अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पूरी दुनिया के नेता पल-पल कट्टर संगठन की हरकत पर नजर जमाए हुए हैं. तालिबान को काबुल पर कब्जा जमाए हुए एक हफ्ते हो गए हैं, लेकिन अब तक सरकार का गठन नहीं किया है. इसके लिए लगातार तालिबान के शीर्ष नेतृत्व के बीच में बातचीत चल रही है. वहीं, ताजिकिस्तान में अफगानिस्तान के राजदूत मोहम्मद जहीर अगबर ने ताजा हालातों पर 'इंडिया टुडे' से एक्सक्लूसिव बात की है. उन्होंने वर्तमान हालात के पीछे अशरफ गनी और उनकी लीडरशिप को जिम्मेदार ठहराया है.
राजदूत मोहम्मद जहीर अगबर ने कहा है कि अफगानिस्तान के पास अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित की गई सेना है, जबकि तालिबानी लड़ाकों के पास ज्यादा कुछ नहीं है. मोहम्मद जहीर ने अशरफ गनी के देश छोड़ देने को अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि उन्होंने बिना लड़े ही सरेंडर कर दिया. साथ ही जहीर ने गनी के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद ताजिकिस्तान आने की बात से भी इनकार कर दिया.
इंडिया टुडे से बात करते हुए मोहम्मद जहीर ने कहा कि अफगानिस्तान के संविधान के अनुसार, जब राष्ट्रपति की मौत हो जाती है या फिर देश छोड़कर चले जाते हैं तब उस मौके पर उप-राष्ट्रपति उनकी जगह लेते हैं. इस तरह अमरुल्लाह सालेह राष्ट्रपति हैं. उन्होंने बात करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में युद्ध अफगानों का नहीं, बल्कि महाशक्तियों का है. युद्ध का परिणाम शांति होना चाहिए था, लेकिन ऐसा होने से पहले ही गनी ने सरेंडर कर दिया.
जहीर ने कहा, "तालिबान को यह समझने की जरूरत है कि अफगानिस्तान वही नहीं है. यह पिछले 20 वर्षों में बदल गया है. अगर तालिबान एक समावेशी सरकार चाहता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है, अन्यथा बाकी चीजें काम नहीं करेंगी.'' सालेह के मैदान में डटे होने को लेकर राजदूत ने कहा कि जब गनी ने एक्शन नहीं लिया, तब सालेह ले रहे हैं. पंजशीर में अहमद शाह मसूद के बेटे शांति चाहते हैं. वहीं, घाटी के लोग हमला नहीं करना चाहते हैं, वे खुद को बचाने के लिए सशस्त्र हैं. आशा है कि पंजशीर एक सुरक्षित क्षेत्र बना रहेगा.
उन्होंने अमेरिका को टैक्स का पैसा अफगानिस्तान पर खर्च करने के लिए धन्यवाद किया. साथ ही कहा कि सबकुछ इंटरनेशनल कम्युनिटी पर ब्लेम नहीं कर सकते हैं. हालात के लिए गनी सरकार जिम्मेदार थी. काबुल में आज जो कुछ भी हो रहा है, उसके पीछे गनी का खराब शासन और खराब नेतृत्व ही है. जहीर ने कहा, ''भारत अफगानिस्तान का एक अच्छे दोस्त हैं. जिंदगी बचाने के लिए भाग रहे लोगों को पनाह देने के लिए पड़ोसी देशों का धन्यवाद.''
मोहम्मद जहीर ने कहा कि अफगानिस्तान में लोग लोकतांत्रिक शासन चाहते हैं और अगर उन्हें यह नहीं मिलता है, तो संभावना है कि प्रतिरोध होगा और लोग वापस लड़ेंगे.'' उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को नकारात्मक नहीं होने देना चाहिए. हम सभी पड़ोसी हैं और सामूहिक रूप से कहीं भी आतंकवाद के खिलाफ खड़े होंगे.
(रिपोर्ट: रेवती हरिहरन)