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'एअर इंडिया जो फायदे में थी, चिदंबरम साहब ने...', हवाई किराया पर चर्चा के दौरान संसद में बोले निशिकांत दुबे

कांग्रेस सांसद शफी पारंबिल ने हवाई किराया के विनिमय को लेकर प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया. इस बिल पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इसका समर्थन किया और कांग्रेस के साथ ही पी चिदंबरम को भी निशाने पर लिया.

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Nishikant Dubey
Nishikant Dubey

केरल से कांग्रेस के सांसद शफी पारंबिल ने एयर फेयर के विनिमय को लेकर प्राइवेट मेंबर्स बिजनेस के दौरान संकल्प पेश किया. इस पर चर्चा के दौरान केरल के आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने ट्रांसपोर्ट को लेकर स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट का जिक्र किया और इसे रेग्युलेट करने की मांग की. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी कांग्रेस सांसद की ओर से लाए गए संकल्प का समर्थन किया और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला.

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निशिकांत दुबे ने कहा कि शफी जिस पार्टी के सदस्य हैं और एनके प्रेमचंद्रन जिस पार्टी का समर्थन करते हैं, उनको यह समझना चाहिए और देश को बताना चाहिए कि इस स्थिति को बनाया किसने. मंत्री से कह रहे हैं कि कानून बदलिए. उन्होंने कहा कि जो कानून 1947 में जवाहरलाल नेहरू बनाकर गए, उस कानून को 1994 में बदलने का काम किसने किया. आज एअर इंडिया बिक गया. क्यों बिक गया. निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि एअर इंडिया बिक इसलिए गया क्योंकि भारत सरकार की जिम्मेदारी पैसेंजर्स के नहीं मिलने पर भी छोटी जगहों पर जाने की थी. समस्या तब आ गई जब एअर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का आपने मर्जर कर दिया.

उन्होंने टेलीकॉम क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि ये इसलिए हो पा रहा है कि भारत सरकार ने बीएसएनल को नहीं बेचा है. एअर इंडिया जो फायदे में थी, चिदंबरम साहब ने ऐसी सिचुएशन पैदा कर दी जिससे इसे बेचना पड़ गया. बीजेपी सांसद ने कहा कि जब बेच देंगे तब भारत सरकार के पास कौन सा मैकेनिज्म है जिससे आप एयर फेयर को रेग्युलेट कर सकते हैं. उन्होंने एयरक्राफ्ट एक्ट 135 बी का जिक्र किया और कहा कि जब 2004 में हमारी सरकार गई, इन्होंने इसे भी खत्म कर दिया. जिस दिन आपने इसे खत्म कर दिया, उसके बाद भारत सरकार के पास कुछ नहीं बचा. कांग्रेस की नीतियों के कारण आज भारत की जनता परेशान है. 

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एयरलाइंस ने आपदा में अवसर खोज लिया- निशिकांत

निशिकांत दुबे ने कहा कि जब पहली बार चुनकर लोकसभा में आया था, तब ट्रेन और रेल लाइन की मांग सुनाई देती थी. जब मोदीजी ने कहा कि हम हवाई चप्पल वाले को भी प्लेन में बैठाएंगे और उड़ान योजना शुरू की, आज हर तरफ से एयरपोर्ट की मांग आ रही है. उन्होंने कहा कि रेल पर चर्चा करते-करते हम एयरपोर्ट पर बात कर रहे हैं, यही देश का विकास है. निशिकांत दुबे ने कहा कि आपदा में अवसर एयरलाइंस ने भी खोज लिया. कोरोना काल के बाद एयरफेयर बढ़ता चला गया.

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उन्होंने कहा कि इसमें तीन तरह के एस्पेक्ट्स हैं- इंटरनेशनल, डोमेस्टिक और कार्गो. इंटरनेशनल एयरलाइंस में कौन से कानून लागू होते हैं. जो पूर्ववर्ती सरकारें द्विपक्षीय समझौते करके चली गईं, उनको कैसे सुधारेंगे. दूसरा डोमेस्टिक में जो लोग स्लॉट बांट कर चले गए और कुछ एयरलाइंस कंपनियां डूब गई हैं, उनका क्या करेंगे और तीसरा कार्गो के साथ क्या करेंगे.

