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असम में बाल विवाह के खिलाफ एक्शन जारी, अब तक 2789 की गिरफ्तारी

असम में बाल विवाह के मामले में गिरफ्तारी की संख्या 2,789 हो चुकी है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ये जानकारी दी है. इन मामलों में ज्यादातर आरोपी घर के मुखिया या अकेले कमाने वाले हैं, ऐसे में राज्यभर में असम पुलिस की कार्रवाई का विरोध हो रहा है.

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 असम में बाल विवाह के खिलाफ एक्शन
असम में बाल विवाह के खिलाफ एक्शन

असम में बाल विवाह के खिलाफ लगातार एक्शन हो रहा है. ताजा आंकड़ों की बात करें तो अब तक बाल विवाह के मामले में गिरफ्तारी की संख्या 2,789 हो चुकी है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ये जानकारी दी है.

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इन मामलों में ज्यादातर आरोपी घर के मुखिया या अकेले कमाने वाले हैं, ऐसे में राज्यभर में असम पुलिस की कार्रवाई का विरोध हो रहा है. आरोपियों की पत्नियां, बच्चे और परिवार के सदस्य सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उधर, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि राज्य में पिछले साल 6.2 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं में 17 प्रतिशत नाबालिग थीं. 

असम पिछले कई सालों से बाल विवाह की कुरीति से जूझ रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार असम में मातृ और शिशु मृत्यु दर सबसे ज्यादा है. इसकी प्रमुख वजह बाल विवाह है. इसके बाद कैबिनेट ने बाल विवाह करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रस्ताव पास किया था. इसके तहत 14 साल से कम उम्र के लड़का या लड़की से शादी करने के आरोपी पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है. साथ ही बाल विवाह कानून के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है.

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कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन ने असम में हो रही कार्रवाई का स्वागत किया है. हालांकि, फाउंडेशन की ओर से कहा गया है कि असम सरकार को पीड़ितों को वित्तीय-कानूनी सहायता प्रदान करनी चाहिए और उनके लिए पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए. फाउंडेशन ने मांग की है कि जब तक आरोपी पति को जमानत नहीं मिल जाती, तब तक सरकार हर महिला को 2000 रुपए प्रति माह की आर्थिक मदद दे. वहीं, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि असम सरकार अगर इस बाल विवाह की समस्या को खत्म करना चाहती है, तो उसे साक्षरता का स्तर बढ़ाना चाहिए.ॉ

 

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