एक लोकसभा सांसद ने चार साल बाद फ़िल्मी दुनिया में वापसी की है. फिल्म का काफी हिस्सा लंदन में शूट हुआ है. और फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद कोई भी ऐसा नहीं कह सकेगा कि यह फिल्म रीजनल लैंग्वेज में है. बल्कि वीडियो को म्यूट कर के देखिये तो लगेगा कि जैसे हम किसी बॉलीवुड फिल्म का ही ट्रेलर देख रहे हैं. इतना ही नहीं फिल्म का नाम भी किसी अंग्रेजी की किताब जैसा ही है- लव इन लंदन. लेकिन असल में यह सब कुछ एक उड़िया फिल्म के बारे में है. जो ओडिशा के सिनेमा घरों में लग चुकी है.
बॉलीवुड और उसके आगे साउथ सिनेमा की बातें करने वाले लोगों को यह देखना होगा कि कई रीजनल इंडस्ट्री हैं जो बेहतरीन काम कर रही हैं. कई फ़िल्में तो ऐसी होती हैं जो हिंदी में बाद में आती हैं और किसी दूसरी भाषा में पहले. जिसके बाद हमें उस इंडस्ट्री की फिल्मों के बारे में पता चलता है कि यहां ऐसी फ़िल्में बन रही हैं. इसी कड़ी में बीती 13 जून को ओडिशा में एक फिल्म रिलीज हुई है. जिसकी काफी चर्चा है, और वजह है इस फिल्म की कहानी और इसका लीड एक्टर. फिल्म लंदन में शूट हुई है.
एक नज़र फिल्म के ट्रेलर पर -
ओडिशा में केंद्रपाड़ा सीट से लोकसभा सांसद अनुभव मोहंती ने तकरीबन चार साल के बाद वापस फिल्मों की राह पकड़ी है. 'लव इन लंदन' की खुमारी जब तक उतरेगी तब तक ओडिशा के भाईजान यानी कि अनुभव की दूसरी फिल्म 'रावण' रिलीज के लिए तैयार हो जाएगी. अनुभव की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी पहली फिल्म 'आई लव यू' आज भी अगर सिनेमाघरों में लगती है तो हर शो हाउसफुल हो जाता है. ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी है कि अभिनेता से नेता बने अनुभव आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले अपनी लोकप्रियता की आजमाइश कर रहे हैं? हालांकि चार साल के गैप को लेकर अनुभव का यही कहना है कि वो बतौर सांसद अपनी केंद्रपाड़ा की जनता के लिए फिल्मों से दूर रहे. लेकिन अब वो अपने फैन्स के लिए वापस लौटे हैं. एक सांसद होने के साथ साथ वो ओडिशा की फिल्मों के जरिये जन-जन से जुड़ जाते हैं, जिन्होंने उन्हें 'सुपरस्टार अनुभव मोहंती' बनाया है.
संगम प्लेक्स में प्रीमियर
कटक के संगम प्लेक्स थियेटर में 13 जून को अपनी फिल्म के प्रीमियर के दौरान पहुंचे अनुभव मोहंती को हजारों की भीड़ ने घेर लिया. हर तरफ मोबाइल के कैमरे अपने 'भाईजान' की तस्वीर लेने में जुटे हुए थे. कहीं फिल्म के पोस्टर को लोग दूध से नहला रहे थे तो कहीं लोग दीपक जला कर पूजा कर रहे थे. हिंदी पट्टी में फिल्म और फिल्मी व्यक्ति को लेकर ऐसा क्रेज़ बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन ओडिशा से लेकर केरल तक अपने हीरो के लिए इस तरह का क्रेज़ देखते बनता है. ऐसे ही एक क्रेज के चलते अनुभव की फिल्म देखने के लिए जितने लोग थियेटर के अंदर थे तो उससे कहीं ज्यादा बाहर. अपने सुपरस्टार के लिए इस तरह का क्रेज़ साउथ सिनेमा में भी देखा जाता रहा है. जहां लोग देर रात से ही अपने फेवरेट स्टार की फिल्म देखने के लिए लंबी कतारों में खड़े हो जाते हैं.
अनुभव के लिए उमड़ने वाली भीड़ साफ़ गवाही दे रही है कि उनके दिल में अनुभव के लिए प्यार कम नहीं हुआ है. ऐसे में आने वाले लोकसभा चुनाव में भी क्या अनुभव के हिस्से जनता का प्यार आएगा? इस सवाल का जवाब तो 2024 के नतीजे ही दे पाएंगे. फ़िलहाल बुक माय शो पर इस सस्पेंस फिल्म को 10 में से 8.7 की रेटिंग मिल चुकी है. जो कि बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों को नहीं हासिल है.
