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पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में कोई सीक्रेट तहखाना तो नहीं है? पता लगाने के लिए लेजर स्कैनिंग कराएगी ओडिशा सरकार

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा,'मरम्मत कार्य के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में मामूली सुधार किया गया है और जल्द ही मरम्मत कार्य की तारीख तय कर दी जाएगी.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मरम्मत कार्य के दौरान भगवान जगन्नाथ और उनके भाई देवताओं के अनुष्ठान बाधित नहीं होंगे.'

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जगन्नाथ मंदिर के बाहर मौजूद टीम. (Photo: PTI)
जगन्नाथ मंदिर के बाहर मौजूद टीम. (Photo: PTI)

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) जल्द ही पुरी में जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाने) की मरम्मत शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि एएसआई पहले खजाने के बाहरी कक्ष और फिर आंतरिक कक्ष का मूल्यांकन और मरम्मत करेगा.

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हरिचंदन ने कहा,'मरम्मत कार्य के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में मामूली सुधार किया गया है और जल्द ही तारीख तय कर दी जाएगी.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मरम्मत कार्य के दौरान भगवान जगन्नाथ और उनके भाई देवताओं के अनुष्ठान बाधित नहीं होंगे.' हरिचंदन ने कहा कि ओडिशा सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि किसी गुप्त बॉक्स का पता लगाने के लिए आंतरिक कक्ष की लेजर स्कैनिंग की जाए या नहीं.

कानून मंत्री ने की BJD की आलोचना

रत्न भंडार की डुप्लीकेट चाबियों के मुद्दे पर बोलते हुए कानून मंत्री ने पिछली बीजेडी सरकार की आलोचना की और कहा कि खजाना खोलने से बचने के लिए चाबियों को लेकर अनावश्यक ड्रामा किया गया. जांच की जाएगी और उड़िया लोगों और जगन्नाथ परंपराओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा. उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
 
बीजेपी ने पूरा किया अपना चुनावी वादा

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कानून मंत्री ने आगे कहा,'भाजपा के चुनावी वादे को पूरा करते हुए सरकार ने खजाने के अंदर रखे आभूषणों और कीमती सामानों की सूची बनाने और ढांचे की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस उद्देश्य के लिए गठित एक पैनल ने 14 और 18 जुलाई को रत्न भंडार के बाहरी और भीतरी कक्षों को खोलकर कीमती सामानों को अस्थायी स्ट्रांग रूम में स्थानांतरित कर दिया.'

मूल स्थान पर रखा जाएगा कीमती सामान

पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा,'मरम्मत का काम पूरा होने के बाद कीमती सामान को उनके मूल स्थान पर वापस रखा जाएगा. यह सूची उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिश्वनाथ रथ की अध्यक्षता वाली समिति की देखरेख में बनाई जाएगी.'

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