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लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, ड्रोन... एयरो इंडिया में 'मेड इन इंडिया' का जलवा, क्या बढ़ पाएगा डिफेंस एक्सपोर्ट?

Aero India 2023: पांच दिन तक चलने वाले एयरो इंडिया में 'मेड इन इंडिया' का जलवा दिख रहा है. 700 से ज्यादा भारतीय कंपनियां अपने रक्षा हथियार और उपकरण यहां प्रदर्शित कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि एयरो इंडिया का मकसद डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ाना है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी 2024-25 तक डिफेंस एक्सपोर्ट 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने की बात कही है.

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एयरो इंडिया में भारतीय वायुसेना का लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर. (फोटो-PTI)
एयरो इंडिया में भारतीय वायुसेना का लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर. (फोटो-PTI)

Aero India 2023: बेंगलुरु में सोमवार से 14वां एयरो इंडिया शो शुरू हो गया है. पांच दिन तक चलने वाले इस शो में दुनिया के 80 से ज्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं. इसमें 800 से ज्यादा रक्षा कंपनियां शामिल हुईं हैं, जिनमें से 100 विदेशी और 700 भारतीय हैं. 

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सोमवार को इसका उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज एयरो इंडिया सिर्फ शो नहीं है, बल्कि ये इंडिया की स्ट्रेन्थ भी है. उन्होंने कहा कि एक समय था जब इसे केवल 'शो' या 'सेल टू इंडिया' की विंडो भर माना जाता था, लेकिन बीते सालों में देश ने इस नजरिये को बदला है. 

प्रधानमंत्री मोदी ने डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जो देश कभी सबसे बड़ा डिफेंस इम्पोर्टर था, आज वो दुनिया के 75 देशों को डिफेंस इक्विपमेंट एक्सपोर्ट कर रहा है. उन्होंने कहा कि अभी डिफेंस एक्सपोर्ट 1.5 अरब डॉलर का है, जिसे 2024-25 तक बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है.

एयरो इंडिया शो में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन और मिश्रधातु निगम लिमिटेड जैसी सैकड़ों भारतीय कंपनियां हिस्सा ले रहीं हैं. ये कंपनियां लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टर से लेकर ड्रोन और कई डिफेंस इक्विपमेंट का शोकेस करेंगी.

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मेड इन इंडिया 15 लड़ाकू विमान

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पवेलियन में 15 लड़ाकू विमान भी शामिल हैं. ये पूरी तरह से मेड इन इंडिया हैं. इनमें एडवांस्ड लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' और लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर भी शामिल है.

प्रचंड मल्टी रोल और छोटा लड़ाकू हेलिकॉप्टर है. इसमें कई खतरनाक हथियारों को तैनात किया जा सकता है. इसमें चिन-माउंटेड गन, 68 मिमी के रॉकेट, बम, एयर टू एयर और एयर टू ग्राउंड मिसाइलों को तैनात किया जा सकता है. 

वहीं, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर 220 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. इसमें एक बार में 500 किलो के पेलोड ले जाए जा सकते हैं.

इसके अलावा, HAL के पवेलियन में अट्रैक्शन का केंद्र इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर, नेक्स्ट जनरेशन HLFT-42 और LCA Mk 2 के मॉडल्स, हिंदुस्तान टर्बो-शाफ्ट इंजिन-1200, RUAV, LCA ट्रेनिर, और हिंदुस्तान- 228 रहेंगे.

प्रचंड हेलिकॉप्टर. (फोटो-ANI)

DRDO का खतरनाक UAV

DRDO के खेमे में कई सारे हथियार हैं. इनमें सबसे खास यूएवी TAPAS-BH है. इसका पूरा नाम टेक्टिकल एरियल प्लेटफॉर्म फॉर एडवांस्ड सर्विलांस- बीयॉन्ड होरिजन है. 

एयरो इंडिया में पहली बार TAPAS-BH उड़ान भरेगा. DRDO के मुताबिक, तीनों सेनाएं इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. ये ड्रोन 28 हजार फीट की ऊंचाई तक 18 घंटे से ज्यादा लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम है. इतना ही नहीं, TAPAS-BH से एक बार में 350 किलोग्राम के पेलोड भी भेजा जा सकता है. 

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इसके अलावा DRDO के पवेलियन में लड़ाकू विमान और यूएवी, मिसाइल सिस्टम, इंजन एंड प्रपल्शन सिस्टम, एयरबोर्न सर्विलांस सिस्टम, सेंसर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एंड कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे 330 से ज्यादा प्रोडक्ट्स को शोकेस किया जाएगा.

डीआरडीओ का यूएवी तपस.

तेजस का 'तेज'

स्वदेशी तकनीक से बना तेजस का 'तेज' भी दुनिया देखेगी. दो दशकों से वायुसेना इसका इस्तेमाल कर रही है. इसके दो वर्जन आते हैं. पहला- लड़ाकू और दूसरा- ट्रेनर. 

ये सिंगल सीटर और सिंगल इंजन वाला लड़ाकू विमान है. इसमें कई शॉर्ट रेंज की मिसाइलों को लोड किया जा सकता है. इसके साथ ही एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें भी तैनात की जा सकतीं हैं. 

इसमें एडवांस्ड कॉकपिट है. इसकी कॉकपिट में मल्टी फंक्शनल डिस्प्ले है, जिससे पायलट डिस्प्ले पर सारी इन्फोर्मेशन देख सकता है. 

लड़ाकू विमान तेजस. (फोटो-PTI)

एयरो इंडिया से क्या उम्मीद?

अधिकारियों का कहना है कि एयरो इंडिया का मकसद एलसीए तेजस, एटीटी-40, डोर्नियर लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी एयर प्लेटफॉर्म के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है.

अधिकारियों का कहना है कि इस शो का मकसद केंद्र सरकार के 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के विजन के अनुसार स्वदेशी उपकरणों और तकनीकी का प्रदर्शन करना और विदेशी कंपनियों के साथ डील करना है. 

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एयरो इंडिया शो में विदेशी और भारतीय रक्षा कंपनियों के सीईओ के बीच बैठक भी होनी है. इसमें हजारों करोड़ों रुपये के रक्षा सौदे होने की उम्मीद है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस बैठक में भारतीय और विदेशी कंपनियों के बीच करीब 75 हजार करोड़ रुपये के समझौते होने की उम्मीद है.

क्या बढ़ पाएगा भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट?

रक्षा के मामले में भारत को 'आत्मनिर्भर' बनने में अभी थोड़ा समय और लगेगा. क्योंकि भारत अपनी रक्षा जरूरत का 70 फीसदी से ज्यादा सामान बाहर से खरीदता है.

हालांकि, रक्षा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट काफी बढ़ा है. आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में भारत ने 1,521 करोड़ रुपये का डिफेंस एक्सपोर्ट किया था, जो 2021-22 में बढ़कर 12,814 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया. वहीं, 2022-23 में 6 फरवरी तक ही करीब 11 हजार करोड़ रुपये के रक्षा हथियार और उपकरण बेच चुका है.

प्रधानमंत्री मोदी ने 2024-25 तक भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 5 अरब डॉलर यानी 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचाने की बात कही है.

 

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