लोकसभा से पारित होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक आज राज्यसभा में पेश किया गया जिस पर चर्चा जारी है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया और विस्तार से बिल के बारे में जानकारी दी.
इसके बाद जब चर्चा हुई तो सरकार की तरफ से किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा तो कांग्रेस की तरफ से सैयद नसीर हुसैन ने चर्चा में हिस्सा लिया. इस दौरान एक क्षण ऐसा भी आया जब गृह मंत्री अमित शाह ने नसीर हुसैन को टोका और कहा कि वो गलत जानकारी सदन के समक्ष रख रहे हैं.
अमित शाह का पलटवार
अमित शाह ने कहा, 'मैं सदस्य को टोकना नहीं चाहता हूं. वो सदन के सामने गलत जानकारी रख रहे हैं. जो डिस्प्यूट है वो केवल इतना है कि अगर ट्रिब्यूनल के फैसले से कोई असंतुष्ट है तो भूमि का मामला है. इस पर सिविल सूट होना चाहिए. सिविल सूट में अधिकारों की बहुत विस्तृत रेंज होती है. इन्होंने इस पर अपील का प्रोविजन 2013 के कानून में रखा ही नहीं है. तो रिट के कार्यक्षेत्र में हाईकोर्ट के सामने जाता है. रिट का कार्यकक्षेत्र बहुत संकरा होता है.जो ट्रिब्यूनल का फैसला होता है,वो फाइनल होने के चांसेज 99 परसेंट हो जाते हैं. जिनकी भूमि है, उसका अधिकार जाता रहता है. ये भ्रम फैला रहे हैं.'
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क्या कहा था नसीर हुसैन ने
इससे पहले नसीन हुसैन ने कहा, 'कांग्रेस के जमाने में जो संशोधन आए थे, उसमें पूरा सहयोग और सपोर्ट इनका था. वक्फ बोर्ड के खिलाफ सबसे बड़ा भ्रम फैलाया गया है कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपनी जमीन घोषित कर देता था. क्या देश में रेवेन्यू रिकॉर्ड नहीं है, कानून नहीं है, कोर्ट नहीं है. हम ट्रेन में नमाज पढ़ते हैं तो क्या ट्रेन हमारी हो गई. उन्होंने कहा कि वक्फ को लेकर किए जा रहे दावे गलत हैं. कहा जा रहा है कि आप कोर्ट नहीं जा सकते, कोर्ट जा सकते हैं. बिल्कुल जा सकते हैं कोर्ट. हाईकोर्ट है, सुप्रीम कोर्ट है.'
क्या कहा था रिजिजू ने
किरेन रिजिजू ने कहा, "... हमने इस विधेयक में अपील का अधिकार शामिल किया है. अगर आपको ट्रिब्यूनल में अपना अधिकार नहीं मिलता है, तो आप इस अपील के अधिकार के तहत अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं... हमने ट्रांसपैरेंसी, अकाउंटेबिलिटी, एक्यूरेसी पर केंद्रित बदलाव किए हैं. हम किसी की धार्मिक भावना को चोट पहुंचाने के लिए नहीं हैं. मुसलमान वक्फ क्रिएट कर सकते हैं, फितरा और जकात में भी हस्तक्षेप कोई कैसे कर सकता है."