इस साल की शुरुआत में साबरमती जेल में बंद दो मलेशियाई नागरिकों को 15.5 साल बाद जेल से बरी किया गया था. लेकिन नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने इस फैसले के खिलाफ अहमदाबाद में अपील दायर की थी. जिसके चलते दोनों की रिहाई टल गई थी. अब इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एनसीबी को आदेश दिया है कि वो जल्द से जल्द एक्शन ले और इस मामले को निपटाएं.
जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ दो मलेशियाई नागरिकों रवींद्रन करपाया और गुरसेकरन पिल्लई द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. दोनों ने अपने वकील अजय भिसे के जरिए मांग की थी कि विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को उन्हें अपने देश भेजने के लिए अनुमति देने का निर्देश दिया जाए.
एनसीबी ने कहा- जल्द करेंगे कार्यवाही
मंगलवार को सुनवाई के दौरान एजेंसी की ओर से पेश वकील श्रीराम शिरसाट ने कहा कि बरी किए जाने के खिलाफ अपील 26 जुलाई को एनसीबी द्वारा दायर की गई थी. जांच एजेंसी ने कहा कि एजेंसी इसपर जल्द एक्शन लेगी. वहीं, मलेशियाई नागरिकों के वकील भिसे और अयाज खान ने एनसीबी की अपील पर हैरानी जताते हुए कहा कि आरोपी पहले ही 15.5 साल की सजा काट चुका है. ऐसे में जहां अधिकतम सजा 20 साल की हो वहां फिर से रिहाई पर सवाल उठाना समझ से परे है. खान ने कहा, 'मान लें कि एनसीबी सफल हो जाती है, तब भी वे पहले ही 15.5 साल जेल में बिता चुके हैं. 4.5 साल की सजा के लिए उन्होंने अपील दायर की है.'
यह भी पढ़ें: एनसीबी में समीर वानखेड़े का एक्सटेंशन खत्म, फिर बढ़ेगा कार्यकाल?
2008 में हुए थे गिरफ्तार
बता दें कि दोनों आरोपी अक्टूबर 2007 को मलेशिया से मुंबई पहुंचे थे और एक साल बाद एक साइकोट्रोपिक दवा मेथामफेटामाइन पाए जाने के बाद एनसीबी ने उन्हें गुजरात से गिरफ्तार कर लिया था. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी शुरू किया गया था और एनसीबी मुंबई ने भी दोनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी. हालांकि, आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए अहमदाबाद की ट्रायल कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया था. लेकिन इस रिहाई के खिलाफ एनसीबी ने अपील दायर की थी.
इसी बीच 5 जुलाई को, मलेशियाई दूतावास ने दोनों के लिए आपातकालीन पासपोर्ट जारी किया था क्योंकि उसमें से एक की मां का निधन हो गया था.लेकिन एनसीबी ने एनओसी नहीं दी जिसके चलते वह मलेशिया नहीं जा सके.