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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को 200 पन्नों में बताया कोरोना से लड़ने का 'नेशनल प्लान'

हलफनामे में कहा गया है कि मिड सितंबर में कोरोना के मामले कम होने के दौरान भी केंद्र सरकार ने जिले स्तर तक कोरोना के मामलों पर नजर रखी थी और राज्यों को कोरोना को लेकर एहतियात बरतने को कहा था. राज्यों से कोरोना के चलते किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने और प्लान तैयार रखने के लिए कहा गया था.

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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में 200 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है. (सांकेतिक तस्वीर)
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में 200 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है. (सांकेतिक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुप्रीम कोर्ट को बताया कोरोना से लड़ने का नेशनल प्लान
  • दवाओं और जरूरी सप्लाई को लेकर दी जानकारी
  • केंद्र ने दाखिल किया 200 पन्नों का हलफनामा

केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में 200 पन्ने का हलफनामा दाखिल किया. इसमें केंद्र ने कोरोना से लड़ने के लिए नेशनल प्लान की जानकारी दी है. इसमें महामारी के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से जरूरी सप्लाई और सेवाओं को लेकर बनाए गए प्लान के बारे में जानकारी दी गई है. हालांकि इस प्लान में दिन-ब-दिन कोरोना मैनेजमेंट के बारे में नहीं बताया गया है.

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हलफनामे में कहा गया है कि मिड सितंबर में कोरोना के मामले कम होने के दौरान भी केंद्र सरकार ने जिले स्तर तक कोरोना के मामलों पर नजर रखी थी और राज्यों को कोरोना को लेकर एहतियात बरतने को कहा था. राज्यों से कोरोना के चलते किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने और प्लान तैयार रखने के लिए कहा गया था.

पांच अप्रैल को भारत में 43.19 लाख लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई थी. यह विश्वभर में उस दिन लोगों को दी कई कुल डोज का 34 फीसदी था. 20 अप्रैल को भारत ने वैक्सीनेशन को लेकर नए अभियान का ऐलान किया. अब 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी. इसके संदर्भ में Sputnik-V को भी आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई है. 6 अन्य वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में हैं और 12 अतिरिक्त वैक्सीन प्री क्लीनिकल फेज में हैं. कोरोना वैक्सीन को लेकर लोगों के बीच भ्रम को दूर करने के लिए  INYAS लॉन्च किया गया है.

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 वैक्सीन बनाने के लिए मुंबई की Haffkine Biopharmaceutical Corporation Ltd को लगभग 65 करोड़ की मदद भारत सरकार की तरफ से दी गई है. यह पीएसई महाराष्ट्र सरकार के अंडर आती है. Haffkine Biopharmaceuticals से कहा गया है कि वो इस प्रक्रिया को 12 महीने के अंदर पूरी कर ले. हालांकि केंद्र सरकार ने इस जल्द से जल्द 6 महीने में पूरा करने के लिए कहा है. एक बार यहां वैक्सीन बनाने की सुविधा शुरू होने के बाद प्रति महीने 20 मिलियन डोज तैयार होगी. Indian Immunologicals Limited (IIL) को भी  भारत सरकार ने मदद पहुंचा रही है. यहां अगस्त-सितंबर 2021 तक  वैक्सीन की प्रति महीने 10-15 मिलियन डोज तैयार होगी.

सरकार ने एक मई से शुरू होने वाले वैक्सीनेशन अभियान के तीसरे चरण का भी जिक्र किया है. सरकार ने कहा है कि एक मई से 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन की डोज दी जाएगी. नेशनल प्लान में कहा गया है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार की तरफ से ऐसे फैसले लिए गए हैं जिससे सरकारी संस्थाओं, स्टेकहोल्डर्स कोरोना से निपटने के लिए जल्द से जल्द उचित कदम उठा सकें.

CDSCO ने पहले से ही सभी स्टेट ड्रग कंट्रोलर्स को 10 अप्रैल 2021 को स्पेशल जांच का निर्देश दिया था जिससे रेमडेसिविर की होर्डिंग और कालाबाजारी को रोका जा सके. यह नियमित रूप से किया जा रहा है.DCGI और स्टेट ड्रग कंट्रोलर्स कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर रहे हैं. देश में अलग-अलग जगहों पर सामने आए ऐसे  34 मामलों में कार्रवाई की गई है. सात लाइसेंसी मैन्युफैक्चरर्स के साथ अन्य मैंन्युफैक्चरिंग यूनिट को साथ लाया जा रहा है ताकि क्वालिटी कंट्रोल के साथ ज्यादा उत्पाद किया जा सके. रेमडेसिविर एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को लेकर केंद्र ने कहा कि  उत्पादों के बाद से जो इन कंपनियों द्वारा निर्यात के लिए विशेष रूप से निर्मित की गई दवाएं किसी भी नियामक प्रक्रिया से नहीं गुजरी. ऐसे में घरेलू इस्तेमाल के लिए इन दवाइयों  के क्वालिटी स्टैंडर्ड की जानकारी नहीं है. हालांकि इन्हें घरेलू इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल करना भारतीयों के स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक हो सकता है.

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