भारत सहित पूरी दुनिया में नए साल का जश्न मनाया जा रहा है. एक तरफ शिमला, मसूरी, नैनीताल और ऋषिकेश के साथ-साथ पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भीड़ लगी हुई है तो वहीं अयोध्या, काशी, उज्जैन और जगन्नाथ पुरी जैसी धार्मिक नगरियों में भी लोगों का सैलाब उमड़ रहा है. भगवान राम की नगरी अयोध्या में 'जय श्री राम' के नारों के साथ नए साल का स्वागत किया गया. वहीं, उज्जैन के महाकाल मंदिर में गर्म जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया. आइए आपको बताते हैं कि किस धार्मिक नगरी में नए साल का कैसे स्वागत किया गया?
12 बजते ही लोगों ने शुरू कर दी नारेबाजी
उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में रविवार रात 11 बजे नए साल की पूर्व संध्या पर प्रसिद्ध लता मंगेशकर चौक पर लोगों की भीड़ जुटी. ठीक 12 बजे लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाए गए और नए साल का स्वागत किया. लोगों ने यहां सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें भी अपलोड कीं. बता दें कि यहां प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर के नाम पर चौराहे का नामकरण किया गया है. यह स्थान काफी लोकप्रिय हो रहा है.
उज्जैन: भस्म आरती के लिए उमड़ा सैलाब
महाकाल की नगरी मध्य प्रदेश के उज्जैन में साल के पहले दिन भस्म आरती के लिए लोगों का जन सैलाब उमड़ पड़ा. सोमवार सुबह 4 बजे बाबा महाकाल के पट खुलते ही लोगों की कतार लग गई. इसके बाद पंडे-पुजारियों ने बाबा महाकाल का गर्म जल से अभिषेक किया. इसके बाद दूध, दही, पंचामृत, द्रव्य प्रदार्थ, फलों के रस और भांग से बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया. इसके बाद बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया और पुजारियों ने विधि-विधान से भस्म आरती की. अंत में भगवान महाकाल की ढोल-नगाड़ों के साथ श्रृंगार आरती की गई. बता दें कि उज्जैन में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद बड़ी तादाद में दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आ रहे हैं.
बनारस: गंगा आरती के लिए जुटे लोग
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नए साल की पूर्व संध्या लोग गंगा आरती के लिए दशाश्वमेध घाट पहुंचे. यहां लोगों ने गंगा आरती के बाद बोटिंग की और नदी की धारा में दिए अर्पित कर भगवान को याद किया. इस दौरान घाट पर भारी तादाद में भीड़ नजर आई. यहां गंगा आरती के साथ-साथ सूर्य पूजा भी की गई.
पुरी: 1 बजे रात को खुल गए मंदिर के पट
ओडिशा के पुरी में प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में नए साल के दिन भीड़ को संभालने के लिए खास इंतजाम किए गए. यहां भक्तों के लिए मंदिर के पट रात 1 बजे ही खोल दिए गए. जिला कलेक्टर समर्थ वर्मा ने बताया कि यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि ज्यादा भीड़ के कारण अव्यवस्था ना फैले. बता दें कि हर साल 1 जनवरी को लाखों भक्त भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर पहुंचते हैं.