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जब तक चीन पीछे नहीं हटेगा, तब तक हम भी डटे रहेंगे, लद्दाख में गतिरोध पर बोले आर्मी चीफ

आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे ने साफ कर दिया कि एलएसी से भारतीय सैनिक तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक चीन अपनी सेना पीछे नहीं करता. उन्होंने कहा कि एलएसी पर दोनों देशों के 50-60 हजार सैनिक तैनात हैं.

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जनरल नरवणे ने इंटरव्यू में भारत-चीन गतिरोध पर खुलकर बात की है. (फाइल फोटो-PTI)
जनरल नरवणे ने इंटरव्यू में भारत-चीन गतिरोध पर खुलकर बात की है. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जनरल नरवणे का चीन को दो टूक जवाब
  • 'किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार'
  • उन्होंने कहा, समस्या का हल निकालना जरूरी

आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे ने चीन को साफ संदेश देते हुए कहा कि जब तक लद्दाख में तनाव वाली जगहों से चीनी सैनिकों की वापसी नहीं हो जाती, तब तक भारत भी अपने सैनिक पीछे नहीं हटाएगा. न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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पूर्वी लद्दाख में पिछले साल 5 मई से दोनों देशों के बीच तनाव शुरू हुआ था. उस वक्त 45 साल बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी. पैंगॉन्ग लेक इलाके से सैनिकों के वापसी शुरू हो गई है, लेकिन अभी भी कई इलाकों को लेकर बातचीत जारी है.

जनरल नरवणे ने जोर देते हुए कहा कि ऊंचे इलाकों पर भारतीय सेना की पकड़ मजबूत है और हम किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, "हम बहुत स्पष्ट हैं कि जब तक सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसइंगेजमेंट नहीं होता है, तब तक भारतीय सेना भी पीछे नहीं हटेगी. भारत और चीन के बीच कई समझौते हुए हैं जिन्हें चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) एकतरफा तोड़ रही है."

उन्होंने बताया कि उत्तरी सीमा पर स्थिति काबू में है और चीन के साथ मिलिट्री लेवल की कई दौर की बातचीत होनी है, जिसमें अप्रैल 2020 की स्थिति बहाल करने पर ध्यान दिया जाएगा.

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एलएसी पर दोनों देशों के 50-60 हजार सैनिक तैनात

उन्होंने कहा, "भारतीय सेना का रुख साफ है कि हम न अपनी जमीन का नुकसान सहेंगे और न ही एकतरफा बदलाव की इजाजत देंगे. हम पूर्वी लद्दाख में अपने दावों को सुनिश्चित करते हुए चीन के साथ बिना तनाव बढ़ाए व्यवहार कर रहे हैं."

पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देप्सांग जैसे इलाकों में जारी गतिरोध कब तक खत्म हो सकता है? इस सवाल के जवाब में आर्मी चीफ ने कहा कि इसकी भविष्यवाणी करना मुश्किल है. उन्होंने कहा, "भारतीय सेना सभी समझौते और प्रोटोकॉल का पालन कर रही है, लेकिन पीएलए ने अपरंपरागत हथियारों के इस्तेमाल और भारी संख्या में अपने सैनिकों को तैनात करके तनाव बढ़ा दिया है."

जनरल नरवणे ने कहा कि "पेशेवर सेना होने के नाते दोनों देशों के लिए ये बहुत जरूरी है कि जल्द से जल्द मसले का हल निकाला जाए और दोबारा से भरोसा कायम किया जाए." उन्होंने कहा, "एलएसी से करीब एक हजार किलोमीटर दूरी पर निचले इलाकों में स्थित पीएलए के ट्रेनिंग इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है. एलएसी में इस वक्त दोनों देशों के 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं." उन्होंने बताया कि अगले दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है और हमें हर दौर की बातचीत से नतीजों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

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इस पर आर्मी चीफ ने जवाब दिया कि "चीन अपनी तरफ गांवों का निर्माण कर रहा है. हो सकता है कि बढ़ती आबादी के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा रहा हो." उन्होंने बताया कि भारत भी एलएसी के पास कई बुनियादी ढांचे तैयार कर रहा है जिसमें सैनिकों के रहने के लिए घर, वॉटर सप्लाई और बिजली की सप्लाई शामिल है.

 

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