असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने शनिवार को कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र को लेकर आलोचना की और आरोप लगाया कि यह भारत की तुलना में पाकिस्तान में चुनाव के लिए अधिक उपयुक्त है. उन्होंने दावा किया कि घोषणापत्र का उद्देश्य सत्ता में आने के लिए समाज को बांटना है. कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है, जो पांच 'न्याय के स्तंभों' और उनके तहत 25 गारंटियों पर केंद्रित है. पार्टी द्वारा किए गए कुछ वादे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी, राष्ट्रव्यापी जाति जनगणना और अग्निपथ योजना को खत्म करना हैं.
इसके जवाब में सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का घोषणापत्र 'तुष्टिकरण की राजनीति' है.
सरमा ने जोरहाट निर्वाचन क्षेत्र में एक चुनावी रैली के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह तुष्टिकरण की राजनीति है और हम इसकी निंदा करते हैं. घोषणापत्र ऐसा लगता है, जैसे यह भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान के चुनाव के लिए है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम, तीन तलाक, बहुविवाह और बाल विवाह का समर्थन नहीं करता. कांग्रेस की मानसिकता समाज को बांटना और सत्ता में आना है.
सरमा ने राज्य की सभी सीटों पर बीजेपी की जीत का दावा करते हुए कहा कि बीजेपी ने एक 'आंदोलन' का रूप ले लिया है, जिसका अर्थ है देश को 'विश्व गुरु' बनाना.
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सरमा पर काग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने हिमंत बिस्वा सरमा पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके जैसा दलबदलू व्यक्ति सबसे पुरानी पार्टी के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी लोकाचार को नहीं समझ पाएगा. बता दें कि सरमा 2015 में बीजेपी में शामिल हुए थे. एजेंसी के मुताबिक असम कांग्रेस के प्रवक्ता बेदब्रत बोरा ने कहा कि सरमा कई सालों तक कांग्रेस में रहे, लेकिन वह पार्टी के मुख्य लोकाचार को समझ नहीं पाए, इसलिए वह बीजेपी में चले गए. पिछले कुछ वक्त से बीजेपी में रहने के बाद भी, वो कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश करते हैं. बीजेपी के प्रति अपनी वफादारी साबित करें.
बोरा ने सरमा द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि पार्टी के घोषणापत्र का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के हितों की रक्षा करना है.
असम में होने वाले लोकसभा चुनाव की बात की जाे, तो सूबे में तीन चरणों में 19 अप्रैल, 26 अप्रैल और 7 मई को मतदान होगा. वोटों की गिनती 4 जून को होगी.