ऐरा को कैसे मजबूत किया जाए, ये सोचना होगा

निशिकांत दुबे ने कहा कि पूरी दुनिया में जो डायनेमिक फेयर का जो सिद्धांत है और 2008 का जो ऐरा है, जिसे ये (कांग्रेस) बनाकर चले गए. एटीएफ के बाद मेजर एयरपोर्ट के लिए ऐरा तय करता है कि आप पार्किंग चार्ज, लैंडिंग चार्ज क्या लेंगे. उन्होंने कहा कि जो छोटे एयरपोर्ट पर जाएगा, इसका टैरिफ कौन तय करेगा. एक मैकेनिज्म रेगुलेटरी बॉडी तय करता है और एक मैकेनिज्म ये है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी तय करती है. निशिकांत दुबे ने कहा कि जब एक-दूसरे के रास्ते में आएंगे, तो कौन तय करेगा ये बड़ा प्रश्न है. ऐरा को मजबूत कैसे किया जाए, मंत्रीजी को ये सोचना होगा.

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उन्होंने कहा कि प्राइवेट एयरलाइंस का कहना है कि हम कॉम्पिटेटिव मैकेनिज्म पर फेयर तय करते हैं. हमारे यहां एक ही फ्लाइट जाती है. वहां कौन सी प्रतिस्पर्धा है. निशिकांत दुबे ने कहा कि कोरोनाकाल में दरभंगा एयरपोर्ट का बड़ा नाम हुआ. जिस दिन उड़ान स्कीम का पैसा खत्म होता है, उसी दिन एयरलाइंस कंपनी भाग जाती है. उन्होंने आगे कहा कि नाम लेकर कह रहा हूं, स्पाइसजेट ऐसी कंपनी है, जिसका काम यही है कि उड़ान स्कीम में सरकार का पैसा लेना और फिर फ्लाइट बंद कर देना. जो बड़ी कंपनियां हैं, वो छोटे जगहों पर क्यों अपना जहाज नहीं चलाती हैं. क्यों प्रॉफिट वाली जगहों पर ही जाने की कोशिश करती हैं.

एयर फेयर रेग्युलेट करने के लिए दिए ये सुझाव

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि जब हमने टेलीकॉम कंपनी को डी-रेग्युलेट किया, तब वाजपेयीजी ने यूएसओएफ बनाया. जिसमें पिछड़े क्षेत्र को आप नर्स नहीं करेंगे तो आपसे हम पेनल्टी लेंगे. सभी इसके भाग हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह का मैकेनिज्म डेवलप करिए कि 157 एयरपोर्ट में हम आपको स्लॉट तभी देंगे जब आप कुछ प्रॉफिट वाली जगहों पर जाएंगे तो कुछ पिछड़े रूट पर भी जाना होगा. निशिकांत दुबे ने कहा कि एक कमेटी बनानी चाहिए जो डीजीसीए, मंत्रालय और सभी स्टेक होल्डर्स के साथ महीने-महीने मीटिंग करे और यह देखे कि क्या डायनेमिक फेयर का निर्धारण एयरलाइंस कैसे कर रही हैं.

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उन्होंने कहा कि एयरलाइंस डायनेमिक फेयर के नाम पर फेयर तो बढ़ा लेती हैं लेकिन 20 से 25 सीटें खाली जाती हैं. पंजाब के अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह ने कहा कि रेलवे, एयरपोर्ट जितने पब्लिक सेक्टर के थे, सब बेच दिए. कम से कम इसे रेग्युलेट कर दीजिए. बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब ने अपर लिमिट फिक्स करने का सुझाव दिया. वहीं, आसन पर मौजूद संध्या राय ने कहा कि मेरा भी एक सुझाव है. जब आप एकबार टिकट देखते हैं तब किराया तेजी से बढ़ता चला जाता है. जब कमेटी बने तो इसे भी देखिएगा.

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