भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने बुधवार को वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में साइबर फ्रॉड की घटनाओं का जिक्र किया गया. इसमें बताया गया कि साइबर फ्रॉड की ज्यादातर घटनाएं म्यांमार, कंबोडिया, दुबई, चीन से हो रही हैं. इसके लेकर एजेंसियां कड़े कदम उठा रही हैं. साइबर फ्रॉड की रोजाना करीब 5000 कम्प्लेंट दर्ज हो रही है. 2021 और 22 में ऐसी कम्प्लेंट का ग्रोथ 113 % था अब यह घटकर 2022- 23 में 69% हो गया है. साइबर क्राइम के बड़े हॉट स्पॉट के रूप में जामताड़ा, मेवात और अब बेंगलुरू भी बन रहा है. CEO राजेश कुमार ने बताया कि भारत के नागरिकों के लिए एक सुरक्षित साइबर स्पेस बनाना हमारा विजन है. 340 करोड़ का बजट गृह मंत्रालय से I4C को मिला. 2014 में मंत्रालय ने एक एक्सपर्ट ग्रुप बनाया था. 2018 में इस संस्था को बनाने का सुझाव एक्सपर्ट्स की ओर से आया था. शुरुआत में रेप और गैंगरेप केस के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में सभी तरह के साइबर से जुड़े मामले को लेकर I4C काम कर रहा है.
हर रोज 45 से 50 हजार कॉल आते हैं
राजेश कुमार ने बताया कि 1930 को साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर बनाया गया. इस पर 45 से 50 हजार कॉल हर रोज आते हैं. 2023 में 129 शिकायत प्रति 1 लाख आबादी में रजिस्टर की गईं है. हरियाणा गुजरात तेलंगाना गोवा में सबसे ज्यादा अधिक कंप्लेंट रजिस्टर की गई है. I4C में 31 लाख से ज्यादा शिकायतें अब तक मिली है और 66000 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं. उन्होंने बताया कि इस समय देश भर में 99.9% पुलिस स्टेशन CCTNS के द्वारा जुड़े है. इनमें 100% डायरेक्ट FIR रजिस्टर कर रहे हैं. 263 बैंक, ई कॉमर्स कंपनीज इस सिस्टम से जुड़े हुए हैं. सिर्फ दिसंबर के महीने में 1930 हेल्पलाइन नंबर पर 12 लाख से ज्यादा कॉल रिसीव की गईं. जुलाई से अब तक 2,95,461 SIM कार्ड ब्लॉक किए गए हैं. 2810 वेबसाइट ब्लॉक की गईं. 595 मोबाइल एप ब्लॉक किए गए हैं, इसके साथ ही IMEI नंबर 46229 ब्लॉक किए गए हैं.
2,41,500 लोगों को साइबर हाईजीन की ट्रेनिंग दी गई है. जिससे कि देश में साइबर फ्रॉड की घटनाओं को रोका जा सके. झारखंड बिहार पश्चिम बंगाल, राजस्थान, दिल्ली हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से ज्यादा फ्रॉड की घटनाएं हो रही हैं. विदेशों में म्यांमार, कंबोडिया, दुबई, चीन से ऐसी घटनाएं ज्यादा सामने आ रही हैं.
मेवात इलाके से सबसे ज्यादा साइबर क्राइम हो रहे हैं
राजेश कुमार ने बताया कि मेवात इलाके से सबसे ज्यादा साइबर क्राइम हो रहे हैं. वह सेक्स एक्सटॉर्शन से जुड़े हुए हैं. OLX के जरिए सामान बेचने की घटनाएं इस एरिया में फर्जी तरीके से हो रहे हैं. झारखंड KYC बिल और दूसरे फ्रॉड हो रहे हैं. साउथ इंडिया SIM बॉक्स चल रहे हैं. जिससे फ्रॉड किया जा रहा है. लोगों के 1127 करोड़ रुपये साइबर फ्रॉड होने से बचा लिए गए हैं. जिसमे 4.3 लाख विक्टिम को फायदा पहुंचाया गया. 2024 में लक्ष्य हैं कि सभी बैंक के साथ API integration करें. नेशनल साइबर फोरेंसिक लैब के जरिए फोरेंसिक टूल अलग अलग राज्यों में उपलब्ध कराए जाते हैं. NCTC के साइबर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जाता है. 17 कोर्स उपलब्ध हैं.
राजेश कुमार ने बताया कि झारखंड ने बीते 1 महीने में 454 क्रिमिनल्स को देवगढ़ जामतारा और गिरडीह से पकड़ा है. झारखंड के अलावा हरियाणा और देश में साइबर क्राइम के दूसरे हॉटस्पॉट पर ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे हैं. 40-50% बाहर के देशों से स्कैम हो रहे हैं. जिसमें चीन की बड़ी भागीदारी है. दूसरे देशों से कोऑर्डिनेट भी कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि G20 वेबसाइट अपलोड होने के साथ ही साइबर अटैक शुरू हो गए. G20 समिट के दौरान ये अटैक पीक पर थे. 16 लाख प्रति मिनट साइबर अटैक किये गए, जिन्हें हमारी एजेंसियों ने टैकल किया. हालांकि ये कहां से हुआ ये साफ नहीं है.