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मैंने 'साबरमती रिपोर्ट' नहीं देखी और न ही देखने की इच्छा है', बोले अखिलेश यादव

संभल की जामा मस्जिद मामले पर अखिलेश यादव ने कहा, "जिस दिन से सदन शुरू हुआ है, उसी दिन से हमारी पार्टी ने संभल को लेकर बात करने की कोशिश की है लेकिन सदन नहीं चला. हमारी मांग अभी भी वही है कि संभल को लेकर हम लोग चर्चा करना चाहते हैं और अपनी बात रखना चाहते हैं क्योंकि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं "

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SP चीफ अखिलेश यादव (तस्वीर: PTI)
SP चीफ अखिलेश यादव (तस्वीर: PTI)

सोमवार यानी 2 दिसंबर को संसद में 'द साबरमती रिपोर्ट' फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई. इस दौरान फिल्म के एक्टर विक्रांत मैसी भी मौजूद रहे. अब अखिलेश यादव ने फिल्म देखने के सवाल पर मीडिया के सामने अपनी राय रखी है. जब मीडिया ने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या आपने फिल्म देखी... इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा, "मैंने फिल्म नहीं देखी और न ही मेरी देखने की कोई इच्छा है."

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इसके साथ ही अखिलेश यादव ने संभल मामले पर बोलते हुए कहा, "जिस दिन से सदन शुरू हुआ है, उसी दिन से हमारी पार्टी ने संभल को लेकर बात करने की कोशिश की है लेकिन सदन नहीं चला. हमारी मांग अभी भी वही है कि संभल को लेकर हम लोग चर्चा करना चाहते हैं और अपनी बात रखना चाहते हैं क्योंकि अधिकारियों का जिस तरह का व्यवहार है, अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और वहां की सरकार के इशारे पर मनमानी कर रहे हैं. मनमानी इस हद तक है कि वो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता बनकर काम कर रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी कभी इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं कर सकती. हमारा कहना है कि संभल पर चर्चा और बात हो.जिन दोषी अधिकारियों की वजह से वहां पर जानें गई हैं, उत्तर प्रदेश का माहौल खराब हुआ है.

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'बीजेपी की सोची-समझी रणनीति...'

अखिलेश यादव ने कहा, "जो लोग जगह-जगह खुदाई करना चाहते हैं वो याद रखें कि वो एक दिन देश का सौहार्द और भाईचारा भी खो देंगे. बीजेपी सोची-समझी रणनीति के तहत इस तरह का काम कर रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा कि वो कौन लोग थे, जिनके सर्वे कराते वक्त बीजेपी के कार्यकर्ता गए थे. सरकार ने वहां के पूरे अधिकारियों को अपनी सरकार का पदाधिकारी बना दिया है. उनसे आप न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते. दोषी अगर कोई है, तो प्रशासन और नारा लगाने वाले हैं. 

यह भी पढ़ें: संभल विवाद के बीच बदायूं में शम्सी जामा मस्जिद या नीलकंठ महादेव मंदिर? कोर्ट में आज सुनवाई

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों उपचुनाव के वक्त प्रशासन द्वारा किए गए व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा, "कोई कल्पना कर सकता है कि वोट लूट लिए जाए और वोट न डाले दिया जाए. हालांकि, उपचुनाव सरकार के माने जाते हैं लेकिन कभी भी प्रशासन का इस तरह का व्यवहार देखने को नहीं मिला. बीजेपी की सोची-समझी रणनीति है कि लोगों को इस तरह के मसलों पर उलझाकर रखो."

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भड़के अखिलेश

अखिलेश यादव ने भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश से जुड़े अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर बात करते हुए कहा, "भारत सरकार खुद को ताकतवर कहती है लेकिन क्या ताकतवर हैं. अगर वो हमारे साधू-संतों की भी हिफाजत नहीं कर सकती है. भारत सरकार को बांग्लादेश में हो रहे मामलों पर कड़ा रूख लेना चाहिए.

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वहीं, बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्ता पलट होने के बाद वहां नई सरकार में खासकर हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा और जुल्म-ज्यादती, बिगड़ते हालात अति-दुखद और चिंताजनक हैं. इसको लेकर भारत के लोगों में काफी आक्रोश है. सरकार इस पर संसद में वक्तव्य दे और उचित कदम भी उठाए.
 

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