अनुभव पर दांव लगाने का डर
अपने करियर की शुरुआत में तकरीबन डेढ़ साल इंतज़ार के बाद अनुभव की पहली फिल्म बतौर लीड एक्टर रिलीज हुई थी. कमाल की बात यह थी कि इस दौरान अनुभव के हाथ से निकली सभी फ़िल्में उनकी पहली फिल्म के आस पास ही रिलीज हो रही थीं. और अनुभव की फिल्म के अलावा सभी फिल्मों को थियेटर मिले. यह काफी अजीब था कि ओडिशा फिल्म इंडस्ट्री के इतने फेमस प्रोड्यूसर की फिल्म को थियेटर नहीं मिला. आज भी जब फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स से इसकी वजह पूछी जाए तो वो यही कहते हैं कि अनुभव तब बेहद दुबले पतले थे, और ऊपर से फिल्म का नाम 'आई लव यू' तो लोग फिल्म पर दांव लगाने से डर रहे थे.
काफी मशक्कत के बाद सिर्फ 6 थियेटर में रिलीज होने वाली इस फिल्म ने उड़िया फिल्मों का इतिहास बदल कर रख दिया. अब तक पचास से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके अनुभव मोहंती का जीवन भी किसी फ़िल्म से कम नहीं. बहुत कम उम्र में एल्बम के जरिये फ़िल्मी दुनिया में आना, सबसे कम उम्र में राज्यसभा का सदस्य हो जाना और फिर अचानक इलेक्टेड पॉलिटिक्स जरिये एक बड़े नेता को धूल चटा देना. यह सब कुछ उन्हें फ़िल्मी किरदार जैसा ही बना देता है.
लोकसभा पहुंचने के बाद अनुभव ने फिल्मों को किनारे रख दिया था. बीते चार साल में अनुभव किसी भी फिल्म में नहीं नजर आए. अनुभव की इस अनुपस्थिति से ओडिशा की जनता काफी निराश भी हुई. फिल्मों में रोमांस और विलेन को पटकने वाले अनुभव अब अपने फैन्स के सामने नहीं थे. लेकिन अब एक बार फिर अनुभव 'लव इन लंदन' के जरिये अपने फैन्स के सामने हैं. माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले अनुभव की सिनेमा पर वापसी, चुनाव पर सकारात्मक असर डाल सकती है.
एक हाथ में फ़िल्मी और दूसरे हाथ में राजनीति की स्क्रिप्ट लेकर चल रहे अनुभव मोहंती अपने राजनीतिक जीवन में आगे क्या करेंगे यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन फ़िल्मी करियर में 'लव इन लंदन' के बाद वो 'रावण' के साथ एक बार फिर सिनेमा और उड़िया फिल्मों के बॉक्सऑफिस पर कब्जा जमाने के लिए तैयार हैं. 'रावण' का अनाउंसमेंट उन्होंने अपनी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म से पहले किया था.
'लव इन लंदन' फिल्म का ट्रेलर देखकर कहना मुश्किल है कि यह कोई उड़िया फिल्म है. लेकिन एक सच यह भी है कि रीजनल सिनेमा का संसार अब बहुत बड़ा हो चुका है. हमें यह समझने की ज़रूरत है कि हिंदी फिल्मों के इतर भी फिल्मों की एक बड़ी दुनिया है. और यह बहुत दुखद है कि इस दुनिया को अक्सर हम तब जान पाते हैं जब उसी तासीर पर बॉलीवुड कोई फिल्म बना लेता है.
जैसे साउथ की कई फिल्मों से लोग तब वाकिफ हुए जब इस इंडस्ट्री ने 'बाहुबली' जैसी विराट फिल्म को सिनेमा के पर्दे पर देखा. उससे पहले साउथ एक्टर्स में गिने चुने ही नाम हुआ करते थे जिन्हें लोग जानते थे. जान पहचान की ये हद रजनीकांत, नागार्जुन जैसे नामों तक ही सीमित थी. लेकिन अब धीरे-धीरे ये बाउंड्री ख़त्म हो रही है. लोग हिंदी सिनेमा से आगे निकल रहे हैं और रीजनल इंडस्ट्री भी तेजी से ग्रो कर रही है.
