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'हमें असम में एक भी व्यक्ति की नागरिकता स्वीकार नहीं...' सीएए के विरोध में बोले अखिल गोगोई

रायजोर के अध्यक्ष और अमस के शिवसागर सेे विधायक अखिल गोगोई का कहना है कि असम एक प्रवासी प्रभावित राज्य है. सीएए असम समझौते के खिलाफ है. भाजपा सरकार असम समझौते से असहमत है, जिसने साल 1971 को कट ऑफ वर्ष के रूप में निर्धारित किया है. पर सीएए इसको साल 2014 तक ले जा रहा है. असम की राजनीति पलायन और उससे जुड़े मुद्दों पर घूमती रही है. 

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अखिल गोगोई. (फाइल फोटो)
अखिल गोगोई. (फाइल फोटो)

असम में सीएए को लेकर प्रदर्शन जारी है.  रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने अब सीएए को असम समझौते के खिलाफ बताया है और कहा कि राज्य की राजनीति पलायन जुड़े मुद्दों पर घूमती रही है.

रायजोर के अध्यक्ष और शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने आजतक से की खास बातचीत में कह कि असम एक प्रवासी प्रभावित राज्य है. सीएए असम समझौते के खिलाफ है. भाजपा सरकार असम समझौते से असहमत है, जिसने साल 1971 को कट ऑफ वर्ष के रूप में निर्धारित किया है. पर सीएए इसको साल 2014 तक ले जा रहा है. असम की राजनीति पलायन और उससे जुड़े मुद्दों पर घूमती रही है. 

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'प्रवासियों ने हमारी संसकृति और पहचान को किया प्रभावित'

जब उनसे पूछा गया कि आसामी संगठन नागरिक कानून का विरोध क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने बताया, सीएए लागू होने के बाद बांग्लादेश से आए 15 लाख से 20 लाख हिंदू बंगालियों को नागरिकता मिलेगी. विभिन्न सीएए विरोधी संगठनों का मानना ​​है कि बांग्लादेशी हिंदू प्रवासियों ने उनकी संस्कृति और पहचान को प्रभावित किया है.  1970 के दशक में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई से पहले और बाद में लाखों बांग्लादेशी हिंदू असम में आए थे. हमें एक भी व्यक्ति की नागरिकता स्वीकार नहीं करेंगे.

उन्होंने आगे कहा कि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पहले ही कह चुकी है कि वो सीएए को स्वीकार नहीं करेंगी और त्रिपुरा के लिए कोई जगह नहीं है.

भ्रम में हैं बंगाली हिंदू: अखिल गोगोई

सीएए पर सीएम हेमंत बिस्वा सरमा की हालिया टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर गोगोई ने जवाब दिया, असम के सीएम खतरनाक व्यक्ति हैं. वह सांप्रदायिक और तानाशाह हैं, वह दिल्ली के गुलाम हैं. हाल ही में सीएम ने कहा है कि सीएए लागू होने के बाद एक भी असम के व्यक्ति ने सीएए के लिए आवेदन नहीं किया है. बांग्लादेश से आए बंगाली हिंदू CAA को लेकर भ्रम में हैं और वे स्थानीय असमियों को परेशान नहीं करना चाहते हैं. भाजपा इसे हिंदू मुस्लिम बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह असमिया बनाम विस्थापित बंगाली प्रवासियों का मामला है.

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'NRC में बाहर हुए 19 लाख लोग'

शिवसागर विधायक ने सवाल किया, एनआरसी में 19 लाख लोगों को बाहर कर दिया गया, लेकिन वे कहां जाएंगे, उन्हें सीएए के जरिए नागरिकता मिलेगी. मुख्यमंत्री को दिल्ली में असम के लोगों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. जब उनसे सीएए के खिलाफ उनके भविष्य के विरोध के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, पलायन के खिलाफ असम में युद्ध लंबे समय से चल रहा है और 2019 में पांच लोग मारे गए थे और हम सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे. आज विरोध कम है लेकिन भविष्य में यह अधिक होगा.


आपको बता दें कि अखिल गोगोई ने साल 2019 में भी सीएए  के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन में पांच लोगों की मौत हो गई थी.

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