अफगानिस्तान सरकार की पराजय की वजह से कर्मशल फ्लाइट के लिए इस्तेमाल होने वाले एयरस्पेस को लेकर भी समस्या पैदा हो गई है. फिलहाल जिस तरह के हालात अफगानिस्तान में हैं उसके ऊपर से कोई कमर्शल फ्लाइट उड़कर जाने को तैयार नहीं है. यूनाइटेड एयरलाइंस, ब्रिटिश एयरवेज और वर्जिन अटलांटिक आदि ने सोमवार को अपने रूट डायवर्ट किए. लेकिन क्या यह समस्या लम्बे वक्त तक बनी रहेगी? इसपर हमने एक्सपर्ट से बात की.
इंडिया टुडे से बात करते हुए उड़ान सुरक्षा (इंडियन एयरलाइंस) के पूर्व निदेशक कैप्टन एसएस पनेसर ने कहा, 'अफगानिस्तान में मौजूदा हालात क्या हैं यह बिल्कुल कहा नहीं जा सकता. कुछ पता नहीं है कि काबुल ATC में कितने लोग काम कर रहे हैं, वहां कोई रडार एक्सपर्ट है या नहीं. मुझे लगता है कि 2-3 दिन तो कम से कम इंतजार करना ही चाहिए.'
एक्सपर्ट मानते हैं, लम्बे वक्त तक नहीं रहेगी समस्या
एक्सपर्ट मानते हैं कि सत्ता को लेकर जो विवाद है वह खत्म होने के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए उतनी दिक्कत नहीं होगी. भारतीय कमर्शल फ्लाइट के संबंध में पनेसर ने कहा कि हमारी फ्लाइट ज्यादा से ज्यादा 25-30 मिनट अफगानिस्तान के ऊपर से उड़ती हैं. यह समय भी इस पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान या रूस हमें अपने एयरस्पेस में कितनी देर उड़ने देते हैं.
अफगानिस्तान में पहले जब तालिबान सरकार थी तब भी सिविल एविशन सेक्टर को उतनी दिक्कतें नहीं हुई थीं. एक्सपर्ट मानते हैं कि तालिबानी पूरी तरह सत्ता की बागडोर मिलने के बाद हवाई युद्ध में नहीं जाना चाहेंगे.
'ओवर फ्लाइट फीस' की वजह से खुला रह सकता है एयरस्पेस
9/11 हमले के बाद तालिबान सरकार ने अफगानिस्तान का एयरस्पेस 16 सितंबर 2001 तक बंद रखा था. इस बीच भारत से जुड़ी 120 फ्लाइट्स पर रोज असर पड़ा था. भारत आने के लिए हिमालय के दक्षिण से घूमकर आना पड़ा था, जिसमें अतिरिक्त समय और ईंधन लगता था.
अफगानिस्तान हवाई रूट का मुख्य इस्तेमाल एशिया और यूरोप के बीच उड़ने वाली फ्लाइट की समयसीमा को घटाने के लिए होता है. अफगानिस्तान चारों तरफ से समुद्र से घिरा है. ऐसे में कमर्शल एयरलाइंस के गुजरने पर मिलने वाली 'ओवर फ्लाइट फीस' उसके लिए आय का अच्छा साधन है. इस साधन को तालिबान सरकार भी ज्यादा दिन बंद नहीं रखना चाहेगी.
बता दें कर्मशल फ्लाइट आमतौर पर अफगानिस्तान के ऊपर से 31000 फीट पर उड़ती हैं. पनेसर कहते हैं कि वैसे खतरा नहीं है, लेकिन सवाल वही है कि जबतक अफगान में स्थाई सरकार नहीं बनती तब तक सुरक्षा को ताक पर रखकर इजाजत कौन देगा.