यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर स्थायी समिति ने संसद में सोमवार को बैठक की. इस बैठक में कानूनी विभाग, विधायी विभाग और कानून आयोग के प्रतिनिधियों को यूसीसी पर जानकारी देने के लिए बुलाया गया था. इस दौरान अधिकांश विपक्षी दलों ने लोकसभा चुनाव से पहले यूसीसी चर्चा के समय पर सवाल उठाया. इसमें कांग्रेस के मनिकम टैगोर, डीएमके के पी विल्सन शामिल थे. उन्होंने कहा कि जब पहले ही दो साल तक परामर्श पर संसाधन खर्च किए जा चुके हैं तो फिर से समग्र अभ्यास करने की क्या जरूरत है.
कांग्रेस ने जताई आपत्ति
संसदीय स्थाई समिति (कानून एवं न्याय and Justice) पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि, लॉ कमीशन ने खुद ही माना कि ना तो यह neccesary ना desirable. फिर लॉ कमीशन को सुनने का फायदा क्या है? दरअसल uniform civil code पर 2018 की लॉ कमीशन का कंसलटेटिव पेपर सदस्यों को दिया गया था. कांग्रेस सांसद विवेक तंखा ने एक चिट्ठी में रिपोर्ट का हवाला देते हुए कई आपत्तियां जताईं हैं. रिपोर्ट में जो अलग-अलग , समुदाय , धर्मों , और क्षेत्रों में अलग-अलग पर्सनल लॉ की जिक्र किया इसके बारे में भी तंखा ने विरोध के सुर लगाए हैं.
19 लाख लोगों ने भेजे हैं सुझाव
बता दें कि समान नागरिक संहिता को लेकर अबतक 19 लाख लोग संसदीय समिति को इस संबंध में अपने सुझाव भेज चुके हैं. बैठक में कुछ सदस्यों ने सरकार पर इस कानून को जल्द लाए जाने का आरोप लगाया है. समिति के कुछ सदस्यों का कहना था कि सिर्फ एक फैमिली लॉ नहीं बनाया जाना चाहिए. यह समाज के हर धर्म, जाति, समुदाय से जुड़ा हुआ मामला है. लिहाजा इसको ध्यान में रखना जरूरी है. बताया गया कि इस मुद्दे पर समिति अभी कोई फैसला या आदेश नहीं दे रही है.
चार-पांच महीनों में रिपोर्ट सौंपेगा विधि आयोग
एक सूत्र के मुताबिक, विधि आयोग अपनी रिपोर्ट चार-पांच महीने के भीतर कानून मंत्रालय को देगा क्योंकि पहले ही सुझाव आ चुके हैं इसलिए किसी और विचार-विमर्श की जरूरत नहीं पड़ेगी. मंत्रालय उस आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार कर सकता है. पहले विधि आयोग की रिपोर्ट एक सुझाव पत्र थी, यूसीसी के समर्थन में एक सदस्य ने कहा कि सरकार उस पर भी कार्रवाई नहीं कर सकी, क्योंकि पेपर अंतिम तिथि पर अपलोड किया गया था. उधर, BSP ने समर्थन किया कि UCC पर परामर्श बैठक आयोजित होनी चाहिए.
नॉर्थ-ईस्ट में पहले से है तनावः संजय राउत
हालांकि संजय राउत के नेतृत्व वाली यूडी सेना ने कहा कि यह अमेरिका और अन्य देशों में है, इसलिए हम इसका समर्थन करते हैं. लेकिन यूसीसी को चुनावों को ध्यान में रखते हुए नहीं लाया जाना चाहिए. संजय राउत ने कहा कि, नॉर्थ-ईस्ट को लेकर चर्चा की गई है, उनके पास अपने कानून हैं और उत्तर-पूर्व के नगालैंड और मिजोरम में पहले से ही तनाव में है. इस पर मंत्रालय के प्रतिनिधि ने कहा कि उन राज्यों में विधानसभा की मंजूरी के बिना कोई कानून पारित नहीं किया जा सकता.
आदिवासियों पर भी फंस सकता है पेच
इसके बाद, एक सदस्य ने कहा कि आदिवासियों को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा मिलती है, अगर उन्हें छूट मिलेगी तो एकरूपता कैसे आएगी? सूत्रों ने कहा कि जसबीर गिल ने सिख समुदाय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 1905 का आनंद विवाह अधिनियम बहुत संघर्ष के बाद लाया गया था, इसे लेकर पंजाब में उबाल आ सकता है. सुशील मोदी ने कहा कि आदिवासी समुदाय और पूर्वोत्तर राज्यों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए. बता दें कि, इस स्थायी समिति में मुस्लिम समुदाय से कोई सदस्य नहीं है.
धर्म के अनुसार काम नहीं करता कानूनः आरिफ मोहम्मद खान
समान नागरिक संहिता को लेकर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि यूसीसी का विरोध गलत तरीके से किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर यूसीसी आता है तो जो दलील इसके खिलाफ दी जा रही है ये देश कि विविधता पर चोट है और अल्पसंख्यकों की रीतियों पर आघात है, ऐसी बातें ठीक नहीं है. आजतक से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का फोकस न्याय की समानता पर है.
सोमवार को आजतक से बात करते हुए केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि, यूसीसी न्याय के अधिकार के लिए है और कोई भी कानून धर्म के हिसाब से काम नहीं करता है. उन्होंने इस्लाम की रीतियों पर आघात वाले सवाल पर कहा कि जिस तरह की बातों को आधार बनाया जा रहा है वह ठीक नहीं है. जैसे, इस्लाम में भी अवैध संबंधों की इजाजत नहीं, और इस आधार पर यूसीसी का विरोध नहीं होना चाहिए.
बता दें कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का सीधा अर्थ एक देश-एक कानून है. अभी शादी, तलाक, गोद लेने के नियम, उत्तराधिकारी, संपत्तियों से जुड़े मामलों के लिए सभी धर्मों में अलग-अलग कानून हैं. समान नागरिक संहिता आती है तो फिर सभी के लिए एक ही कानून होगा, फिर चाहे वो किसी भी धर्म या जाति का ही क्यों न हो.