राम सेतु मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल हुई है. इसमें भी रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक और धरोहर घोषित करने की मांग की गई है. इसके अलावा राम सेतु के आस पास समुद्र में कुछ किलोमीटर तक दीवार बनाने का आदेश पारित करने की भी मांग की गई है.
याचिका में कहा गया है कि राम सेतु पर बनी दीवार के दर्शन कर भी मोक्ष प्राप्ति की कामना की जा सके. याचिका में यह भी कहा गया है कि राम सेतु पर दीवार के निर्माण से करोड़ों लोगों की इच्छा पूरी होगी कि वह इस ऐतिहासिक पौराणिक पुल पर चल सकें जिस पर चलकर भगवान राम अपनी सेना के साथ लंका गए रावण को मारा और वहां राम राज्य स्थापित किया था.
क्या है ये पूरा मामला?
बता दें कि डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा कई साल पहले रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता देने के लिए याचिका दायर की गई थी. पिछले महीनों याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने कई बार कई CJI से इस मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग की थी. कई बार कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था, लेकिन अबतक केंद्र सरकार की ओर से कोई हलफनामा दायर नहीं किया गया है.
केंद्र सरकार का मामले पर क्या रुख?
हालांकि मोदी सरकार रामसेतु मामले पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुकी है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर सेतु समुद्रम परियोजना और राम सेतु के बारे में कहा था कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित सेतु समुद्रम परियोजना के लिए राम सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. परियोजना के लिए सरकार कोई दूसरा वैकल्पिक मार्ग तलाशेगी. स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि राम सेतु लाखों हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है, लिहाजा इसे न तोड़ा जाए. साथ ही रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए.