अवॉर्ड आभासी रूप से शुरू कर दिया कि कौन सबसे ज्यादा बुलडोजर चलाता है. आप संवैधानिक संस्थाओं के बीच ऑटोमैटिक वार चाहते हो लेकिन ऑटोमैटिक ब्लेड से. अभिषेक मनु सिंघिवी ने आर्थिक उदारीकरण से फिस्कल फेडरलिज्म तक की बात की और राज्यों में राज्यपाल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

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