समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सरकार को जीडीपी से लेकर महंगाई, बेरोजगारी और जीएसटी के मुद्दे पर जमकर घेरा. उन्होंने रुपये की गिरती कीमतों का मुद्दा भी उठाया और नोटबंदी के मुद्दे पर भी कठघरे में खड़ा किया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सदन में नोटबंदी के समय का एक वाकया सुनाकर भी सरकार पर तंज किया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़े आर्थिक सुधार हैं. ये सुधार नहीं विकार हैं.
अखिलेश यादव ने कहा कि नोटबंदी के समय एक मां लाइन में लगी थी. वहां उसने एक बच्चे को जन्म दिया था जिसका नाम हम लोगों ने खजांची रखा है. उन्होंने कहा कि वह बच्चा अब बड़ा हो गया है. साइकिल भी चला लेता है. मैं तो कहना चाहूंगा कि आप (सरकार) उसे गोद ले लें. उसके बाद आप उसका नाम भी अपने हिसाब से रख सकेंगे. अखिलेश यादव ने कहा कि व्यापारियों को जीएसटी से लगातार उलझाया जा रहा है. जब तक जीएसटी को व्यापारी समझ पाते हैं, ये तरीका बदल देते हैं.
उन्होंने सभी कृषि उपकरणों पर जीरो जीएसटी की मांग करते हुए कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं आई हैं. भंडारण को लेकर भी रोडमैप होना चाहिए. अखिलेश यादव ने कहा कि कैसी अर्थव्यवस्था है जिसे तीसरे नंबर पर पहुंचा रहे हैं लेकिन नौकरी-रोजगार नहीं हैं. नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन है, जब तक निवेश का वातावरण नहीं सुधरेगा, ये नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि इन्होंने (सरकार ने) एमएसएमई को विकास का दूसरा इंजन बताया. सही भी है, लेकिन इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई. 11 करोड़ रोजगार मिलता है इस सेक्टर से लेकिन इसके लिए ना तो पहले के बजट में ना ही इस बजट में कोई प्रावधान किया गया.
अखिलेश यादव ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब लोग बजट आने पर खुश होते थे. ये नई उम्मीद जगाता था. बीजेपी सरकार के बजट में न देश के विकास के लिए कुछ होता है न जनता के विकास के लिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान में बैलेंस्ड डेवलपमेंट की नीति पिछड़ गई है. बजट लोकतांत्रिक होता है जो समाज के हर वर्ग के लिए लाभकारी होता है. मिट जाए अमीरी-गरीबी के बीच की सब खाई, जिसने भेदभाव और गैरबराबरी की जड़ है जमाई. भूख मिटे, महंगाई घटे ये नारा होना चाहिए. अखिलेश यादव ने कहा कि बजट का सबसे बड़ा सिद्धांत कमजोर के प्रति हमदर्दी जताना होना चाहिए.
'किसानों को साथ लेकर ही मिटाई जा सकती है रोटी की भूख'
अखिलेश यादव ने कहा कि रोटी की भूख किसानों को साथ में लेकर ही मिटाई जा सकती है. किसानों की फसल का उचित दाम देना, फसलों को आवारा पशुओं से बचाना होगा. उन्होंने कहा कि आवारा पशु इसलिए कह रहा हूं क्योंकि प्रधानमंत्री जी ने यूपी चुनाव में कहा था कि इसके लिए हमारे पास रोडमैप है, हमारी सरकार बनवाइए. हम आवारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाएंगे. अखिलेश यादव ने कहा कि फसलों को बचाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. बहुत से ऐसे कारोबार हो रहे हैं जो बढ़ते चले जा रहे हैं. कई कंपनियां अरबों कमा रही हैं लेकिन आलू के किसान को मुनाफा नहीं मिल पा रहा.
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महंगाई का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से सत्ता में बैठे लोग चंदे के नाम पर कंपनियों से वसूली कर रहे हैं, वह भी महंगाई के बढ़ने का एक बड़ा कारण है. निवेश को लेकर सपा प्रमुख ने कहा कि यूपी सरकार ने एक बहुत बड़ा आयोजन किया था इन्वेस्टर्स मीट. 40 लाख करोड़ का एमओयू हुआ था. जानना चाहता हूं कि डबल इंजन सरकार वाले लोग यूपी में निवेश बढ़ाने के लिए क्या कर रहे हैं. उन्होंने शेयर बाजार में उथल-पुथल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विदेशी निवेशक लगातार बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. एक-एक दिन में हमारे निवेशकों का लाखों करोड़ डूब जा रहा है. युवा पीढ़ी देखा-देखी पैसा तो लगा देती है लेकिन बिचौलियों के खेल को समझ नहीं पा रही. हमारा मार्केट हिचकोले खा रहा है.
अखिलेश के लंबे भाषण पर स्पीकर ने ली चुटकी
अखिलेश यादव के लंबे भाषण पर स्पीकर ओम बिरला ने चुटकी लेते हुए कहा कि ज्यादा बड़ा लिख दिया. इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि चार इंजन के बजट की वजह से लंबा हो गया. क्योंकि कोई इंजन न छूटने पाए. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार पिछले 11 साल में कछुए की चाह चली है. निजी क्षेत्र निवेश में नई जान डालने की बात कही गई है जिसका अर्थ ये निकलता है कि ये क्षेत्र बेजान हो गया है. अखिलेश यादव ने कहा कि अच्छे दिन न इनके राज में आए हैं, ना आने वाले समय में आएंगे. उन्होंने तंज करते हुए कहा कि 11 साल बाद भी मंजिल का अता-पता नहीं है तो ये यात्रा कौन सी है.
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अखिलेश यादव ने कहा कि बजट भाषण में भूराजनीतिक परिस्थितियों की बात कही गई. सरकार ये बताए कि आपने इसे क्यों बनने दिया, पड़ोसियों से क्यों संबंध खराब हुए. आप ये क्यों भूल गए कि हमारा रुपया आपके शासन काल में सबसे निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया. रुपया नीचे जाएगा तो विनाश का ही रास्ता खोलेगा. उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि कारोबार कैसे कुछ लोगों के हाथ में ही सिमट गया. जनता आपके लिए बस नारे का विषय है. क्या आपके राज में अमीरी-गरीबी की खाई नहीं बढ़ी, स्वास्थ्य बीमा पर भी आपने टैक्स नहीं लगा दिया, बेरोजगारी के अंधेरे में आपने धकेला. फूड बास्केट ऑफ वर्ल्ड की बात है तो पहले अपने लोगों की थाली भर दीजिए.