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आसाराम: रेप के आरोप से लेकर उम्रकैद की सजा तक, पढ़िए टाइमलाइन

31 अगस्त, 2013 को जोधपुर पुलिस ने आसाराम को एमपी के इंदौर से गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तारी के बाद आसाराम को जोधपुर के मंडोर स्थित पीएसी कैंपस में रखा गया. 2 सितंबर, 2013 को आसाराम की मेडिकल जांच कराई गई जिसमें साबित हुआ कि वो सेक्स करने में सक्षम है.

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आसाराम रेप के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं.(फाइल फोटो)
आसाराम रेप के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं.(फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आसाराम आजीवन कारावास की सजा काट रहा है
  • जोधपुर जेल में बंद है रेप केस का दोषी आसाराम
  • अगस्त 2013 में सामने आया था रेप का मामला

नाबालिग लड़की से रेप के मामले में आसाराम आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. इस वक्त आसाराम जोधपुर जेल में बंद है. अगस्त 2013 में रेप के मामले के सामने आने के बाद से आसाराम के दिन लदने शुरू हुए थे. लेकिन रेप केस में फैसला आते-आते करीब 5 साल लग गए. इस दौरान आसाराम ने कभी बेल मांगी तो कभी लड़की को नाबालिग मानने से इनकार कर दिया. लेकिन पीड़िता और उसके वकीलों ने हार नहीं मानी. आइए इस मामले की पूरी टाइमलाइन जानते हैं, कब क्या हुआ?

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शुरुआत करते हैं साल 2013 अगस्त से, जब एक नाबालिग लड़की ने मनाई आश्रम में आसाराम पर रेप का आरोप लगाया था. 19 अगस्त, 2013 को लड़की का परिवार आसाराम से मिलने दिल्ली पहुंचता है, लेकिन वो मिलने से इनकार कर देता है. जिसके बाद परिवार दिल्ली के कमला नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराता है.

20 अगस्त, 2013 को  लड़की का मेडिकल कराया जाता है. जिसके बाद आसाराम पर नाबालिग से रेप करने का मामला दर्ज हुआ. इसके बाद 21 अगस्त को इस केस को जोधपुर पुलिस को हैंडओवर कर दिया जाता है.

31 अगस्त, 2013 को जोधपुर पुलिस ने आसाराम को एमपी के इंदौर से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद आसाराम को जोधपुर के मंडोर स्थित पीएसी कैंपस में रखा गया. 2 सितंबर, 2013 को आसाराम की मेडिकल जांच कराई जाती है, जिसमें साबित होता है कि वो सेक्स करने में सक्षम है. इसके बाद 6 नवंबर, 2013 को जोधपुर पुलिस ने आसाराम के खिलाफ चार्जशीट फाइल की. इस चार्जशीट में आसाराम पर नाबालिग से रेप का इल्ज़ाम लगा.

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इस मामले में आसाराम के छिंदवाड़ा आश्रम के गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन शिल्पी के साथ-साथ आसाराम के तीन सहयोगियों शरतचंद्र, शिवा और प्रकाश पर शामिल होने का आरोप लगा. इस बीच 8 नवंबर, 2013 को राजस्थान हाई कोर्ट ने जोधपुर सेशन कोर्ट को आदेश दिया कि मामले की सुनवाई रोज़ हो. ताकि मामले का जल्द से जल्द निपटारा हो.

इस दौरान 7 फरवरी, 2014 को जोधपुर कोर्ट ने आसाराम पर रेप, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य अपराधों में आरोप तय किए. हालांकि, आसाराम ने खुद को निर्दोष बताते हुए जमानत/रिहा करने की अपील की. लेकिन कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी.  

इन सबके बीच 23 मई, 2014 को मामले में गवाह अमृत प्रजापति की गोली मारकर हत्या कर दी गई. मामले में कई और गवाहों पर भी हमले हुए थे. कई लोगों को धमकी दी गई. 13 फरवरी, 2015 को गवाह राहुल सचान पर जोधपुर कोर्ट के बाहर जानलेवा हमला हुआ. ऐसे घटनाक्रमों के बीच आसाराम की जमानत याचिका कई बार खारिज हुई.

12 सितंबर, 2017 को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 14 फर्ज़ी बाबाओं की एक लिस्ट जारी की. इस लिस्ट में आसाराम का नाम भी होता है. 7 अप्रैल, 2018 को एससी-एसटी विशेष अदालत में जिरह पूरी होती है. और 25 अप्रैल, 2018 को आसाराम को नाबालिग से रेप का दोषी करार दिया जाता है. आसाराम को आजीवन कारावास की सज़ा मिली. वहीं, शिल्पी और शरतचंद्र को 20-20 साल की सज़ा सुनाई गई.

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