अभिनेता से नेता बनने का सफ़र
27 अप्रैल 2013 को अनुभव ने बीजू जनता दल का दामन थाम कर राजनीति की दहलीज पर कदम रखा. हालांकि ये एंट्री सेलेक्टेड पॉलिटिक्स की थी यानी कि राज्यसभा. लेकिन फिर भी राजनीतिक गलियारों में सरकार के इस फैसले को लेकर चर्चा रही. कई लोगों का मानना था कि अनुभव फिल्मों तक ही रहें तो बेहतर है, राजनीति की दुनिया में उनकी एक्टिंग नहीं चलने वाली. लेकिन अनुभव ना सिर्फ राज्यसभा पहुंचे बल्कि सिर्फ 32 साल की उम्र में राज्यसभा पहुंचने वाले शख्स भी बने.
ओडिशा की राजनीति में अभी उबाल आना बाक़ी था. सीएम नवीन पटनायक के साथ मतभेद के बाद बैजयंत पांडा को 24 जनवरी, 2018 को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया गया. पार्टी को शक था कि पांडा बीजेपी के करीबी हो गए हैं. बीजू जनता दल ने उन पर मनी लांड्रिंग का भी आरोप लगाया था. जिसके बाद मई, 2018 में पांडा ने पहले पार्टी और दो सप्ताह बाद ही लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. और बीजेपी में शामिल हो गए.
नवीन पटनायक का सबसे बड़ा दांव
2019 के लोकसभा के चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने जय पांडा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. जिसमें पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष और प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी. बताया जाता है कि तत्कालीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के फैसले के बाद उन्हें पार्टी में इतना बड़ा पद मिला था. इतना ही नहीं पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए 2019 के लोकसभा चुनाव के रण में उतारा. ऐसे में बीजेडी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि कभी नवीन के सबसे करीबी कहे जाने वाले जय पांडा के सामने मैदान में किसे उतारा जाए. कहा जाता है कि बैजयंत के सामने किसी भी नेता ने खड़े होने के लिए मना कर दिया था. तब नवीन पटनायक ने अपने चहीते अनुभव मोहंती पर सबसे बड़ा दांव लगाया.
राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अनुभव लोकसभा के रण में उतरने के लिए तैयार थे. तो वहीं अनुभव को फ़िल्मी किरदार में बड़े से बड़े धुरंदर से लड़ता हुआ देख चुकी ओडिशा की जनता भी शायद मान चुकी थी कि एक अनुभव ही है जो बैजयंत को मात दे सकता है. इस लड़ाई की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं रही. चुनाव के जो नतीजे सामने आए उनसे कई राजनीतिक विश्लेषकों के विश्लेषण पर सवाल खड़ा हो गया. कभी जिस सीट से बैजयंत दो बार सांसद रहे उसी सीट से अनुभव ने उनको 1,52,584 वोटों से शिकस्त दी.
बीजू बाबू की पसंदीदा सीट- केंद्रपाड़ा
केंद्रपाड़ा सीट की बात करें तो यह खुद बीजू पटनायक की पसंदीदा सीट थी. यहां की तासीर भी बाग़ी ही रही. यहां दूसरे ही लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की मुखालिफ़त शुरू हो गयी थी. यहां एक दौर ऐसा भी रहा कि प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने कब्जा जमाए रखा, इस घेरे को तोड़ने वाला कोई और नहीं बल्कि बिजयानंद पटनायक उर्फ़ बीजू पटनायक थे. समंदर किनारे बसा ये जिला पटनायक परिवार की आन बान और शान है.
ओडिशा की केंद्रपाड़ा सीट, बीजेडी का गढ़ मानी जाती रही है. शायद यही वजह है कि जब इस सीट पर अनुभव मोहंती और बैजयंत पांडा आपने सामने आए तब सूबे के सीएम नवीन पटनायक ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. और कई दिन तक यहां डेरा भी डाले रखा. और चुनावी नतीजों में आखिरकार अनुभव की पॉपुलैरिटी और नवीन पटनायक की मेहनत रंग लाई. लेकिन अब जब एक बार फिर से इसी सीट को लेकर चर्चाएं तेज हैं, वजह है आगामी 2024 का लोकसभा चुनाव.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद यहां यही कयास लगाई जा रही हैं कि अनुभव कभी भी पाला बदल सकते हैं. इसको लेकर जब अनुभव से हमने सवाल पूछा तो उन्होंने इसपर कहा कि नवीन पटनायक ने उन्हें राजनीति में आने का मौका दिया है. ऐसे में वो पार्टी छोड़ने के किसी भी विचार में नहीं हैं. लेकिन इन सभी अटकलों का दौर अगर सही साबित हुआ तो एक बार फिर बीजू जनता दल पर केंद्रपाड़ा की सीट बचाने का संकट खड़ा हो सकता है. ऐसी स्थिति में नवीन पटनायक अपने किस 'अनुभव' को चुनावी रण में उतारेंगे यह देखने वाला होगा.